अब बात एक ऐसे अस्पताल की जहां इलाज नहीं होता है, बल्कि इस अस्पताल में सजती हैं अंडा और नाश्ता की दुकानें। यहां इलाज की बजाए बिकता है अंडा। तस्वीर देखनी है तो आ जाइए, बिहार के सबसे छोटे जिला शिवहर के पुरनहिया प्रखंड अंतर्गत अदौरी गांव में। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अदौरी को ग्रामीणों ने बाजार बना दिया है।

शिवहर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाली की दौर में है। आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ  पहुंचाने  के लिए दशकों पूर्व अस्पताल की स्थापना तो की गई। लेकिन बाद में सरकार और महकमा ही  अस्पताल को  भूल गया। चिकित्सक, कर्मी और संसाधन के अभाव के चलते  अस्पतालों में इलाज की सुविधा नहीं मिली तो  लोगों ने अस्पताल जाना ही छोड़ दिया। कुछ समय बीतने के बाद आसपास के लोगों ने अस्पताल को बाजार  बना  दिया। कुछ ऐसी ही तस्वीर है जिले के पुरनहिया प्रखंड  अंतर्गत अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अदौरी  का। इस अस्पताल के बरामदे पर रोजाना बाजार सजती है। लोग यहां अंडा बेचते है। कुछ लोगों ने आलू-प्याज तो कुछ लोगों ने मूढ़ी-कचरी और नाश्ते की दुकान सजा रखी है।

लिहाजा लोग यहां इलाज कराने नही  बल्कि  अंडा खाने और नाश्ता करने पहुंचते है। लोग आलू-प्याज खरीदने भी इसी अस्पताल में पहुंच रहे है।  हालांकि,  नए साल में इस अस्पताल की तस्वीर बदलने के आसार बढ़ गए है। वजह स्वास्थ्य  विभाग को अचानक इस अस्पताल की याद आ गई है। चार साल से यह अस्पताल आयुष चिकित्सक के भरोसे चल रहा था।  दो दिन पूर्व सीएस ने यहां दो एलोपैथिक चिकित्सक की तैनाती की है। इनमें डॉ. मनीष कुमार और डॉ. शकील अहमद शामिल है। हालांकि, इनमें केवल डॉ. मनीष कुमार ही अस्पताल में सेवा देंगे। डॉ.  शकील अहमद अध्ययन  अवकाश पर मुख्यालय से बाहर है। एक एलोपैथिक डॉक्टर की  ही सही तैनाती  होने से अस्पताल में इलाज की उम्मीद जगी है।

बताते चलें कि अदौरी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शुरूआती दिनों में इलाके में बेहतर  व्यवस्था की  वजह से  चर्चित रहा। यहां उत्तर बिहार के चर्चित एलोपैथिक चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दी। डॉ. सुरेश राम, डॉ. मेजर बीएन झा, डॉ.चंद्रिका प्रसाद सिंह व डॉ. बीके शर्मा जैसे चिकित्सक यहां तैनात किए गए। लेकिन चार साल से यहां केवल आयुष चिकित्सक के भरोसे व्यवस्था झूल रही थी। आयुष चिकित्सक भी अक्सर गायब रहते थे।

इधर, चिकित्सक  और कर्मी के गायब रहने के कारण अस्पताल में ताले लटक गए। वहीं देखभाल के अभाव में भवन जर्जर हो गया। बाद में दो कमरों वाले अस्पताल के बरामदे पर आसपास के लोगों ने दुकानें सजा ली। दोपहर बाद से लेकर देर शाम तक  अस्पताल  के  बरामदे पर अंडा और नाश्ते की दुकान सजती है। बहरहाल, अब स्वास्थ्य विभाग ने इस अस्पताल की व्यवस्था मजबूत करने की पहल शुरू कर दी है। इससे  लोगों में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीदें जगी है।

  • अस्पताल में चल रहा अंडा, आलू और प्याज का दुकान
  • इलाके के लोग आलू-प्याज खरीदने के लिए पहुंच रहे अस्पताल
  • सरकार और महकमे की बेपरवाही से अस्पताल बीमार
  • हाल अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अदौरी का
  •  स्वास्थ्य विभाग ने चार साल बाद अब की दो एलोपैथिक डॉक्टर की तैनाती

Input: Dainik Jagran

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