फाइलों में दफन हो गया ग्रेटर मुजफ्फरपुर, शामिल किए गए थे 42 गांव
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MUZAFFARPUR

फाइलों में दफन हो गया ग्रेटर मुजफ्फरपुर, शामिल किए गए थे 42 गांव

Ravi Pratap

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नगर निगम की आय बढ़ाने एवं सीमावर्ती लोगों को शहरी सुविधाओं का लाभ मिल सके, इसके लिए शहर के विस्तार की योजना बनाई गई। इसे सरकार को भेजा गया। सरकार ने प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए आपत्तियों पर प्रतिवेदन मांगा। इसे भी तैयार कर भेजा गया। उसके बाद बात आगे नहीं बढ़ी और ग्रेटर मुजफ्फरपुर की योजना फाइलों में दफन हो गई।

शहरी परिवेश का रूप धारण करने के बाद भी शहर की सीमा से बाहर रहने वाले नगर निगम के सीमावर्ती क्षेत्रों को शामिल कर ‘ग्रेटर मुजफ्फरपुर’ बनाने का निर्णय वर्ष 2006 में लिया गया था। सरकार ने भी इस तरह का प्रस्ताव सभी शहरी निकायों से मांगा था। इसी आलोक में नगर निगम ने 16 मई 2006 को ग्रेटर मुजफ्फरपुर का प्रस्ताव सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा, लेकिन यह दो सालों तक लंबित रहा।

जून 2008 में सरकार को सुध आई और उसने निगम को पत्र लिखकर शहर के विस्तार के प्रस्ताव को निगम बोर्ड से पारित कराकर भेजने का निर्देश दिया। जुलाई 2008 में निगम सशक्त स्थायी समिति एवं निगम बोर्ड ने प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी। उसके बाद महापौर से अनुमोदन लेकर पारित प्रस्ताव को एक बार फिर सरकार को भेज दिया गया। लंबे इंतजार के बाद अप्रैल 2010 में सरकार ने पुन: निगम को पत्र भेजकर प्रस्ताव का विरोध करने वालों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों पर प्रतिवेदन भेजने का निर्देश दिया। इसे भेजने के बाद क्या हुआ, बताने वाला कोई नहीं?

कांटी और मुशहरी अंचल के 42 गांवों से 20.945 वर्ग किमी क्षेत्र एवं 97 हजार की आबादी ग्रेटर मुजफ्फरपुर में जोड़ी गई थी।

-शहर से सटे कांटी अंचल के दादर कोल्हुआ, पैगंबरपुर कोल्हुआ, सदातपुर, बैरिया, दामोदरपुर, चकमुरमुर, फतेहपुर, मुरादपुर, चैनपुर। मुशहरी अंचल के सिकंदरपुर, चकगाजी, सहबाजपुर सलेम, मुरादपुर दुल्लाह, अहियापुर, गणेशपुर, शेखपुर, नाजीरपुर, चंदवारा, चकमोहब्बत, बारा जगन्नाथ, राघोपुर, मझौली धर्मदास, शेखपुर उर्फ नारायणपुर अनंत, शेरपुर, रतवारा, गन्नीपुर, मोहम्मदपुर काजी एवं भिखनपुर डीह।

क्षेत्र के विस्तार से निगम और जनता को होगा लाभ

-निगम की आय में होगी वृद्धि।

-राज्य एवं केंद्र सरकार से अधिक लाभ प्राप्त हो सकेगा।

-आबादी एवं क्षेत्र के आधार पर शहर को केंद्रीय योजनाओं में मिलेगी प्राथमिकता।

-नए क्षेत्र के लोगों को मिलेंगी शहर क्षेत्र की तरह बुनियादी सुविधाएं।

-विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए प्रखंड का चक्कर लगाने से मिलेगी मुक्ति।

-शहरी योजनाओं का मिलेगा लाभ।

-निगम द्वारा लगाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के कर के दायरे में आ जाएंगे नए क्षेत्र के मकान।

इस विषय पर अपर नगर आयुक्त विशाल आनंद ने कहा कि शहर की सीमा का विस्तार होने से नगर निगम को लाभ होगा। प्रस्ताव के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। इस संबंध में संबंधित लोगों से बात करेंगे। वहीं,इस बरे में महापौर सुरेश कुमार ने कहा कि शहर की सीमा पर बसे क्षेत्र शहर का स्वरूप ले चुके हैं। वे शहरी सुविधा का लाभ भी उठा रहे हैं। उनको अब शहर से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ा जाना चाहिए। प्रस्ताव को लेकर उन्हें जानकारी नहीं है। इस संबंध में बात करेंगे।

Input : Dainik jagran

MUZAFFARPUR

सावधान, 24 घंटे में ही खतरनाक स्तर पर पहुंचा वायु प्रदूषण

Ravi Pratap

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शहर में वायु प्रदूषण का स्तर एक दिन पूर्व के मुकाबले बुधवार को और अधिक खराब स्थिति में पहुंच गया। एयर क्वालिटी इंडेक्स के हिसाब से मंगलवार को जहां खराब स्थिति दर्ज की गई थी वहीं अगले 24 घंटे में ही यह बढ़कर और बदतर हो गई। यह स्तर अत्यंत खतरनाक जोन से सिर्फ एक पायदान पीछे रह गया है। ऐसे में लोगों को घर के बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है। स्वस्थ लोग भी सांस की बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।

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Photo by Saurav Anuraj

फेफड़े/हृदय रोगियों के लिए आबोहवा जानलेवा साबित हो सकती है। फिलहाल, शहर की जो स्थिति है वे बेहद चिंताजनक है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर सांस की बीमारी के मरीज बढ़ सकते हैं। इंडेक्स वैल्यू दिल्ली और पटना की अपेक्षा एक दिन पूर्व जहां 277 थी। वहीं, अगले ही दिन बढ़कर 326 पर जा पहुंची।

एयर क्वालिटी इंडेक्स स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों से कराती अवगत वायु गुणवत्ता प्रबंधन केंद्र, मुजफ्फरपुर के अनुसार एयर क्वालिटी 326 का स्तर काफी खराब स्थिति है। ये रेड जोन के करीब पहुंच गई है। शाम आठ बजे कलेक्ट्रेट कैंपस में अवस्थित प्रदूषण केंद्र से ये आंकड़ा सामने आया। दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू 456 पर पहुंच गई, जो अत्यंत गंभीर स्थिति दर्शाती है। वहीं, पटना में ये 373 जा पहुंची है।

अच्छा (0-50) : कुछ नहीं

संतोषजनक (51-100) : संवेदनशील लोगों को सास लेने में तकलीफ हो सकती है। थोड़ा प्रदूषित (101-200) : फेफड़े की बीमारी जैसे अस्थमा और हृदय रोगी, बच्चे और वयस्कों को सास लेने में तकलीफ हो सकती है।

खराब (201-300) : लंबे समय तक ऐसा रहने पर लोगों को सास लेने में तकलीफ और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को काफी असुविधा हो सकती है। बहुत खराब (301-400) : लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर लोगों को सास की बीमारी हो सकती है। फेफड़े और दिल की बीमारियों वाले लोगों पर प्रभाव अधिक खतरनाक हो सकता है।

गंभीर (401-500) : यह आपातकाल कहा जाएगा। स्वस्थ लोगों में भी सांस की बीमारी हो सकती है। फेफड़े/हृदय रोग वाले इसके प्रभाव से गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है।

Input : Dainik Jagran

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MUZAFFARPUR

मुजफ्फरपुर शे’ल्टर हो’म रे’प के’स: ये हैं वो गु’नहगा’र जिनपर CBI ने लगाए हैं गं’भीर आ’रोप

Santosh Chaudhary

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मुजफ्फरपुर शे’ल्टर हो’म यौ’न शो’षण मा’मले में करीब  7 महीने की नियमित सुनवाई के बाद साकेत कोर्ट (Saket Court) ने अपना फैस’ला सुर’क्षित रख लिया था. आज इस माम’ले में फै’सला आ जाएगा. इस मा’मले में 21 आरो’पियों पर चा’र्जशीट (Cha’rgesheet) दा’यर की गई थी जिसमें मुख्य आ’रोपी बा’लिका गृ’ह के संचालक ब्रजेश ठाकुर (Brajeh Thakur) को मु’ख्य आ’रोपी बनाया गया है. CBI ने ब्रजेश ठाकुर सहित सभी 21 आ’रोपियों पर बेहद ही सं’गीन आ’रोप लगाए हैं.

इस मामले में दायर चार्जशीट की कॉपी के अनुसार इस गुनाह में एक पूरा नेक्सस काम करता था जिसका मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर था. इसमें उसके साथ रवि रोशन और मामू सहित बालिका गृह के अन्य कर्मचारी सहयोगी था. वह अन्य आरोपितों के साथ मिलकर लड़कियों को गंदे भोजपुरी गानों पर डांस करने को विवश करता था और लड़कियों को दूसरे के पास भेजता भी था.

इस गुनाह में अन्य कई बराबर के भागीदार रहे हैं. आइये इनमें से कुछ प्रमुख चेहरों की भूमिका के बारे में जानते हैं.

ब्रजेश ठाकुर: बालिका गृह का वास्तविक मालिक था और वही इसका संचालन करता था. एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति का वह कार्यपालक निदेशक पद पर था. इसी एनजीओ के माध्यम से बालिका गृह का संचालन होता था. उस पर बालिका गृह की लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया है.

शाइस्ता परवीन उर्फ मधु: यह ब्रजेश ठाकुर की खास राजदार थी और एनजीओ सेवा संकल्प और विकास समिति के प्रबंधन से जुड़ी थी. यह लड़कियों को सेक्स की शिक्षा देती थी और गंदे गाने पर डांस करने को विवश करती थी. इससे मना करने वाली लड़कियों को सजा के तौर पर नमक रोटी खाने को दिया जाता था.

रवि कुमार रोशन: यह बाल संरक्षण पदाधिकारी (सीपीओ) था. ब्रजेश के साथ-साथ इस पर भी अधिकतर लड़कियों ने दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है. वह छोटे कपड़े में वल्गर गाने पर डांस करने के लिए लड़कियों को विवश करता था.

विकास कुमार: यह बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) का सदस्य था. उस पर भी लड़कियों ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है. यह अन्य आरोपितों के साथ मिलकर लड़कियों को स्लीपिंग पिल्स देता था.

दिलीप कुमार वर्मा: यह बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) का अध्यक्ष था. लड़कियों ने उसकी पहचान फोटो से की. इसने उसे सबसे गंदा आदमी बताया. यह लड़कियों से साथ दुष्कर्म करता था. यह ब्रजेश ठाकुर का खास था.

रोजी रानी: यह बाल संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक थी. लड़कियों ने उसे सारी घटनाओं की जानकारी दी, लेकिन उसने कोई एक्शन नहीं लिया. उस पर आरोपितों को सहयोग करने का आरोप लगाया गया है.

डॉ. प्रमीला: यह बालिका गृह की लड़कियों की स्वास्थ्य जांच करती थी. लड़कियों ने उसे बताया कि ब्रजेश, रवि रोशन, विजय व विकास ने उसके साथ दुष्कर्म किया है.  इस पर उसने बस इतना कहा कि कोई बात नहीं तुम लोगों को दवा दे दूंगी. इसने पीड़िता की कोई मदद नहीं की.

रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर साहेब उर्फ मास्टर जी: यह ब्रजेश के पारिवारिक प्रेस का मैनेजर था. लड़कियों ने इसे गंदा आदमी बताया है. यह लड़कियों को गंदी नजर से देखता था. यह लड़कियों से साथ दुष्कर्म और पिटाई करता था.

डॉ. अश्वनी उर्फ आसमनी: बालिका गृह की लड़कियां इस डॉक्टर से काफी भयभीत रहती थीं. यह लड़कियों को ट्रैक्यूलाइज्ड कर बेहोश करता था. यह अपने आला से लड़कियों को बिना कपड़े के जांच करता था.

विजय कुमार तिवारी, गुड्डू और कृष्णा राम: सभी ब्रजेश ठाकुर का नौकर था. सभी पर लड़कियों से दुष्कर्म करने और पिटाई करने का आरोप लगाया गया है.

विक्की: मधु का भतीजा है. यह भी रात में बालिका गृह पहुंचता था. किशोरियों से यौन हिंसा करता था.

इंदू कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी: सभी बालिका गृह की कर्मचारी थीं. इन सभी पर लड़कियों को नशे की दवाई देने, मारपीट करने के आरोप हैं. इनपर बालिका गृह की लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने वाले ब्रजेश, विकास, दिलीप, रवि रोशन और अन्य का सहयोग करने का भी आरोप है.

एक महिला कर्मचारी पर लड़कियों से साथ आपत्तिजनक स्थिति में सोने का भी आरोप है. यह अन्य महिला कर्मचारियों के साथ मिलकर लड़कियों की पिटाई करती थी.

Input : News18

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MUZAFFARPUR

अब एलएस कॉलेज से करिए योग में पीजी डिप्लोमा

Santosh Chaudhary

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l.s college -muzaffarpur

एलएस कॉलेज में यौगिक स्टडीज कोर्स में पीजी डिप्लोमा कर सकते हैं। प्राचार्य प्रो. ओमप्रकाश राय की सालभर की कड़ी मशक्कत के बाद इस कोर्स को यहां चालू कराने में सफलता मिल पाई है। बुधवार को विश्वविद्यालय ने प्राचार्य को पत्र भेजकर कोर्स शुरू करने की मंजूरी की जानकारी दी। सीसीडीसी डॉ.अमिता शर्मा ने प्राचार्य को बताया कि सभी वैधानिक निकायों से अनुमति मिलने के बाद राज्य सरकार ने भी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी है। सौ सीटों के लिए यह अनुमति मिली है। इसी सत्र से यह कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत शुरू होगा। प्राचार्य ने कहा कि यह कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह कोर्स दर्शनशास्त्र विभाग की देखरेख में चलेगा। इसके लिए 100 सीटें निर्धारित की जाएंगी।

जल्द ही नामांकन संबंधी सूचना जारी होगी। स्नातक पास छात्र-छात्रएं इस कोर्स में नामांकन करा सकते हैं। साथ ही आसपास के जिलों व दूसरे विश्वविद्यालयों के योग शिक्षक भी इस कोर्स में फैकल्टी के रूप में शामिल किए जा सकते हैं। कोर्स चालू होने को लेकर शिक्षकों ने प्रसन्नता जताई है। साथ ही प्राचार्य को इस बात के लिए बधाई भी दी है कि उनकी तत्परता व मेहनत की बदौलत कॉलेज को ये उपलब्धि हासिल हो पाई है। बधाई देने वालों में डॉ. एसके मुकुल, डॉ. एसआर चतुर्वेदी, डॉ. गजेंद्र कुमार, डॉ. शशि कुमारी सिंह, डॉ. शैल कुमारी, प्रो. त्रिपदा भारती, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. जफर अहमद सुल्तान, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. जयकांत सिंह जय, डॉ. एनएन मिश्र, डॉ. अजय कुमार, डॉ. ललित किशोर, डॉ. सतीश कुमार समेत अन्य शिक्षक शामिल हैं।

Input : Dainik Jagran

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