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बिना बेलपत्र अधूरी मानी जाती है भगवान शिव की पूजा, जा’निए महत्व

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सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी परेशानी दूर हो जाती है. कई लोग सोमवार के दिन व्रत भी रखते हैं. भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भांग, धतूरा और बेलपत्र चढ़ाते हैं. ऐसा मान्यता है कि शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और बिना बेलपत्र के उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है. आइए जानते हैं बेलपत्र के महत्व के बारे में और क्यों प्रिय है भगवान शिव को बेलपत्र.

सावन शिवरात्रि विशेष: भगवान शिव के प्रिय ये पत्ते स्वास्थ्य के लिए होते हैं फायदेमंद | न्यूजबाइट्स

बेलपत्र का महत्व

बेल की पत्तियों को बेलपत्र कहते हैं. बेलपत्र में तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी होती हैं लेकिन इसे एक पत्ती गिना जाता है. बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं. इससे चढ़ाने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है. बिना बेलपत्र चढ़ाएं भगवान शिव की पूजा अधूरी मानी जाती हैं.

बेलपत्र चढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान

लपत्र में एक साथ तीन पत्तियां जुड़ी होनी चाहिए. अगर बेलपत्र में दो या एक पत्ती है तो उसे बेलपत्र नहीं माना जाता है.

पत्तियां कहीं से टूटी – कटी नहीं होनी चाहिए. कोई भी पत्ते में छेद नहीं होना चाहिए.

भगवान को चिकनी तरफ से बेलपत्र चढ़ाएं और जल की धारा जरूर चढ़ाएं.

बिना जल के बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए.

Sawan 2019 know reason why we bel patra and jal on shivling: आखिर क्यों शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है जल और बेलपत्र, जानें पौराणिक कथा - India TV Hindi News

बेलपत्र चढ़ाने से बिगड़े काम

कई बार बिगड़ते काम को बनाने के लिए भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से सभी परेशानियां ठीक हो जाती है.

कई बार न चाहते हुए शादी में परेशानी होने लगती है. इसके पीछे कई भी कारण हो सकता है. आप बेलपत्र का उपयोग कर इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं. आइए जानते हैं बेलपत्र का इस्तेमाल कर समय पर विवाह होगा

आपको 108 बेलपत्रों पर चंदन से राम लिखना होगा. इसके अलावा आप शिवलिंग पर ऊं नम: शिवाय कहते हुए बेलपत्र चढ़ाएं.

अगर आप किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं तो 108 बेलपत्रों को चंदन के इत्र में डूबाते हुए शिवलिंग पर चढ़ाएं. आप इसके मंत्र जाप कर स्वस्थ होने की प्रार्थना करें.

Source : TV9

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कलाकार ने 60 हजार सिक्कों से बना दिया राम मंदिर का अनोखा स्ट्रक्चर, खर्च किए 2 लाख रुपए – देखें फोटो

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भगवान राम (Lord Ram) की जन्मस्थली अयोध्या में(Ayodhya) जब से राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण का कार्य शुरू हुआ है, तब से देशभर में राम नाम की बयार चल रही है. ऐसे में कर्नाटक के बेंगलुरू में कलाकारों ने कुछ अनोखा कर दिया है. इन कलाकारों ने 1 रुपए और 5 रुपए के सिक्कों से भगवान राम (Bhagwan Ram Structure made of Coins) की भव्य संरचना बना डाली है. इस संरचना को नजदीक से देखने के बाद आपको अलग ही अनुभूति होगी. बता दें कि भगवान राम की इस अद्भुत संरचना बनाने के लिए कलाकारों ने 1 रुपये और 5 रुपये के 60 हजार सिक्कों का इस्तेमाल किया है.

देखें Photos: 

जानकारी के मुताबिक, बेंगलुरु में एक संगठन ने भगवान राम की यह विशाल संरचना बनाई है. इस संगठन का नाम राष्ट्र धर्म ट्रस्ट है. राष्ट्र धर्म ट्रस्ट ने बेंगलुरु शहर में लालबाग पश्चिम गेट के पास भगवान राम की यह सर्वशक्तिमान संरचना बनाई. इसे यहां पर दर्शकों के लिए रखा गया है. इस संरचना के बारे में एक कलाकार ने बताया, “इस मास्टरपीस को बनाने के लिए 1 रुपये और 5 रुपये के कुल 60,000 सिक्कों का इस्तेमाल किया है.”

कलाकार ने बताया, “भगवान राम की संरचना बनाते समय लगभग 2 लाख रुपये मूल्य के 60,000 सिक्कों का उपयोग किया गया है.” बता दें कि अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है. राम मंदिर निर्माण का काम श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट कर रहा है. इसके लिए देशभर से चंदा लेने का कार्य जारी है.

Input: NDTV

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हनुमान जी की पंचमुखी तस्वीर यदि घर में है तो ये परेशानियां छू भी नहीं पाएंगी

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फरवरी मंगलवार के दिन माघ मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है. इस दिन हस्त नक्षत्र रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं. चंद्रमा को मन का कारक माना गया है. पंचांग के अनुसार चंद्रमा इस दिन कन्या राशि में गोचर कर रहे हैं. चंद्रमा जब अशुभ होते हैं तो व्यक्ति को मानसिक तनाव देने का कार्य भी करते हैं.

इस दौरान मन में नकारात्मक विचार आने लगते हैं व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है जिस कारण व्यक्ति अवसरों का लाभ नहीं उठा पाता है. इन दशाओं में मंगलवार को पंचमुखी हनुमान जी की पूजा करने से परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है. आइए जानते हैं पंचमुखी हनुमान जी की पूजा करने से प्राप्त होने वाले लाभ के बारे में-

हनुमान जी की पूजा दूर करती है कष्ट

हनुमान जी की पूजा उस दशा में शुभ फल प्रदान करती है जब व्यक्ति के जीवन में कष्ट और बाधाएं कम नहीं होती हैं. व्यक्ति जिस कारण परेशान हो जाता है और उस इन परिस्थितियों से निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आता है. ऐसे में संकट मोचक हनुमान जी की पूजा विशेष फल प्रदान करने वाली मानी गई है.

पंचमुखी हनुमान जी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार रावण को अपनी पराजय जब निकट दिखाई देने लगी तो, उसने अपने मायावी भाई अहिरावन को रणभूमि में उतार दिया. अहिरावन ने अपने तंत्र-मंत्र से भगवान राम की सेना को गहरी नींद में सुला दिया और प्रभु राम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया. अपहरण करने के बाद वो उन्हें पाताल लोक ले गया. कुछ समय बात जब अहिरावन के तंत्र-मंत्र का असर कम होने लगा तो विभिषण ने इस परिस्थिति को भांप लिया और हनुमान जी को पूरी बात बताई. विभिषण ने हनुमान से तुरंत भगवान राम और लक्ष्मण की सहायता के लिए पाताल लोक जाने के लिए कहा. पाताल लोक पहुंचते ही हनुमान जी का सामना अहिरावन के पुत्र मकरध्वज से हुआ. हनुमान जी ने उसे युद्ध में हरा दिया. इसके बाद हनुमान बंधक भगवान राम और लक्ष्मण से मिले.

हनुमान जी ने इसलिए पंचमुखी रूप रखा

अहिरावन मां भवानी का भक्त था. पाताल लोक में उसने पांच दीपक अलग अलग दिशाओं में जल कर रखे हुए थे. उसे श्राप था कि जो भी एक बार में इन सभी पांचों दीपकों को बुझा देगा वहीं उसका वध करेगा. हनुमान जी ने इन पांचों दीपकों को एक साथ बुझाने के लिए पंचमुखी रूप धारण किया. उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख और पूर्व दिशा में हनुमान मुख. इसके बाद उन्होंने एक साथ सभी दीपकों को बुझा दिया और इस प्रकार अहिरावण का वध हुआ. अहिरावण के मरने के बाद हनुमान जी भगवान राम और लक्ष्मण को मुक्त कराया.

मंगलवार को पंचमुखी हनुमान पूजा का महत्व

मंगलवार के दिन पंचमुखी हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. माना जाता है कि जिन लोगों के जीवन में हर समय कोई न कोई दिक्कत बनी रहती है उन्हें पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन करने चाहिए. प्रत्येक मंगलवार को पूजा करने और हनुमान चालीसा का पाठ करने से संकटों को दूर करने में सहायता मिलती है. मंगलवार के दिन घर में पंचमुखी तस्वीर लगाने से धन, सेहत, शिक्षा और जॉब आदि से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में भी मदद मिलती है.

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सुबह- सुबह सूर्य देवता को जल चढ़ाने के होते हैं कई फायदे, जानिए अर्घ्य देने के सही तरीके के बारे में

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हिंदू धर्म में सूर्य को जल देने की परंपरा बहुत पुरानी है जिसे आज भी निभाते हैं. श्रद्धालु हर रोज सूर्य देवता को अर्घ्य देते हैं. शास्त्रों में भी सूर्य देवता को जल देने का विशेष महत्व है. ज्योतिष शास्त्रों में कहा गया है कि कुंडली में सूर्य देवता की कमजोर स्थिति को मजबूत करने के लिए रोजाना सूर्य देवता को जल चढ़ाना चाहिए. भगवान सूर्य को जल चढ़ाने का वैज्ञानिक महत्व भी है. आइए जानते हैं भगवान सूर्य को जल देते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. साथ ही इसके वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व के बारे में.

ज्योतिष महत्व

रविवार के दिन भगवान सूर्य की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और विधि- विधान से पूजा की जाती है. मान्यता है कि रोजाना सूर्यदेव को जल अर्पित करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत बनी रहती है.

ज्योतिषों के अनुसार, कुंडली में अगर शनि दोष है तो रोजाना जल चढ़ाने से उसका प्रभाव कम हो जाता है. इसके अलावा चंद्रमा में भी जल का तत्व होता है, जब हम सूर्य को अर्घ्य देते है तो सूर्य ही नहीं चंद्रमा से बनने वाले योग भी कुंडली में विशेष रूप से सक्रिय होते हैं.

सूर्य को अर्घ्य देने का वैज्ञानिक महत्व

सूर्य को जल चढ़ाते समय हर एक बूंद माध्यम की तरह काम करती हैं जो वातावरण में मौजूद सभी विषाणु पदार्थों को दूर करने का काम करती है. हर रोज सूर्य को अर्घ्य देने से हमारी हड्डियां मजबूत होती है. सूर्य की किरणे हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं.

कैसे दें सूर्य को जल

सुबह- सुबह उठकर स्नान करने के बाद सूर्य देव को तांबे के बर्तन से जल अर्पित करना चाहिए.

सूर्य देव को जल चढ़ाने से पहले चुटकी भर लाल रंंग और लाल फूलों के साथ जल अर्पित करें.

सूर्य देवता को जल अर्पित करते समय 11 बार ओम सूर्याय नम: का जाप करना चाहिए.

Input: tv9

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