पटना. बक्सर में गंगा नदी में लगातार मिल रही शव को लेकर अब तक उठ रहे सवालों पर ब्रेक लग चुका है. अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद ने न्यूज़ 18 को बताया है कि ये सभी लाशें उत्तर प्रदेश से ही गंगा नदी में डाला जा रही थीं जो बहकर बिहार के बॉर्डर वाले जिला बक्सर के चौसा और महावीर घाट पर आकर रुक गई थीं. इस गंभीर मसले को लेकर बिहार सरकार के आदेश पर जांच शुरू हुई. चार स्तर पर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई. राज्य के मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से बात की. बिहार गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद ने खुद UP के अपर मुख्य सचिव से बात की जबकि DGP बिहार ने UP के DGP से बात की. इन सब के अलावा बक्सर में डीएम ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर और बलिया के डीएम से बात कर पूरे मामले को समझा और फिर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच हुई.

बातचीत में बिहार की तरफ से कोरोना काल मे गंगा नदी में लाशों को बहाने पर सख्त और कड़ी आपत्ति जताई गई है. DGP बिहार संजीव कुमार सिंघल के मुताबिक हर हाल में अपने प्रदेश के सीमावर्ती जिलो में कोविड प्रोटोकॉल का पालन की बात कही गई है. उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से यह आश्वस्त किया गया है कि आगे ऐसा नहीं होगा, इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा.

गंगा नदी में लगाया गया महाजाल, 6 लाशें मिली

अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद और DGP संजीव कुमार सिंघल ने बताया कि बक्सर जिला के रानीगंज के पास गंगा नदी में एक महाजाल लगाया गया है. जाल के लगाने के बाद भी उसमें उत्तर प्रदेश की तरफ से बहकर आई 6 लाशें फंसी है. इससे पहले बक्सर SDM की जांच में कुल 71 लाशें मिली थीं, जिनकी पूरी विधि विधान के साथ अंत्येष्टि कर दी गई है. हालांकि इन सभी शवों का बिसरा सुरक्षित रख लिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर इनका मिलान उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलो में रहने वाले लोगों के DNA जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर किया जा सके. ACS HOME चैतन्य प्रसाद ने यह भी कहा कि इस मामले में अब जो भी कार्रवाई करनी है, वो उत्तर प्रदेश सरकार को करनी है. हमें उम्मीद है कि UP सरकार बहुत जल्द इस मामले में ठोस कार्रवाई करेगी.

Source : News18

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