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बस तीन डॉक्यूमेंट देकर मिल जाएंगे खेती के लिए 3 लाख रुपये, ये है पूरा प्रोसेस

Santosh Chaudhary

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केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के लिए सिर्फ तीन डॉक्यूमेंट ही लिए जाएंगे. पहला यह कि जो व्यक्ति अप्लीकेशन दे रहा है वो किसान है या नहीं. इसके लिए बैंक उसके खेती के कागजात देखें और उसकी कॉपी लें. दूसरा निवास प्रमाण पत्र और तीसरा आवेदक का शपथ पत्र कि उसका किसी और बैंक में लोन बकाया नहीं है. सरकार ने बैंकिंग एसोसिएशन से कहा है कि केसीसी आवेदन के लिए कोई फीस न ली जाए.

न्यूज18 हिंदी से बातचीत में शेखावत ने कहा, हम कोशिश कर रहे हैं कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की कवरेज बढ़ जाए. अभी यह लगभग 50 फीसदी किसानों के पास ही है. देश में 14 करोड़ किसान परिवार हैं, जिसमें से सात करोड़ के पास ही किसान क्रेडिट कार्ड है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इसे बनवाने के लिए किसानों को जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

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शेखावत ने बताया कि राज्य सरकारों और बैंकों को कहा गया है कि वो पंचायतों के सहयोग से गांवों में कैंप लगाकर किसान क्रेडिट कार्ड बनवाएं. मोदी सरकार ने केसीसी को सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रखा है. इसे हमने पशुपालन और मछलीपालन के लिए भी खोल दिया है. इन दोनों श्रेणियों में अधिकतम दो लाख रुपये तक मिलेंगे जबकि फार्मिंग के लिए तीन लाख रुपये तक मिलते हैं.

उधर, सरकार ने बताया है कि पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम  (पीएम-किसान) की दूसरी किस्त एक अप्रैल से जारी की जाएगी. योजना को मंजूरी देते समय दूसरी किस्‍त के लिए आधार को अनिवार्य बनाया गया था. जबकि अब इसमें ढील दे दी गई है. कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक नामों की वर्तनी में अंतर से बड़े पैमाने पर लाभार्थियों के नाम रद्द हो जाएंगे. लाभार्थियों के आधार ब्‍यौरे को प्रमाणित करने के कारण दूसरी किस्‍त को जारी करने में विलंब होगा.

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दूसरी किस्‍त को जारी करने की तारीख 01 अप्रैल, 2019 है. देर होने से किसानों में असंतोष बढ़ेगा, इसलिए आधार के शर्त में ढील दी गई है. यह शर्त तीसरी किस्‍त जारी करने के लिए मान्‍य होगी. दूसरी किस्‍त के लिए केवल आधार संख्‍या को ही अनिवार्य माना जाएगा. भुगतान से पहले सरकार आंकड़ों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्‍त कदम उठाएगी.

एग्रीकल्चर लोन

अगर आपके पास खेती करने के लिए ज़मीन है तो अपनी जमीन को बिना गिरवी रखे बिना लोन ले सकते हैं. इसकी सीमा एक लाख रुपये है. एक लाख रुपये से ज्यादा के लोन पर जमीन गिरवी रखने के साथ-साथ गारंटर भी देना होगा. आपको बता दें कि आरबीआई ने बिना गारंटी वाले कृषि लोन की सीमा बढ़ाकर 1.60 लाख  रुपये कर दी है. लेकिन बैंक में इसे लागू करने में अभी वक्त लेगा. इसके लिए नोटिफिकेशन जारी होगा. आपको बता दें कि लोन के लिए अब सभी बैंक किसान क्रेडिट कार्ड जारी करते है.

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सवाल:अगर मेरे पास एक हेक्टेयर जमीन है तो मुझे कितना लोन मिलेगा?
जवाब:
 उत्तर प्रदेश के जिले अमरोहा में स्थित प्रथमा बैंक के ब्रांच मैनेजर अंकुर त्यागी ने बताया कि 1 हेक्टेयर जमीन पर 2 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है. लोन की लिमिट हर बैंक की अलग-अलग होती है. बैंक आपको इसके लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी करेगा. जिसके जरिए आप कभी भी पैसा निकाल सकते है.

लोन के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण डॉक्युमेंट खसरा और खतौनी होती है. यानी राजस्व रिकॉर्ड, जिससे पता चलेगा कि आप किसान हैं. खसरा खतौनी पटवारी बनाता है. इसमें खेती की जमीन की डिटेल होती है. मतलब साफ है कि उस जमीन पर अभी क्या हो रहा है और वह खेती के लिए कितनी उपयोगी है या फिर वह आबादी के बीच में तो नहीं है.

Input : News18

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मुजफ्फरपुर में 4694 मतदान केंद्रों पर डाले जाएंगे वोट, जानिए पूरा विवरण

Muzaffarpur Now

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कोरोना संकट को देखते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग का सबसे अधिक जोर मतदान केंद्रों पर शारीरिक दूरी के अनुपालन पर है। इसलिए आयोग ने एक हजार से अधिक मतदाता वाले केंद्रों पर सहायक मतदान केंद्र बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके मद्देनजर जिले में कवायद पूरी कर ली गई है। उक्त बातें विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर जिले के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में जिला निर्वाचन पदाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहीं।

Chhattisgarh Assembly Election: Voting Begins For Second Phase ...

DEMO PIC

एक हजार से अधिक मतदाता वाले बूथों की पहचान

उन्होंने बताया कि जिले में पूर्व से 3225 मतदान केंद्र हैं। लेकिन, कोरोना संकट को देखते हुए आयोग के निर्देशानुसार एक हजार से अधिक मतदाता वाले बूथों की पहचान की गई। इसके तहत 1469 सहयोगी मतदान केंद्र बढ़ाए गए हैं। एक हजार से अधिक मतदाता वाले गायघाट विधानसभा क्षेत्र में 136, औराई विधानसभा में 125, मीनापुर में 120, बोचहां में130, सकरा में 115, कुढऩी में 149, मुजफ्फरपुर नगर में 161, कांटी में147, बरूराज में 110, पारू में 134 और साहेबगंज में 142 मतदान केंद्र हैं। इनमें 1369 सहायक मतदान केंद्र उसी भवन व परिसर में बनाए गए हैं।

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को दी गई सूची

वहीं, सौ मतदान केंद्र उनके निकट के भवन में टैग किए गए हैं। इसके अलावा औराई विधानसभा में दो, साहेबगंज में चार, गायघाट में दो और बोचहां विधानसभा में एक मतदान केंद्र जर्जर होने से इनका बदलाव किया गया है। वहीं तीन चलंत मतदान केंद्र थे। उन्हें नए भवन में स्थानांतरित किया गया है। इन सभी की सूची सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई गई है।

मौके पर उपविकास आयुक्त उज्ज्वल कुमार सिंह, सहायक समाहर्ता खुशबू गुप्ता, अपर समाहर्ता आपदा अतुल कुमार वर्मा, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार मिश्र, अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी कुंदन कुमार व विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी मौजूद थे।

Input : Dainik Jagran

 

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बिहार में जन्मे इस शख्स की याद में मनाया जाता है ” डॉक्टर्स डे “, जानिए आज उन्हें याद कर क्या कहते हैं चिकित्सक…

Muzaffarpur Now

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महान भारतीय चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र राय के जन्म दिवस पर एक जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाया जाता है. उनका जन्म 1882 में बिहार के पटना जिले में हुआ था. कोलकाता में चिकित्सा शिक्षा पूर्ण करने के बाद डॉ. राय ने एमआरसीपी और एफआरसीएस की उपाधि लंदन से प्राप्त की. 1911 में उन्होंने भारत में चिकित्सकीय जीवन की शुरुआत की.

India's Forgotten 'National Doctor' Who Won Respect Across the World

महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में शामिल

इसके बाद वे कोलकाता मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता बने,वहां से कैंपबेल मेडिकल स्कूल और फिर कारमेल मेडिकल कॉलेज गये.उनकी ख्याति एक शिक्षक एवं चिकित्सक के रूप में कम, स्वतंत्रता सेनानी के रूप में महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में शामिल होने के कारण अधिक बढ़ी.

National Doctors Day 2020; Four Interesting Facts About Dr Bidhan ...

डॉ.राय को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया

भारतीय जनमानस के लिए प्रेम और सामाजिक उत्थान की भावना डॉ. राय को राजनीति में ले आयी.वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने और बाद में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभाला. डॉ.राय को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था.

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सेवा भाव का डॉक्टर लें संकल्प

मौजूदा समय में व्यावसायिकता की अंधी दौड़ में शामिल हो चुके चिकित्सकों को भी अब अपने पेशे को लेकर चिंता सताने लगी है. लेकिन कुछ ऐसे डॉक्टर भी है जिनका डॉक्टर पेशे के रूप में सेवाभाव जिंदा है.उन्हें फिर पुराने समय के लौटने की उम्मीद है.शहर के वरिष्ठ चिकित्सकों का मानना है कि पुराने दिनों में हर फील्ड के लोग रुपये कमाने की अंधी दौड़ में शामिल होते थे.लेकिन डॉक्टरी पेशा इससे अछ‍ूता था. वर्तमान में हालत कुछ और ही है. इसके अलावा शासकीय सेवा से जुड़े डॉक्टर अभी भी सीमित संसाधनों के बाद भी अपने कर्तव्यों को ईमानदारी के साथ पूरा कर रहे हैं.

An Ode to India’s Forgotten ‘National Doctor’ Who Won Respect Across the World

डॉक्टर होना सिर्फ एक काम नहीं है, बल्कि चुनौतीपूर्ण वचनबद्धता है

उनके मुताबिक डॉक्टर होना सिर्फ एक काम नहीं है, बल्कि चुनौतीपूर्ण वचनबद्धता है.युवा डॉक्टरों को डॉ. बिधान चंद्र राय की तरह जवाबदारी पूरी कर डॉक्टरी पेशे को बदनाम होने से बचाने के लिए पहल करनी होगी.

वर्तमान में डॉक्टर पुराने सम्मान को प्राप्त करने के लिए संघर्ष करता हुआ नजर आ रहा है

एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि यह दिन यह विचार करने के लिए है कि डॉक्टर हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. वर्तमान में डॉक्टर पुराने सम्मान को प्राप्त करने के लिए संघर्ष करता हुआ नजर आ रहा है.इसके पीछे कई कारण हैं. डॉक्टरों को अपनी जवाबदारियों का पालन ईमानदारी से करना सीखना होगा. डॉक्टरों की एक छोटी-सी भूल भी रोगी की जान ले सकती है. वर्तमान में डॉक्टरी ही एक ऐसा पेशा है, जिस पर लोग विश्वास करते हैं.इसे बनाये रखने की जिम्मेदारी सभी डॉक्टरों पर है.डॉक्टर्स डे स्वयं डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह उन्हें अपने चिकित्सकीय प्रैक्टिस को पुनर्जीवित करने का अवसर देता है.

Input : Prabhat Khabar

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#MadeInIndia : इस तरह से होगा चीन की दुकान का शटर डाउन

Muzaffarpur Now

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नई दिल्लीः भारत में चीन की दुकान का शटर डाउन करने की शुरुआत हो चुकी है. भारत सरकार ने सोमवार को 59 चीनी ऐप्स को बैन करके चीन को ये कड़ा संदेश दे दिया है कि अब वो चुप बैठने वाला नहीं है. अकेले टिकटॉक के बैन करने से चीन की अर्थव्यवस्था पर इसका खराब असर पड़ने की संभावना है. ऐसे में अब चीनी कंपनियों को अपने देश में भी काफी आर्थिक नुकसान होने वाला है.

#MadeInIndia: इस तरह से होगा चीन की दुकान का शटर डाउन

IPO को पड़ेगा टालना

टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस जल्द ही चीन के शेयर मार्केट में अपना आईपीओ लेकर के आने वाली थी. ऐप्स पर बैन लगने के बाद अब बाइटडांस को अपना आईपीओ आगे के लिए टालना पड़ेगा. बाइटडांस को अकेले भारत से ही वैश्विक हिस्सेदारी का 30 फीसदी ट्रैफिक मिलता था. ये चीन के कुल यूजर्स से भी बड़ा बेस है. इससे बाइटडांस की वैलूएशन पर भी असर पड़ेगा.

इन कंपनियों पर भी पड़ेगा असर

बाइटडांस के अलावा Baidu, Alibaba और Tencent ऐसी कंपनियां हैं जो चीन की अर्थव्यवस्था को चलाने में अपना बड़ा अहम योगदान देती हैं. इन कंपनियों के ऐप्स भारत में काफी लोकप्रिय हैं. इस वजह से चीनी कंपनियों को काफी कारोबार मिलता है. अब चीन की इकोनॉमी जो पहले से ही कोरोना वायरस के चलते डांवाडोल हो चुकी है, उस पर और असर पड़ेगा. चीन द्वारा तैयार हो रहे एक बड़े प्रोजेक्ट को अरबों डॉलर का घाटा हो सकता है.

चीनी आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को भारी नुकसान

साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल का कहना है कि चीन ने 2030 तक दुनिया का सबसे एडवांस आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) तैयार करने का लक्ष्य रखा है. देश में मौजूद चीनी ऐप्स से मिलने वाले डेटा (Data) से ही इनकी सबसे उन्नत तकनीक (Advance Techlonogy) तैयार करने का काम चल रहा है. अगर भारत से इकट्ठा किए जा रहे डेटा का प्रवाह तोड़ दिया जाए तो इनके आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट का काम बुरी तरह प्रभावित होगा. इस प्रोजेक्ट से चीनी सरकार अरबों डॉलर कमाने का सपना संजोए बैठी है. भारत के नए फैसले से इस भारी-भरकम बजट वाले प्रोजेक्ट की हवा निकल सकती है.

आखिर क्यों चीनी ऐप्स देश में उड़ाती है इतना पैसा

मामले से जुड़े एक अन्य जानकार बताते हैं कि चीनी ऐप्स जैसे TikTok, Helo, UC News और Likee आम लोगों को मुफ्त में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. दिखने में तो ये सिर्फ डांस, फोटो शेयरिंग, एक्टिंग और मनोरंजन वाले ऐप्स दिखते हैं. लेकिन वास्तव में ये ऐप्स हर यूजर के फोन से एक-एक हरकत को रिकॉर्ड करते हैं. मसलन, मोबाइल में बातचीत, टाइपिंग, वीडियो और लोकेशन सब कुछ इन ऐप्स के जरिए रिकॉर्ड किए जाते हैं. इसी डेटा को चीन के महा प्रोजेक्ट आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग में डाला जाता है ताकि इसे सबसे एडवांस बनाया जा सके. यही वजह है कि ये ऐप्स वीडियो बनाने के लिए यूजर्स को हजारो-लाखो रुपये तक देते हैं.

GEM पर लागू किया ये नियम

कॉमर्स मिनिस्ट्री यानी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने E-Marketplace यानी GEM के लिए नया नियम बना दिया है. किसी भी विक्रेता को अब इस पोर्टल पर सामान बेचने के लिए उस सामान का कंट्री ऑफ ओरिजिन (Country of Origin) बताना होगा. यानी अब इस पोर्टल पर बिकने वाले हर प्रोडक्ट की इमेज के साथ ये बताया जाएगा कि ये प्रोडक्ट किस देश में बना है. इसके अलावा इस पोर्टल पर मेक इन इंडिया फिल्टर भी लगाया गया है. जिसके तहत अब विक्रेता को ये बताना होगा कि जो सामान वो बेच रहा है उसमें से कितना पूरी तरह से भारत में बना है. जिस सामान में 50 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी कच्चे माल का उपयोग किया गया होगा, उसे ही प्राथमिकता दी जाएगी.

अब आप सोच रहे होंगे कि इससे चीन का क्या लेना-देना? इससे चीन का क्या बिगड़ जाएगा, तो आपको समझना चाहिए कि जैसे ही किसी सामान के बारे में ये बताया जाएगा कि वो किस देश में बना है और जैसे ही ये पता चलेगा कि ये प्रोडक्ट चीन का है, तो कोई भी खरीदार अपने आप ही चीन के सामान को खरीदने के लिए आगे नहीं आएगा. अभी समस्या ये है कि ज्यादातर उत्पादों के बारे में ये पता ही नहीं चलता है कि ये चाइनीज हैं या नहीं. यानी चीन का नाम लिए बिना भारत के बाजार में उसके खिलाफ माहौल बनाने की तैयारी कर ली गई है.

इस E-Market Place पर सरकारी विभागों से जुड़े करीब 40 हजार खरीदार हैं. ये ठीक वैसे ही काम करता है जैसे कुछ मशहूर Online Platforms करते हैं. इस E-Market Place को सरकार ने इसलिए शुरू किया था ताकि कोई भी व्यक्ति या समूह जो अपने हुनर से कोई उत्पाद तैयार करता है, उसे ये चिंता ना हो कि उसे खरीदार नहीं मिल पाएंगे. इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के जरिए आप अपने प्रोडक्ट को लिस्ट कर सकते हैं, और सरकारी विभागों में सामान की सप्लाई के लिए बोली भी लगा सकते हैं. इस पर करीब 3 लाख 93 हजार सप्लायर रजिस्टर्ड हैं. और इस पर करीब 17 लाख प्रोडक्ट्स और सर्विसेज मौजूद हैं. पिछले वर्ष ही इसके जरिए करीब 25 हजार करोड़ रुपये की कीमत के उत्पाद बेचे गए थे.

Input : Zee News

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