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बेल के पत्तों में छिपा है जनसंख्या नियंत्रण का राज, कैंसर और लीवर के लिए भी फायदेमंद

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अगर आप बिना किसी परेशानी के बच्चा नहीं चाहते हैं तो आपको बेल (वुड एपल) के पत्ते का नियमित सेवन करना होगा। जब तक आप बेल के पत्ते का सेवन करेंगे, तब तक बच्चा नहीं होगा। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के जंतु विज्ञान विभाग के वरीय शिक्षक प्रो. विभूति नारायण सिंह ने बेल के पत्ते पर शोध किया है।

प्रो. सिंह का कहना है कि पुरुष जब तक बेल के पत्ते के चूर्ण का सेवन करेगा तब तक बच्चा नहीं होगा। जब बच्चे की इच्छा हो तब चूर्ण का सेवन करना बंद कर दे। यह शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के जर्नल में प्रकाशित भी हो चुका है। शोध को मान्यता भी मिल गई है। प्रो. सिंह के साथ राजेश कुमार ने भी काम किया है। अभी तक पुरुष जनसंख्या नियंत्रण के लिए कंडोम या फिर नसबंदी का सहारा लेते रहे हैं।

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चूहों पर किया सफल प्रयोग 
प्रोफेसर सिंह ने 12 चूहों पर रिसर्च किया। छह चूहों को 0.15 मिलीग्राम बेल के पत्ते के चूर्ण का घोल बनाकर पिलाया गया। दसवें दिन देखा गया कि उसमें स्पर्म (शुक्राणु) और सीमेन का पीएच मान कम हो गया। इस तरह 20वें, 30वें, 40वें और 50वें दिन धीरे-धीरे स्पर्म कम होता गया। मूवमेंट कम हो गया। सीमेन का पीएच कम हो गया। इसके अलावा छह और चूहों को बिना कुछ किए छोड़ दिया गया। 50वें दिन देखा गया कि जिसे चूर्ण खिलाया गया था, उनमें शुक्राणुओं की संख्या कम हो गई थी। उनकी प्रजजन क्षमता घट गई। जिन्हें चूर्ण का घोल नहीं पिलाया गया, उनमें शुक्राणुओं की संख्या बरकरार थीं। इसके बाद उन चूहों को फिर से चूर्ण खिलाना बंद कर दिया गया और देखा गया कि शुक्राणु की संख्या धीरे-धीरे बढऩे लगीं।

बेल के पत्ते कैंसर रोधी, लीवर के लिए भी फायदेमंद
प्रोफेसर सिंह की मानें तो बेल के पत्ते का चूर्ण गर्भ निरोधक में कारगर है। प्रति किलो शरीर के वजन के हिसाब से पुरुष 10 ग्राम बेल के पत्ते के चूर्ण का सेवन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि बेल के पत्ते के चूर्ण के सेवन से कैंसर होने की संभावना कम रहती है। किसी भी प्रकार के सूजन में फायदेमंद है। लीवर को फायदा पहुंचाता है। यह एंटी ऑक्सीडेंट हैं। एलर्जी को ठीक करता है। पेट की बीमारी को ठीक करता है।

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धार्मिक मान्यताएं
बेल की पत्तियां अधिकतर तीन, पांच या सात के समूह में होती हैं। तीन के समूह की तुलना भगवान शिव के त्रिनेत्र या त्रिशूल से की जाती है। इसके अलावा इन्हें त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी माना जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार मंदार पर्वत पर माता पार्वती के पसीने की बूंदे गिरने से बेल के पेड़ की उत्पत्ति हुई। यह पेड़ सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न कर आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।

बेल के स्वास्थ्य लाभ
गर्मी के मौसम में मिलने वाला बेल गर्मी से राहत देने के साथ ही कई स्वास्थ्य समस्या से भी निजात दिलाता है। अगर आप हर रोज बेस का शरबत पीते हैं तो आप हमेशा निरोग बने रहेंगे।

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मधुमेह रोगी के लिए फायदेमंद
मधुमेह रोगियों के लिए बेलफल बहुत लाभदायक है। बेल की पत्तियों को पीसकर उसके रस का दिन में दो बार सेवन करने से डायबिटीज की बीमारी में काफी राहत मिलती है। आप चाहें तो कुछ दिन तक इसका नियमित सेवन करके फर्क देख सकते हैं।

सेहत के फायदे

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  •  बेल फल में मौजूद टैनिन डायरिया और कालरा जैसे रोगों के उपचार में काम आता है।
  •  कच्चे फल का गूदा सफेद दाग बीमारी का प्रभावकारी इलाज कर सकता है।
  •  इससे एनीमिया, आंख और कान के रोग भी दूर होते हैं।
  •  बेल के पत्ते के चूर्ण के सेवन से कैंसर होने की संभावना कम रहती है।
  •  पुराने समय में कच्चे बेल के गूदे को हल्दी और घी में मिलाकर टूटी हुई हड्डी पर लगाया जाता था।
  •  इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स के चलते पेट के छालों में आराम मिलता है।
  •  वायरस व फंगल रोधी गुणों के चलते यह शरीर के कई संक्रमणों को दूर कर सकता है।
  •  विटामिन सी का अच्छा स्रोत होने के चलते इसके सेवन से सर्वी नामक रक्त वाहिकाओं की बीमारी में आराम मिलता है।
  •  बेल की पत्तियों का सत्व रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने में लाभदायक है।
  •  पेड़ से मिलने वाला तेल अस्थमा और सर्दी-जुकाम जैसे श्वसन संबंधी रोगों से लड़ने में सहायक है।
  •  पके हुए फल के रस में घी मिलाकर पीने से दिल की बीमारियां दूर रहती हैं।
  •  कब्ज दूर करने की सबसे अच्छी प्राकृतिक दवा है। इसके गूदे में नमक और काली मिर्च मिलाकर खाने से आंतों से विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।

खून की कमी को दूर करे
जिन लोगों में खून की कमी की समस्या होती है वे पके हुए सूखे बेल की गिरी का पाउडर बनाकर गर्म दूध में मिश्री के साथ एक चम्मच पावडर प्रतिदिन देने से शरीर में नए रक्त का निर्माण होकर स्वास्थ्य लाभ होता है।

डायरिया
गर्मियों में डायरिया की समस्या बहुत आम होती है। ऐसी स्थिति में होने वाले उल्टी-दस्तों, जी मिचलाने में बेल के गूदे को पानी में मथ कर चीनी मिला कर पीने से लाभ होता है। इससे आपको अंदर से अच्छा महसूस होगा और पेट को शीतलता का आभास होता है।

लू लगने पर
गर्मियों में लू लगने पर बेल के ताजे पत्तों को पीसकर मेहंदी की तरह पैर के तलुओं में भली प्रकार मलें। इसके अलावा सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करें। मिश्री डालकर बेल का शर्बत भी पिलाएं तुरंत राहत मिलती है।

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मुंह के छाले
मुंह में छाले और मसूड़ों के रोग से काफी लोग परेशान होते हैं। ऐसी स्थिति में बेल का गूदा पानी में उबालकर कुल्ला करने से छाले और मसूड़ों की समस्या दूर होती है। अगर आप इसका परिणाम चाहते हैं तो नियमित रुप से इस प्रक्रिया को अपनाएं।

भूख बढ़ाएं 
भूख कम हो, कब्ज हो, जी मिचलाता हो तो इसका गूदा पानी में मथ कर रख लें और उसमें चुटकी भर लौंग, काली मिर्च का चूर्ण, मिश्री मिला कर कुछ दिन लेने से भूख बढ़ेगी।

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Input : Dainik Jagran

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आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सीढ़ियों से गिरे, कंधे की हड्डी में हुआ फ्रैक्चर, 2 महीने बेड रेस्ट की सलाह

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आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सीढ़ियों से गिर गए हैं. उनके कंधे और हाथ में गंभीर चोट आई है. आनन-फानन में लालू यादव का एक निजी अस्पताल में आज एमआरआई कराया गया. सूत्रों के मुताबिक, उनके कंधे की हड्डी में हेयरलाइन फ्रैक्चर हो गया है और उन्हें दो महीने के बेड रेस्ट के लिए कहा गया है.

लालू प्रसाद यादव अभी पटना के राबड़ी देवी के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड पर रहते हैं. यहीं उनके कंधे और हाथ पर गंभीर चोट आई है. आनन-फानन में पटना के एक निजी अस्पताल में उनका एमआईआई कराया गया. सूत्रों के मुताबिक, उनके कंधे की हड्डी में हेयरलाइन फ्रैक्चर हुआ है. लालू यादव को डॉक्टर ने दो महीने का बेड रेस्ट करने की सलाह दी है.

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बताया जा रहा है कि सीढ़ियों से उतरने के दौरान लालू यादव का संतुलन बिगड़ गया और वह गिर गए. उनके हाथ और कंधे के साथ कमर में भी चोट आई है.

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लालू की तबीयत रहती है खराब

बता दें कि आरजेडी सुप्रीमो की तबीयत खराब रहती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, लालू यादव डाइबिटीज, ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग, किडनी की बीमारी, किडनी में स्टोन, तनाव, थैलीसीमिया, प्रोस्टेट का बढ़ना, यूरिक एसिड का बढ़ना, ब्रेन से सम्बंधित बीमारी, कमज़ोर इम्युनिटी, दाहिने कंधे की हड्डी में दिक्कत, पैर की हड्डी की समस्या, आँख में दिक्कत, POST AVR 2014 ( ह्रदय से सम्बंधित ) जैसी समस्याओं से ग्रसित हैं. बताया जा रहा है कि इन सभी बीमारियों में लालू सबसे ज्यादा किडनी की बीमारी से परेशान हैं.

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Source : Aaj Tak

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बिहार में एम्बुलेंस हुई बीमार, धक्का लगाकर लोगों ने किया इलाज

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मेनटेनेंस के बगैर गया जिले के शेरघाटी के अनुमंडलीय अस्पताल की एम्बुलेंस खटारा हो गई है। हाल यह है कि हर सुबह एम्बुलेंस को चालू करने के लिए स्वास्थकर्मियों को जोरदार धक्का देना पड़ता है। मरीजों को अस्पताल लाने-ले जाने के दौरान दिन-भर बीच रास्ते में ही एम्बुलेंस के बंद होने का डर बना रहता है सो अलग। यह स्थिति महीनों से बनी हुई है, मगर इसकी मरम्मत नहीं करवायी जा रही है।

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हकीकत यह है कि शेरघाटी अस्पताल की एम्बुलेंस के फर्श और पांवदान तक टूटे हैं। खिड़कियों में शीशे नहीं हैं। एयरकंडिशनिंग सिस्टम और पंखे की बात बेकार है। हेडलाइट और बैकलाइट में खराबी है सो अलग। एम्बुलेंस के गेट को बंद रखने के लिए ऑटोमैटिक लॉक की जगह सुतली-रस्सी का उपयोग किया जा रहा है। मरीजों को ढोने वाली गाड़ी का कई सालों से फिटनेस फेल है। वाहन का इंश्योरेंस तक नहीं है।

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गौर करने वाली बात यह है कि मुख्य मार्गों पर बाइक सवारों के हेलमेट चेक कर जुर्माना वसूलने वाली पुलिस या परिवहन अधिकारियों ने भी मरीजों की जान को खतरे में डालकर ऐम्बुलेंस का संचालन किए जाने के प्रति आंखें मूंद ली हैं। ऐम्बुलेंस चालक प्रवीण मालाकार ने बताया कि इसकी मरम्मत के लिए कई दफे जिम्मेवार अधिकारियों को सूचना दी गई है। इधर अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डा.राजेंद्र प्रसाद सिंह कहते हैं कि एम्बुलेंस के मेनटेनेंस के लिए आउटसोर्सिंग कम्पनी के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे गए हैं।

Source: Hindustan

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आज जेल होई, काल्ह बेल होई…बिहार में रील्स के चक्कर में जमानत रिजेक्ट

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बिहार के बक्सर जिले में मामूली मारपीट के मामले में जमानत लेने पुलिस स्टेशन पहुंचे तीन युवकों ने कुछ ऐसा गुल खिला दिया कि थानेदार ने बेल रिजेक्ट कर दी। जाहिर सी बात है युवकों की परेशानी बढ़ गई। अब उन्हें अदालत से जमानत लेनी पड़ेगी।घटना शुक्रवार की है, जब महादेवगंज गांव में आयोजित यज्ञ के दौरान हुई मारपीट के एक मामले में दर्ज प्राथमिकी के आरोपी तीन युवकों विशाल सिंह, शक्तिमान सिंह व अजित सिंह को नावानगर थाना पर बुलाया गया।

मामूली मारपीट में जमानतीय धारा का मुकदमा होने के चलते थानेदार ने अपने स्तर से बेल देने के लिए तीनों को थाना बुलाया था। तीनों एक साथ थाना गेट में घुसे। लेकिन, गेट में घुसते हुए युवकों ने वीडियो बना लिया और उसमें ‘आज जेल होई, काल्ह बेल होई, परसों से उहे खेल होई’ जैसा भोजपुरी गाना जोड़कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।

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यह वीडियो इन युवकों के विरोधी पक्ष के हाथ लग गया, जो युवकों के थाना के अंदर पहुंचने से पहले थानेदार के पास तक पहुंच गया। विरोधी पक्ष ने इसे धमकी समझते हुए थानेदार से शिकायत कर दी। इसके बाद वीडियो पर संज्ञान लेते हुए थानेदार ने तीनों युवकों को बेल देने से इंकार कर दिया।

बता दें कि मई माह में स्थानीय थाना के महादेवगंज गांव में आयोजित यज्ञ समारोह के दौरान दो पक्षों में मारपीट हुई थी। इसमें दोनों तरफ से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। एक पक्ष द्वारा कराई गई प्राथमिकी में इन तीनों युवक को आरोपी बनाया गया था। जमानतीय धारा में दर्ज हुई प्राथमिकी में तीनों युवकों को केस के अनुसंधानकर्ता सब इंस्पेक्टर शिवपुकार सिंह ने बेल देने के लिए थाना बुलाया था। पर इनके द्वारा बनाए गए वीडियो ने इनकी परेशानी बढ़ा दी। स्थानीय लोग इसे कानून का मजाक उड़ाना बता रहे हैं।

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Source: Hindustan

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