अब तक आपने बड़े शहरों में समलैंगिक विवाह के मामले देखे और सुने होंगे, लेकिन आज हम आपको बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया और रामनगर से जुड़े प्रेमी युगल के समलैंगिक विवाह की अनूठा मामला सामने आया है.
दरअसल, पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया का है. बेतिया और रामनगर में एक मामला सामने आया जिसे देखकर पुलिस वाले भी हैरान हो गए हैं और यहीं वजह है कि प्रेमी युगल को गांव वालों का विरोध झेलना पड़ा. दरअसल, नगर थाना में मंगलवार की देर शाम दो लड़की पहुंची. अपने को पति-पत्नी बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाने लगी.
दोनों लड़कियों ने बताया कि उन्होने समलैंगिक विवाह जालंधर के न्यायालय में किया है. और दोनों एक-दूसरे के बगैर नहीं रह सकती हैं. लेकिन उनके परिवार वाले इस रिश्ते को मानने से इन्कार कर रहे हैं. जिसपर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पत्नी के घरवालो से पूछताछ की तो लड़की के घरवालों ने अपनी बेटी से किसी भी तरह का रिश्ता रखने से इन्कार कर दिया.
पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों प्रेमीयुगल को रामनगर स्थित पति के घर पर भेज दिया है. बेतिया की रहने वाली इशरत के पिता हजरत ने बताया कि उनका परिवार जालंधर में रहता था. वहीं पड़ोस में बगहा के रामनगर की रहने वाली नगमा खातून भी चार वर्ष पूर्व से साथ रहती थी और दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे इसके बाद दोनों ने दो वर्ष पूर्व शादी कर ली.
हालांकि घर वालों ने दोनों को समझाने का बहुत प्रयास किया लेकिन अब दोनों एक-दूसरे के साथ जीने-मरने को तैयार थी.
वहीं, घरवालों के विरोध को देखते हुए पति-पत्नी बने दोनों लड़की नगर थाने पहुंची जहां पुलिस ने जांच पड़ताल की. नगर थानाध्यक्ष राकेश कुमार भाष्कर ने बताया कि नगमा व उसकी पत्नी इशरत को रामनगर स्थित उसके घर पर पुलिस की सुरक्षा में भेज दिया है.
इशरत और नगमा एक साथ जीने मरने को तैयार हैं और अस्पताल से बच्चा अपना कर आगे की जिंदगी गुज़र बसर करने का दावा किया है वहीं अब घर वालों का भी समर्थन और सहयोग मिलने लगा है.

ऐसे में देखना होगा कि अब पति बनी नगमा के घरवाले अपनी बेटी की बहू को स्वीकार करते हैं या फिर समलैंगिक विवाह करने वाले इस प्रेमी जोड़े के प्यार की नाव कहां तक पहुंचती है.
लिहाजा बेतिया जैसे छोटे से शहर में ऐसी घटना को देखकर पुलिस के साथ साथ आम लोग भी हैरान हैं और इस रिश्ते को गलत बता रहें हैं यह अलग बात है कि कोर्ट ने इस तरह के संबंध को मान्यता दे दी हैं लेकिन सामाजिक स्तर पर अभी भी समलैंगिंक विवाह करने वाले लोगों के लिए राह आसान नहीं है.

लेकिन नगमा और इशरत ने रूढ़िवादी परंपरा में अनूठी मिसाल कायम कर जिले की शायद पहली घटना है जब इस समलैंगिक विवाह के जरिए प्रेम और विश्वास का संदेश दिया है.

Source : Zee News








