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बिहार पर मोदी सरकार मेहरबान, 21 सितंबर से 20 जोड़ी और ट्रेन चलेंगी, 12 बिहार से

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पटना. बिहार चुनाव से पहले मोदी सरकार प्रदेश पर मेहरबान नजर आ रही है, यही वजह है कि 21 सितंबर से शुरू हो रही 20 जोड़ी ट्रेनों में 12 जोड़ी सिर्फ बिहार से हैं. चुने हुए रूप पर ही ये बीस जोड़ी क्लोन ट्रेन चलेंगी. ये ट्रेन श्रमिक स्पेशल और स्पेशल ट्रनों से अलग होंगी. वर्तमान में फिलहाल 310 ट्रेन चल रही हैं.

गौरतलब है कि पहले बताया गया था कि सभी विशेष ट्रेनों के परिचालन की निगरानी की जाएगी और जहां की भी ट्रेन की मांग होगी या वेटिंग लिस्ट होगी वहां एक्चुअल ट्रेन से पहले एक क्लोन ट्रेन चलाई जाएगी. रेलवे के अनुसार, 21 सितंबर से चलने जा रही ट्रेनों में 19 जोड़ी ट्रेनों का किराया हमसफर एक्सप्रेस के समान लिया जाएगा. सभी ट्रेनों की अग्रिम रिजर्वेशन अवधि 10 दिनों की होगी.

रेल मंत्रालय के अनुसार ये ट्रेनें बिहार के कुछ जिलों के साथ अन्य स्थानों के लिए भी चलेंगी.ये ट्रेनें सहरसा से नई दिल्ली, नई दिल्ली से सहरसा, राजगीर ने नई दिल्ली, नई दिल्ली से राजगीर, दरभंगा से नई दिल्ली, नई दिल्ली से दरभंगा, मुजफ्फरपुर से दिल्ली, दिल्ली से मुजफ्फरपुर, राजेंद्र नगर से नई दिल्ली, नई दिल्ली से राजेंद्र नगर, कटिहार से दिल्ली, दिल्ली से कटिहार, सिकंदराबाद से दानापुर,दानापुर से सिकंदराबाद,अहमदाबाद से दरभंगा,दरंभगा से अहमदाबाद,बेंगलुरू से दानापुर,दानापुर से बेंगलुरू,सूरत से छपरा,छपरा से सूरत,अहदाबाद से पटना, पटना से अहमदाबाद के लिए चलेंगी.

इसके अलावा न्यू जलपाईगुड़ी से अमृतसर, अमृतसर से न्यूजलपाई गुड़ी, जयनगर से अमृतसर, अमृतसर से जयनगर, वाराणसी से नई दिल्ली, नई दिल्ली से वाराणसी, बलिया से दिल्ली, दिल्ली से बलिया, लखनऊ से नई दिल्ली, नई दिल्ली से लखनऊ, वास्को से निजामुद्दीन, निजामुद्दी से वास्को, यशवंतपुर से निजामुद्दीन, निजामुद्दीन से यशवंतपुर, अहमदाबाद से दिल्ली, दिल्ली से अहमदाबाद, बांद्रा से अमृतसर और अमृतसर से बांद्रा के बीच भी ट्रेनें चलाई गईं हैं.

ट्रेन शेड्यूल

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दो बार IPS बनने के बाद भी संतुष्ट नहीं हुई ये लड़की, फिर ऐसे बनीं IAS

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यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की परीक्षा सबसे मुश्किल परीक्षा में से एक मानी जाती है. इस परीक्षा को पास करने के लिए दिन रात एक करना पड़ता है, लेकिन हम आपको ऐसी लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने इस मुश्किल परीक्षा को पास कर 2 बार IPS और एक बार IAS बनी हैं.

इस लड़की का नाम निधि बंसल हैं, जो मध्य प्रदेश के कैलारस कस्बे, मुरैना की रहने वाली है. वर्तमान में वह अपने परिवार के साथ ग्वालियर में शिफ्ट हो गई हैं. निधि की शुरुआती पढ़ाई मुरैना में हुई.

NDTV से बात करते हुए निधि ने कहा, उन्होंने कंप्यूटर साइंस इन इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री NIT त्रिचि से ली, जिसके बाद एक साल तक नौकरी की. प्राइवेट नौकरी के दौरान ही उन्होंने अपनी यूपीएससी की जर्नी की शुरुआत की. जहां निधि नौकरी करती थी वहां काम और सैलरी दोनों ही अच्छी थी, लेकिन वह संतुष्ट नहीं थी. इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि IAS बनना है और यूपीएससी के लिए तैयारी करनी है.

दो बार IPS बनने के बाद भी संतुष्ट नहीं हुई ये लड़की, फिर ऐसे बनीं IAS

बता दें, नीधि को यूपीएससी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, इसके बारे में उन्होंने अपने दोस्तों से पूछना शुरू किया. फिर उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी, जिसमें उन्होंने ऑप्शनल सब्जेक्ट सोशियोलॉजी को चुना. पहले प्रयास में निधि इस परीक्षा में सफल नहीं हो पाई, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी की इस कठिन परीक्षा को पास कर दिखाया.

दूसरी बार यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें 219 रैंक हासिल हुई. इस रैंक के तहत उन्हें IPS सेवा त्रिपुरा अलॉट हुई. निधि बेहद खुश थी, लेकिन संतुष्ट नहीं थी. उन्हें एहसास हुआ उनका लक्ष्य IAS बनना था. जिसके बाद उन्हें तीसरी बार यूपीएससी की परीक्षा दी.

तीसरे प्रयास में उनकी 226वीं रैंक आई. जिसके बाद उन्हें इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) अलॉट हुआ था. इस बार उन्हें झारखंड कैडर मिला था. दो बार IPS का पद मिलने का बाद भी निधि संतुष्ट नहीं थी. जिसके बाद निधि ने चौथी बार यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया. निधि अच्छी रैंक लाना चाहती थी, लेकिन रैंक उनके मनमुताबिक आई नहीं थी. जिसके बाद उन्होंने पिछले तीन साल की यूपीएससी तैयारी का अच्छे से आकलन किया.

उन्होंने महसूस किया, ऑप्शनल सब्जेक्ट में सोशियोलॉजी चुनने के बाद भी अच्छी रैंक नहीं आ रही है. वह इस सब्जेक्ट में अच्छी थी, लेकिन उनका फेवरेट सब्जेक्ट मैथेमेटिक्स था. उन्होंने महसूस किया उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट ही उन्हें पीछे खींच रहा है.ऐसे में इसे बदल लेना ही बेहतर है.

उन्होंने मैथेमेटिक्स को ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में चुना. इसके लिए उन्होंने सेल्फ स्टडी की. चौथे प्रयास में भी उनकी मनमुताबिक रैंक नहीं आई. लेकिन ऑप्शनल में उनके मार्क्स पहले के मुताबिक काफी अच्छे थे. इसके लिए वह पांचवे प्रयास के लिए मोटिवेट हो गई. पांचवें और अंतिम प्रयास में निधि को साल 2019 में 23वीं रैंक प्राप्त हुई और आखिरकार वह IAS बनने में सफल रही.

Source : NDTV

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तिरहुत क्षेत्र के शिक्षक निर्वाचन में बंपर वोटिंग, 79.77 प्रतिशत पड़े वोट; स्नातक निर्वाचन के प्रति उत्साह कम

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बिहार विधान परिषद के तिरहुत क्षेत्र शिक्षक निर्वाचन के लिए गुरुवार काे मतदाताओं ने काेराेना काे मात देते हुए बंपर मतदान किया। 79.77 प्रतिशत शिक्षक मतदाताओं ने वाेट डाले। दूसरी तरफ स्नातक क्षेत्र के चुनाव में उत्साह कम दिखा। सिर्फ 43.91 प्रतिशत वाेटिंग हुई। यह पिछले चुनाव से भी कम रहा। पिछले चुनाव में 46.33 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इसके साथ ही सभी 22 प्रत्याशियों की किस्मत मतपेटियों में बंद हो गई। कड़ी सुरक्षा व एहतियात के बीच हुए चुनाव में पुरुषाें के साथ महिला मतदाताओं ने भी भारी उत्साह से मतदान किया। कोरोना काल में हुए इस पहले बड़े चुनाव में कोरोना का थोड़ा असर ताे दिखा। लेकिन, शिक्षकाें ने उसे मात देते हुए यह दिखा दिया कि संक्रमण से बचाव जरूरी है, पर मतदान के अधिकार का प्रयोग भी उतना ही जरूरी।

धैर्य के साथ साेशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए अपनी बारी का इंतजार किया। बूथाें पर कोरोना संक्रमण से बचाव के भी पुख्ता इंतजाम थे। वाेट के पहले मतदाताओं की थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई और हाथों को सैनिटाइज कराया गया। मतदाता भी मास्क पहने पहुंच रहे थे। मतदान सुबह 8 बजे से शुरू हुआ।

पहले घंटे में रफ्तार काफी धीमी रही। हर बूथ पर 12 से 15 वोट गिरे। कलेक्ट्रेट कैंपस स्थित एसडीओ पूर्वी पश्चिमी, डीसीएलआर पूर्वी पश्चिमी में शिक्षक निर्वाचन के लिए 4 बूथ होने के बावजूद 10 बजे तक सन्नाटा रहा। पर, दिन चढ़ने के साथ मतदान में तेजी आने लगी। पूजा कर मतदाता घर से निकले तो दोपहर बाद कई बूथाें पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं।

मतदान के लिए पूर्व वीसी को 60 किमी दूर साहेबगंज और प्राध्यापक काे पटना जाना पड़ा

मतदान के दौरान बूथाें काे लेकर कई मतदाताओं को भारी परेशानी हुई। उर्दू फ़ारसी विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी एवं विवि उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. तौकीर आलम को मतदान के लिए 60 किलाेमीटर दूर साहेबगंज जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनका विभाग विवि और घर सादपुरा में है। फिर भी पता नहीं कि कैसे साहेबगंज भेज दिया गया। आरडीएस कॉलेज के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. विकास नारायण उपाध्याय ने बताया कि उन्हें एक दिन पहले मैसेज आया कि स्नातक में उनका बूथ पटना है।

कई बूथों पर हाथ जोड़े हुए प्रत्याशी ले रहे थे मतदाताओंं का हालचाल

मतदान के दिन भी मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश होती रही। कलेक्ट्रेट गेट से घुसते ही कई शिक्षक प्रत्याशी हाथ जोड़ कर मतदाताओं से उनका हालचाल पूछते दिखे। ये प्रत्याशी सुबह से ही वहां जमे रहे। मोबाइल से भी वोटरों को बुलाने एवं अन्य बूथों की भी जानकारी लेने का कार्य चलता रहा।

भीड़ अधिक न हाे, इसलिए बूथ भी अधिक थे: भीड़ अधिक नहीं हाे, इसलिए इस बार बूथ भी अधिक थे। पिछले चुनाव में स्नातक क्षेत्र के लिए मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली के कुल 90526 मतदाताओं के लिए 96 बूथ थे। इस बार 94775 वोटराें के लिए 127 और मुख्यालय में 59 बूथ थे। शिक्षक निर्वाचन के लिए 2014 में 8172 मतदाताओं के लिए 57 बूथ थे। इस बार 8684 मतदाताओं के लिए चारों जिलों में 58 और मुजफ्फरपुर में 19 बूथाें पर मतदान हुआ।

Source : Dainik Bhaskar

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चिराग पासवान का नीतीश पर बड़ा हमला, फिर लालू की शरण में न चले जाएं

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लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला जारी है। गुरुवार को चिराग ने नीतीश पर जबरदस्त हमला किया। चिराग ने कहा कि नीतीश कहीं फिर से लालू की शरण में न चले जाएं।

बिहार चुनाव की घोषणा के साथ ही चिराग पासवान ने नीतीश को मुख्यमंत्री मानने से इनकार करते हुए अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी। एनडीए एक ओर नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री बनाने की कोशिशों में जुटी है। वहीं एनडीए का हिस्सा होने के बाद भी लोजपा लगातार नीतीश को निशाने पर लिये हुए है। लोजपा ने अपने ज्यादातर प्रत्याशी उन्हीं सीटों पर उतारे हैं जहां से नीतीश की पार्टी जदयू मैदान में है।

चिराग ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि पिछली बार लालू प्रसाद के आशीर्वाद से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे। बाद में उन्हें धोखा दे कर भाजपा के शरण में चले गए। इस बार कहीं प्रधानमंत्री का आशीर्वाद लेने के बाद फिर से लालू की शरण में न चले जाएं।

गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने एनडीए से नाता तोड़कर लालू की पार्टी राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। राजद-जद-यू और कांग्रेस के गठबंधन ने भारी जीत हासिल की थी। जद-यू की कम सीटें होने के बाद भी राजद ने नीतीश को मुख्यमंत्री बनाया था। बाद में नीतीश ने राजद का साथ छोड़ दिया और भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।

Source : Hindustan

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