बिहार पुलिस (Bihar Police) अब दुर्दान्त अपराधियों का बेल कैंसिल (Bail Cancel) कराएगी. लगातार अपराध में हो रहे इजाफे के बाद पुलिस डिपार्टमेंट ने ये फैसला लिया है. बजाप्ता इसकी सूची भी बनाई जा रही है. इस बात की जानकारी खुद डीजीपी एसके सिंघल (Bihar DGP SK Singhal) ने दी है.

इतना ही नहीं अब बिहार के ठेकेदारों को खुद के साथ-साथ अपने कर्मचारियों का भी चरित्र सत्यापन कराना होगा. ठेकेदारी व्यवस्था में पार्दर्शिता लाने और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए बिहार पुलिस और गृह विभाग के हाल में लिए गये फैसले इन दिनों काफी सुर्खियों में हैं.

साल 2005 से 2010 तक का सुशासन फिर से लाने की कवायद में नीतीश सरकार (Nitish Kumar) जुट गयी है. लगातार बढते क्राईम (Crime Graph in Bihar) के ग्राफ को देखते हुए पुलिस और गृह विभाग ने कई बड़े फैसले लिये हैं. उनमें से एक अपराधियों के बेल कैंसिलेशन (Bail Cancellation order) का मामला भी है.

साल 2005 से 2010 में भी नीतीश सरकार ने अपराधियों का बड़े पैमाने पर बेल कैंसिलेशन की प्रक्रिया अपनाकर सुशासन स्थापित किया था. बिहार पुलिस (Bihar Police) उसी पैटर्न पर काम करने की तैयारी कर रही है. 3 फरवरी को विभाग की तरफ से एक चिट्ठी भी जारी की गयी है, जिसमें दुर्दान्त अपराधियों का बेल कैंसल कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

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डीजीपी एस के सिंघल ने बताया है कि बेल कैंसिलेशन को लेकर सारी गाइडलाईन जारी कर दी है. पुलिस चरणबद्ध तरीके से अपराधियों के बेल कैंसिल कराएगी.

इधर, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए गृह विभाग ने हाल ही में एक फैसला लिया था. ठेकेदारी विवाद में होने वाली हत्याओं को रोकने के लिए गृह विभाग की ओर से सभी ठेकेदारों को चरित्र सत्यापन कराने का निर्देश जारी किया गया है. लेकिन सिर्फ ठेकेदारों का ही चरित्र सत्यापन नहीं होगा. बल्कि सरकारी ठेका लेने वाले ठेकेदारों के साथ-पाथ पेटी कान्ट्रैक्टर (Contractor) और उनके कर्मचारियों का भी चरित्र सत्यापन होगा.

बस स्टैंड मोटरसाइकल स्टैंड नाव परिचालन जैसे काम का ठेका लेने वालों को भी अपने कर्मचारियों का चरित्र सत्यापन कराना होगा. बिहार के अपर मुख्य सचिव गृह विभाग आमिर सुब्हानी (Amir Subhani) ने बताया है कि ये सारी कवायद अपराधियों को ठेकेदारी के कामों में प्रवेश से रोकने के लिए की गयी है.

वहीं हाल के दिनों में धरना प्रदर्शन को लेकर पुलिस डिपार्टमेंट की ओर से जारी गाईडलाईन को लेकर भी पुलिस डिपार्टमेंट ने अपना रुख स्पष्ट किया है. डीपीजी एसके सिंघल (DGP SK Singhal) और एडीजी मुख्यालय जितेन्द्र कुमार ने कहा है कि धरना प्रदर्शन आम नागरिक का अधिकार है. पुलिक की हमेशा कोशिश होती है कि किसी भी इंसान को उसके अधिकारों से वंचित न किया जाए, लेकिन धरना प्रदर्शन कानून के दायरे में रहकर ही करना होगा.

अगर कोई शख्स कानून का उल्लंघन करता है तो पुलिस उसपर एफआईआर (FIR) जरूर करेगी. चार्जशीटेड (Chargesheet) या दोषी साबित होने पर उसके चरित्र सत्यापन प्रक्रिया में उन तमाम चीजों का उल्लेख भी किया जाएगा.

हालांकि, डीजीपी ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ एफआईआर (FIR) में नाम आ जाने से ही इंसान दोषी साबित नहीं हो जाता. पुलिस अनुसंधान में जबतक ये स्पष्ट नहीं हो जाता कि अपराध उसी शख्स ने किया है और जबतक चार्जशीट दाखिल नहीं होता तब तक किसी भी इंसान को दोषी नहीं माना जा सकता.

अगर कोर्ट की तरफ से चार्जशीटेड व्यक्ति को कानूनी राहत दी जाती है तब चरित्र सत्यापन में उसे अपराध मुक्त बताया जाएगा.

Source :Zee News

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