पटना : प्रदेश के प्राइवेट लैब कोविड-19 की पुष्टि के लिए किए जाने वाले आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए अब ज्यादा से ज्यादा आठ सौ रुपये ले सकेंगे। वहीं, रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए अधिकतम शुल्क 250 रुपये निर्धारित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने आदेश में हिदायत देते हुए कहा है कि यदि कोई लैब आठ सौ रुपये से ज्यादा टेस्ट के एवज में लेता है तो इसे एपिडेमिक डिजीज एक्ट में किए गए प्रावधानों और बिहार महामारी कोविड-19 विनियमावली 2020 के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा।

इसलिए घटी दर

आइसीएमआर ने कोविड-19 के परीक्षण के लिए निजी क्षेत्र की प्रयोगशालाओं को जांच की अनुमति दी है। पूर्व में आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए 15 सौ रुपये की दर निर्धारित की गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि अन्य राज्यों ने आरटीपीसीआर टेस्ट के शुल्क में कमी की है, इस वजह से बिहार में भी नई दरें प्रभावी की गई है।

300 रुपये अतिरिक्त देने होंगे मरीज को घर से सैंपल लेने पर। लैब में जाकर जांच कराने पर अधिकतम आठ सौ रुपये लेंगे लैब।

250 रुपये निर्धारित की गई है रैपिड एंटीजन टेस्ट किट से जांच की दर। एंटीजन टेस्ट किट के दाम 150 रुपये से भी हो गए हैं कम

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आइसीएमआर पोर्टल पर दर्ज करानी होगी रिपोर्ट

1 विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि टेस्ट होने के बाद लैब के लिए टेस्ट रिपोर्ट आइसीएमआर के पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

2 जिस भी व्यक्ति की रिपोर्ट टेस्ट में पॉजिटिव आती है उस व्यक्ति की सूचना लैब सिविल सर्जन के साथ जिला सर्विलांस अफसर को भी देंगे।

सबको कोरोना वैक्सीन देने की जरूरत नहीं: स्वास्थ्य मंत्रलय

नई दिल्ली : देश में 138 करोड़ लोगों को वैक्सीन देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आइसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव के अनुसार, सरकार का मुख्य उद्देश्य कोरोना संक्रमण की कड़ी को तोड़ना है। जरूरत के मुताबिक वैक्सीन देने का काम किया जाएगा। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने भी स्पष्ट कर दिया कि सरकार ने कभी भी सभी नागरिकों को वैक्सीन देने की बात नहीं की थी।

2 अभी तक यह साफ नहीं है कि वैक्सीन देने के पहले कोरोना के एंटीबॉडी होने की जांच की जाएगी या नहीं। राजेश भूषण ने कहा कि इस पर वैज्ञानिक समुदाय में चर्चा हो रही है।

3 डल्ब्यूएचओ की गाइडलाइंस में वैक्सीन देने के पहले एंटीबॉडी जांच की बात नहीं कही गई है। सामान्य तौर पर संक्रमण से गुजर चुके लोगों में एंटीबॉडी मौजूद होती है और उन्हें वैक्सीन की जरूरत नहीं पड़ती है।

1 डाक्टर भार्गव के अनुसार, यदि लोग मास्क लगाते रहे और एक खास आबादी को वैक्सीन दे दी जाए तो कोरोना के संक्रमण की कड़ी टूट जाएगी और सभी को वैक्सीन देने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

Input : Dainik Jagran

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