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बंगाल में स्कूटी की सियासत: ममता बनर्जी को जवाब देने के लिए स्मृति ईरानी ने बंगाल की सड़कों पर दौड़ाई स्कूटी

Santosh Chaudhary

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बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के स्कूटी वाले प्रदर्शन का जवाब देने के लिए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मैदान में उतर आईं हैं। स्मृति ईरानी ने शुक्रवार को सोनारपुर में रोड शो किया। इस दौरान उन्होंने करीब 25 किलोमीटर का सफर स्कूटी से तय किया। रोड शो के दौरान उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना भी साधा। कहा, ‘ममता दीदी, आपका समय अब खत्म हुआ। आपने कार्यकाल में बंगाल को केवल हिंसा मिला है। आपने यहां लोकतंत्र को खत्म कर दिया। लोगों की आवाजें दबाईं। अब वही जनता आपको हराने का काम करेगी। अब यहां कमल खिलेगा।

News18 Telugu - Mamata Banerjee: స్కూటీ నేర్చుకుంటూ కింద పడబోయిన సీఎం మమత..  వీడియో వైరల్– News18 Telugu- Telugu News, Today's Latest News in Telugu

केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू नहीं होने दिया

स्मृति ईरानी ने कहा, TMC सरकार ने केंद्र सरकार की तरफ से गरीबों, किसानों, महिलाओं के लिए चलाए गए किसी भी योजना को यहां लागू नहीं होने दिया। इससे जनता को काफी नुकसान हुआ है। बंगाल का विकास पूरी तरह से रुक गया। यहां केवल और केवल हिंसात्मक घटनाएं बढ़ी हैं।

Watch: On scooter, Smriti Irani leads BJP rally for Bengal polls | India  News,The Indian Express

बढ़ती महंगाई के खिलाफ ममता ने चलाई थी ई-स्कूटी

इसके पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार के विरोध में सचिवालय के लिए ई-स्कूटी से निकलीं। बीच रास्ते में दीदी से स्कूटी नहीं संभली और वे गिरते-गिरते बचीं। सुरक्षाकर्मीयों ने उन्हें ऐन मौके पर गिरने से बचा लिया। संभलने के बाद वे फिर से सचिवालय की ओर निकल पड़ीं। ममता ने अपने गले में महंगाई का पोस्टर लगा रखा था।

After Mamata, Smriti Irani rides scooty to lead BJP rally in West Bengal |  Election News - Times of India

उन्होंने पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें बढ़ने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। पोस्टर में केंद्र सरकार को महंगाई रूपी राक्षस के तौर पर दिखाया गया। इसमें केंद्र सरकार से सवाल था कि आपके मुंह में क्या है? आपने पेट्रोल-डीजल और गैस सभी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ा दी हैं।

Source : Dainik Bhaskar

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कोरोना से जंग जीतने वाले मरीजों की नई मुसीबत, अब अचानक जा रही आंखों की रोशनी

Ravi Pratap

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कोविड-19 को मात देने के बाद कवक (फंगल) संक्रमण ‘म्यूकोरमाइकोसिस’ की वजह से आंखों की रोशनी गंवाने के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। कवक संक्रमण (म्यूकोरमाइकोसिस) गंभीर है लेकिन दुर्लभ है। हालांकि, महाराष्ट्र और गुजरात के स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इस संक्रमण के मामले कोविड-19 से ठीक हुए मरीजों में बढ़ रहे हैं और जिसकी वजह से उनमें आंखों की रोशनी चले जाना और अन्य जटिलताएं उत्पन्न हो रही है।

सूरत स्थित किरण सुपर मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के अध्यक्ष माथुर सवानी ने बताया कि कोविड-19 से तीन हफ्ते पहले ठीक हुए मरीज में म्यूकोरमाइकोसिस का पता चला है। सवानी ने बताया कि फंगल इंफेक्शन के लिए 50 रोगियों का इलाज चल रहा है जबकि 60 और मरीज इसके इलाज का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अबतक सात मरीज अपनी आंखों की रोशनी गंवा चुके हैं। रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर प्रभारी डॉ.केतन नाइक ने बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस के बढ़ते मरीजों को देखते हुए सूरत सिविल अस्पताल में उनका इलाज करने के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। अहमदाबाद के आरवा सिविल अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि रोजाना कम से कम पांच म्योकोरमाइकोसिस मरीजों का ऑपरेशन हो रहा है। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में आंख-कान-नाक के डॉक्टर देवांग गुप्ता ने बताया कि यहां हमारे पास रोज पांच से 10 मरीज म्यूकोरमाइकोसिस के आ रहे हैं।

महाराष्ट्र में 200 मरीज: महाराष्ट्र में म्यूकोरमाइकोसिस (कवक संक्रमण) से कम से कम आठ लोग अपनी दृष्टि खो चुके हैं। ये लोग कोविड-19 को मात दे चुके थे, लेकिन काले कवक की चपेट में आ गए। राज्य में ऐसे लगभग 200 मरीजों का उपचार चल रहा है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) के प्रमुख, डॉक्टर तात्याराव लहाने ने यह जानकारी दी। डॉ.लहाने ने पहले कहा था कि आठ कोविड-19 मरीजों की मौत हुई है लेकिन बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि अनजाने में उन्होंने ऐसा कहा। डॉक्टर लहाने ने कहा कि कवक संक्रमण की बीमारी के बारे में पहले से ही पता है, लेकिन इसके मामले कोविड-19 संबंधी जटिलताओं की वजह से बढ़ रहे हैं जिसमें स्टेरॉइड दवाओं का इस्तेमाल कई बार रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ा देता है और कुछ दवाओं का परिणाम रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के रूप में निकलता है।

लक्षण: डॉ.लहाने ने बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस का लक्षण सिरदर्द, बुखार, आंखों के नीचे दर्द, नाक या साइनस में जकड़न और आंशिक रूप से दृष्टि बाधित होना है। उन्होंने बताया कि इसके इलाज के लिए 21 दिनों तक इंजेक्शन लगाना पड़ता है और एक दिन के इंजेक्शन का खर्च करीब नौ हजार रुपये है।

Input: Live Hindustan

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कोरोना को चारों खाने चित्त कर देगी DRDO की ‘रामबाण’ दवाई, ऑक्सीजन की कमी भी होगी दूर

Muzaffarpur Now

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देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर की वजह से मचे हाहाकार के बीच शनिवार को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कोरोना के इलाज के लिए एक दवा के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दे दी है। इस दवा का नाम 2- डिऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-DG) नाम दिया गया है। ये दवा डीआरडीओ के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेस (INMAS) और हैदराबाद सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) ने साथ मिलकर बनाया है।

Oxygen System Planning Tool | UNICEF Office of Innovation

दवा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस के बढ़ते केस में यह रामबाढ़ साबित हो सकता है। डीसीजीआई के मंजूरी से पहले यह दवा क्लीनिकल ट्रायल्स में सफल साबित हुई है। जिन मरीजों पर इस दवा का ट्रायल किया गया था वो बाकी मरीजों की तुलना में जल्दी रिकवर हुए और इलाज के दौरान ऑक्सीजन पर उनकी निर्भरता भी कम रही।

देश में कोरोना वायरस की पहली लहर सामने आने के बाद ही डीआरडीओ इस दवा पर काम करना शुरू कर दिया था। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने अप्रैल 2020 में लैब में इस दवा पर रिसर्च किए थे। रिसर्च में पता चला कि यह दवा कोरोना वायरस के मरीजों के लिए मददगार साबित हो सकती है। जिसके बाद डीसीजीआई ने मई 2020 में दवा के दूसरे फेज के ट्रायल की मंजूरी दी।

ट्रायल के दौरान क्या सामने आया?
डीसीजीआई से दूसरे फेज के ट्रायल की अनुमति मिलने के बाद अलग-अलग हिस्सों में कुल 11 अस्पतालों में ट्रायल किया गया। मई से अक्टूबर तक चलने वाले इस ट्रायल में 110 मरीजों को शामिल किया गया। ट्रायल के दौरान यह बात सामने आई कि जिन मरीजों को यह दवा दी गई वो बाकी मरीजों की तुलना में कोरोना वायरस से जल्दी रिकवर हो गए। आम मरीजों की तुलना में ट्रायल में शामिल मरीज लगभग 2.5 दिन पहले ठीक हो गए।

तीसरे फेज का ट्रायल
वहीं, तीसरे फेज का ट्रायल दिसंबर 2020 से मार्च 2021 के बीच देशभर के 27 अस्पताल में किया गया। इस बार के ट्रायल में मरीजों की संख्या दोगुनी कर दी गई और दिल्ली, यूपी, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों के मरीजों को शामिल किया। तीसरे फेज के ट्रायल के दौरान जिन लोगों को यह दवा दी गई उनमें से 42 फीसदी मरीजों की ऑक्सीजन की निर्भरता तीसरे दिन ही खत्म हो गई। दूसरी जिनको यह दवा नहीं दी उनमें 31 फीसदी मरीज ऐसे रहे जिनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता खत्म हुई। मतलब साफ है कि दवा ने मरीज की ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम किया।

कैसे ली जाती है यह दवा?
यह दवा न तो टैबलेट के रूप में है और नहीं इंजेक्शन के रूप में। यह पाउडर के रूप में आती है। पाउडर को पानी में घोलकर लिया जाता है। दवा लेने के बाद जब ये शरीर में पहुंचता है तो कोरोना संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरस को बढ़ने से रोकती है। डीआरडीओर की माने तो यह दवा कोरोना संक्रमित कोशिकाओं की पहचान करती है फिर अपना काम शुरू करती है। दवा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा कोरोना मरीजों के लिए रामबाढ़ साबित हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब मरीजों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।

क्या है दवा का बेसिक प्रिंसिपल?
दवा बनाने वाले डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. एके मिश्रा ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए बताया कि किसी भी वायरस की ग्रोथ होने के लिए ग्लूकोज का होना बहुत जरूरी है। जब वायरस को ग्लूकोज नहीं मिलेगा, तब उसके मरने की चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। इस वजह से वैज्ञानिकों ने लैब ने ग्लूकोज का एनालॉग बनाया, जिसे 2डीआरसी ग्लूकोज कहते हैं। इसे वायरस ग्लूकोज खाने की कोशिश करेगा, लेकिन यह ग्लूकोज होगा नहीं। इस वजह से उसकी तुरंत ही वहीं मौत हो जाती है। यही दवा का बेसिक प्रिंसिपल है।

Source : Hindustan

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अस्पतालों में भर्ती होने को नहीं होगी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट की जरूरत, सरकार की नई गाइडलाइंस

Muzaffarpur Now

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नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड रोगियों को अस्पताल में भर्ती किए जाने की राष्ट्रीय नीति में बदलाव किया है. नई नीति के मुताबिक कोविड वायरस से संक्रमित किसी भी व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने के लिए पॉजिटिव सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. यानी कि अब मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाए जाने के लिए कोविड-19 की पॉजिटिव रिपोर्ट की जरूरत नहीं होगी. पहले अस्पतालों में भर्ती करवाने के लिए कोविड की पॉजिटिव रिपोर्ट या फिर सीटी-स्कैन की जरूरत होती थी.

कोविड-19 के संदिग्ध मामले वाले मरीज को केस की गंभीरता के मुताबिक संदिग्ध वॉर्ड सीसीसी, डीसीएचसी और डीएचसी में भर्ती किया जाएगा. किसी भी मरीज को किसी भी वजह से सेवाएं देने से मना नहीं किया जाएगा. इसमें ऑक्सीजन या आवश्यक दवाएं जैसी दवाएं शामिल हैं, भले ही रोगी किसी अलग शहर का रहने वाला हो.

नई नीति के मुताबिक किसी भी मरीज को उस शहर में, जहां अस्पताल स्थित है वैध पहचान पत्र न उपलब्ध करा पाने में सक्षम न होने पर प्रवेश देने से मना नहीं किया जाएगा. अस्पताल में प्रवेश जरूरत के आधार पर दिया जाएगा. गौरतलब है कि देश में एक दिन में कोविड-19 से रिकॉर्ड 4,187 मरीजों की मौत होने के बाद मृतक संख्या 2,38,270 पर पहुंच गई है जबकि 4,01,078 नये मामले सामने आने के बाद संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 2,18,92,676 हो गए हैं.

रिकवरी रेट घटकर हुआ 81.90 प्रतिशत

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक 37,23,446 मरीजों का अब भी इलाज चल रहा है जो कुल मामलों का 17.01 प्रतिशत है जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने की राष्ट्रीय दर घटकर 81.90 प्रतिशत हो गई है.

आंकड़ों के मुताबिक बीमारी से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या 1,79,30,960 हो गई है जबकि संक्रमण से मृत्यु दर 1.09 फीसदी दर्ज की गई है.

देश में कोविड-19 के मरीजों की संख्या पिछले साल सात अगस्त को 20 लाख को पार कर गई थी. वहीं कोविड-19 मरीजों की संख्या 23 अगस्त को 30 लाख, पांच सितंबर को 40 लाख और 16 सितंबर को 50 लाख के आंकड़े को पार कर गई थी.

इसके बाद 28 सितंबर को कोविड-19 के मामले 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख, 20 नवंबर को 90 लाख, 19 दिसंबर को एक करोड़ के पार हो गए थे. भारत ने चार मई को गंभीर स्थिति में पहुंचते हुए दो करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया था.

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के मुताबिक सात मई तक 30,04,10,043 नमूनों की जांच की गई है जिनमें से 18,08,344 नमूनों की शुक्रवार को जांच की गई.

मौत के नये मामलों में, सर्वाधिक 898 मौत महाराष्ट्र में, कर्नाटक में 592, उत्तर प्रदेश में 372, दिल्ली में 341, छत्तीसगढ़ में 208, तमिलनाडु में 197, पंजाब में 165, राजस्थान में 164, हरियाणा में 162, उत्तराखंड में 137, झारखंड में 136, गुजरात में 119 और पश्चिम बंगाल में 112 लोगों की मौत हो गई.

देश में अबतक हुई कुल 2,38,270 मौत में से 74,413 महाराष्ट्र में, 18,739 दिल्ली में, 17,804 लोगों की कर्नाटक में, 15,171 की तमिलनाडु में, 14,873 उत्तर प्रदेश में, 12,076 लोगों की पश्चिम बंगाल में, 10,158 की पंजाब में, 10,158 की छत्तीसगढ़ में और 10,144 लोगों की पंजाब में मौत हुई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों की मौत अन्य गंभीर बीमारियों के कारण हुई है.

Source : News18

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