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फां’सी का दिन करीब! नि’र्भया के गु’नहगा’रों से ति’हाड़ जे’ल प्रशासन ने पूछी अं’तिम इ’च्छा

Santosh Chaudhary

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नि/र्भया गैं/गरे/प के/स के चारों गु/नहगा/रों की फां/सी की तैयारी शुरू हो गई है. ति’हाड़ जे/ल प्रशासन ने गु/नहगा/रों को नो’टिस जारी करके उनकी अं/तिम इच्छा के बारे में पूछा है. जे/ल प्रशासन ने गु/नहगा/रों से कई सवाल भी पूछे हैं.

दरअसल जेल मैन्युअल के मुताबिक, सजा-ए-मौत की सजा पाए कैदियों से फांसी से पहले उनकी अंतिम इच्छा के बारे में पूछा जाता है और उनकी इच्छा को पूरा कराया जाता है.

कोई वसीयत करना चाहते हो?

निर्भया के गुनहगारों से जेल प्रशासन ने पूछा कि 1 फरवरी को तय उनकी फांसी से पहले वह अपनी अंतिम मुलाकात किससे करना चाहते हैं? उनके नाम अगर कोई प्रॉपर्टी या बैंक खाते में जमा कोई रकम है तो उसे किसी के नाम ट्रांसफर करना चाहते हैं?

उनसे यह भी पूछा गया कि किसी को नॉमिनी बनाना यानी किसी को वारिस बनाना या नामजद करना चाहते हैं? कोई वसीयत करना चाहते हैं? या फिर कोई धार्मिक या मनपसंद किताब पढ़ना चाहते हैं? सजायाफ्ता कैदी की इन तय इच्छाओं में वो जो चाहें उसे पूरा कराया जाता है.

केंद्र की SC में याचिका

इस बीच निर्भया के दोषियों की फांसी में हो रही देरी पर लगातार उठ रहे सवाल के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा कि मृत्युदंड के मामलों में दोषी को दी गई सजा पर अमल को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन सिर्फ अपराधी के हितों की बात करती है.

केंद्र सरकार ने कहा कि यह गाइडलाइन पीड़ित को राहत देने की बजाए दोषियों को ही राहत देती है और राहत के विकल्प मुहैया कराने पर फोकस रखती है.

केंद्र सरकार ने अपनी अर्जी में साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई उस गाइडलाइन को चुनौती दी है जिसमें शीर्ष कोर्ट ने शत्रुघ्न चौहान बनाम सरकार के मामले में फैसला सुनाते हुए यह गाइडलाइन जारी की थी.

केंद्र सरकार ने अपनी अर्जी में दलील दी कि यह गाइडलाइन सिर्फ दोषी और अपराधी के अधिकारों की हिमायती है. पीड़ित पक्ष के अधिकारों को लेकर यह गाइडलाइन पूरी तरह से खामोश है, जबकि दोनों पक्ष के बीच संतुलन होना चाहिए. यह गाइडलाइन पूरी तरह से एकतरफा है.

फांसी की तारीख पर बहस

निर्भया गैंगरेप के सभी चारों दोषियों को फांसी की तारीख बदले जाने को लेकर बहस छिड़ी हुई है. केंद्र सरकार ने कहा कि अगर राष्ट्रपति द्वारा किसी दोषी की दया याचिका खारिज हो जाती है, तो उसे सात दिन के अंदर फांसी दे दी जाए.

दया याचिका खारिज होने के बाद उसकी पुनर्विचार याचिका या क्‍यूरेटिव पिटीशन को कोई अहमियत नहीं दी जानी चाहिए. केंद्र सरकार ने कोर्ट में दाखिल अपनी अर्जी में कहा कि अगर कोई अपराधी राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करना चाहता है, तो डेथ वारंट जारी होने के सात दिन के अंदर ही उसे ऐसा करने की इजाजत दी जाए.

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कोरोनाः रिश्तेदार नहीं आए तो मुसलमानों ने दिया अर्थी को कंधा, राम नाम सत्य बोलते हुए ले गए श्मशान, कराया दाह संस्कार

Ravi Pratap

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पूरे देश में कोरोना वायरस का डर फैला है। लोग लॉकडाउन में अपने घरों से निकलने से कतरा रहे हैं। खौफ इतना है कि किसी की मौत पर कंधा देने के लिए चार लोग भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में देखने को मिला। हालांकि इसी दौरान हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी देखने को मिली।

यहां पर हिंदू की मौत के बाद उसके बेटे के साथ अर्थी को कंधा देने वाला भी कोई नहीं था। कुछ मुसलमान आगे आए और उन्होंने न सिर्फ अर्थी को कंधा दिया बल्कि श्मशान में दाह संस्कार भी करवाया।

नहीं पहुंचा कोई रिश्तेदार

बुलंदशहर के आनंद विहार में रविशंकर का घर है। रविशंकर का परिवार बेहद गरीब है। उनका घर जिस इलाके में है वह मुस्लिम आबादी वाला है। शनिवार को उनकी मौत हो गई। रविशंकर के बेटे ने रिश्तेदारों, दोस्तों और आस-पड़ोस में पिता की मौत का संदेश भेजा लेकिन कोई नहीं पहुंचा। रवि शंकर की मौत से दुखी परिवार की परेशानी और बढ़ गई। अर्थी को कंधा देने के लिए और श्मशान तक शव को पहुंचाने के लिए कोई नहीं था।

थोड़ी देर के बाद रविशंकर के घर में मोहल्ले के कुछ मुस्लिम लोग पहुंचे और उन्होंने परिवारवालों को दिलासा दी। मुसलमानों ने अर्थी तैयार करवाई, कंधे पर लादकर काली नदी स्थित शमशान घाट तक पहुंचे। इस दौरान रास्ते में राम नाम सत्य भी बोला गया।

दाह संस्कार में भी हुए शामिल
मुसलमानों ने श्मशान में दाह संस्कार की तैयारी करवाई। रवि शंकर के बेटे ने मुखाग्नि दी। इस दौरान भी वे साथ में रहे। श्मशान में सारी क्रियाएं पूरी करवाने के बाद वे रविशंकर के बेटे के साथ वापस घर आए। उन्होंने दुखी परिवार की हर तरह से मदद का आश्वासन भी दिया।

Input : NBT Hindi

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कोरोना वायरस लॉकडाउन पर केंद्र का आदेश- लोगों को रोकने के लिए सारी सीमाएं सख्ती से सील करें राज्य

Santosh Chaudhary

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस को लेकर देश भर में लागू लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) के चलते प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) के बीच अनिश्चितता का माहौल है. राजधानी दिल्ली जैसे बड़े शहरों को छोड़कर मजदूर अपने गांव वापस लौटने की कोशिश में दिख रहे हैं. इस बीच केंद्र सरकार ने राज्यों से लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की आवाजाही को रोकने के लिए राज्य और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील करने को कहा है.

सरकार सख्त

मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने उनसे सुनिश्चित करने को कहा कि शहरों में या राजमार्गों पर आवाजाही नहीं हो, क्योंकि लॉकडाउन जारी है.

सील की जाए सीमा

एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘देश के कुछ हिस्सों में प्रवासी कामगारों की आवाजाही हो रही है. ऐसे में निर्देश जारी किया गया कि राज्यों और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील करना चाहिए.’ राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि शहरों में या राजमार्गों पर लोगों की आवाजाही नहीं हो. केवल सामान को लाने-ले जाने की अनुमति होनी चाहिए.

डीएम और एसपी होंगे जिम्मेदार

अधिकारी ने बताया कि इन निर्देशों का पालन करवाने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की निजी तौर पर जिम्मेदारी बनती है. केंद्र सरकार ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान गरीब, जरूरतमंद लोगों और दिहाड़ी मजदूरों को भोजन, आश्रय मुहैया कराने के लिए समुचित इंतजाम किए जाएंगे. सरकार राज्यों को ये सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि लॉकडाउन के दौरान राजमार्गों या शहरों में लोगों की आवाजाही नहीं हो. सरकार के मुताबिक इन निर्देशों का पालन कराने के लिए डीएम, एसपी को निजी तौर पर जिम्मेदार बनाया जाएगा.

(भाषा इनपुट के साथ)

 

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COVID-19: पीएम केयर फंड में पीयूष गोयल और रेलवे कर्मचा​री मिलकर देंगे 151 करोड़ रुपये

Santosh Chaudhary

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) से निपटने के लिए बीते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने देशभर के लोगों से पीएम केयर फंड (PM Care Fund) में अपनी स्वेच्छा से डोनेट करने को आह्वान किया था. पीएम मोदी के इस आह्वान के बाद देशभर में लोग अपनी सक्षमता के आधार पर इस फंड में डोनेट कर रहे हैं. अब रेल मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने और रेल राज्य मंत्री ने भी इस फंड में अपनी एक महीने की सैलरी देने का ऐलान किया है. पीयूष गोयल ने अपनी आधिकारिक ट्विटर हैंडल से यह जानकारी दी.

People rejected Abhijit Banerjee's Left-leaning ideology: Piyush ...

पीयूष गोयल द्वारा दी गई इस जानकारी के मुताबिक, रेल मंत्री, रेल राज्य मंत्री के अलावा रेलवे के 13 लाख कर्मचारी और पब्लिक सेक्टर ईकाईयों के कर्मचारी अपनी एक दिन की सैलरी भी पीएम केयर फंड में डोनेट करेंगे. कुल मिलाकर पीएम केयर फंड में यह रकम 151 करोड़ रुपये की होगी.

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जी के आह्वान पर मैं और मेरे साथी रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी जी एक महीने के, तथा रेलवे के 13 लाख, व PSU के साथी एक दिन के वेतन से, PM CARES में ₹151 करोड़ की राशि का सहयोग देंगे.’

65 लाख पेंशनर्स भी देंगे एक दिन की पेंशन

बता दें कि रविवार को ही कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के दायरे में आने वाले पेंशनभोगियों के एक फोरम ने कोरोना वायरस महामारी से निपटने में सरकार की मदद के लिये अपनी एक दिन की पेंशन प्रधानमंत्री राहत कोष (Prime Minister Relief Fund) में देने का निर्णय किया है. EPS-95 के अंतर्गत आने वाले पेंशनभोगियों की संख्या करीब 65 लाख है.

अखिल भारतीय ईपीएस-95 पेंशनभोगी राष्ट्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने रविवार को एक बयान में कहा, हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोरोना वायरस महामारी से निपटने में सरकार की मदद की इच्छा जतायी है. इसके तहत हम सभी ने अपनी एक दिन की पेंशन प्रधानमंत्री राहत कोष में देंगे. पत्र की प्रति वित्त मंत्री, श्रम मंत्री, केंद्रीय न्यासी बोर्ड के सदस्यों और केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त को भी भेजी गयी है.

Input : News18

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