बिहार में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए महत्वपूर्ण इंजेक्शन रेमडेसिविर की घोर किल्लत हो गयी है। संक्रमितों के इलाज के दौरान निजी और सरकारी दोनों तरह के अस्पतालों में यह दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसके बिना गंभीर संक्रमित मरीज दम तोड़ रहे हैं। मरीजों के परिजन अपनों की जान बचाने के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं।

वहीं, कुछ निजी अस्पताल सीधे कम्पनी से रेमडेसिविर के वॉयल हासिल कर इलाज में इसका उपयोग कर रहे हैं। उनके द्वारा इसके लिए मरीजों के परिजनों से अधिक कीमत ली जा रही है। विभागीय सूत्रों की माने तो तीन दिन पहले एक हजार वॉयल रेमडेसिविर दवा राज्य को मिला था, जिसे असपतालों को उपलब्ध कराया गया था। मगर कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों की आवश्यकता के मद्देनजर यह नाकाफी साबित हुआ।

स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव सह राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि रविवार रेमडेसिविर की एक भी वॉयल बिहार को नहीं मिली। वहीं, शनिवार को मात्र 200 वॉयल ही मिला था। कहा कि सोमवार की देर रात तक 1200 वॉयल रेमडेसिविर दवा राज्य को मिलने की उम्मीद है। रेमडेसिविर की देशव्यापी मांग और उसकी आपूर्ति में कमी की समस्या है। वहीं, एनटीपीसी के भी कई कर्मी संक्रमित हो गए हैं। उनके इलाज के लिए एनटीपीसी भी इस दवा की मांग कर रहा है।

50 हजार वॉयल का ऑर्डर दिया गया
स्वास्थ्य विभाग ने जायड्स कैडिला को 50 हजार वॉयल रेमडेसिविर की आपूर्ति का ऑर्डर दिया। इसके एक सप्ताह में आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। इसे ड्रग कंट्रोलर की अध्यक्षता में बनी समिति द्वारा सरकारी और निजी अस्पतालों को उनकी जरूरतों के मुताबिक वितरित की जायेगी। समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि सरकार की कोशिश है कि निजी क्षेत्रों को मिलने वाली रेमडेसिविर दवा भी ड्रग कंट्रोलर की निगरानी में उचित मूल्य पर मिले।
Input: Live Hindustan





