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RELIGION

भूलकर भी दशहरा पर न करें ये 5 काम, जिंदगी भर पछताएंगे

Santosh Chaudhary

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आज 8 अक्टूबर को देशभर में दशहरा यानी  विजयादशमी का त्योहार मनाया जा रहा है। बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने वाले इस त्योहार पर आज आपको बताते हैं कुछ ऐसी बातें जिन्हें इस दिन करने से हर व्यक्ति को बचना चाहिए वरना इसका बुरा असर आपकी जिंदगी पर भी पड़ सकता है। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं वो 5 बातें।

कभी भी किसी का बुरा न करें-
विजयदशमी के दिन लोगों की बुराईयां करने से बचें। अपने मन में किसी भी व्यक्ति के लिए बुरे विचार न आने दें। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन कोई भी गलत काम करने से बचें।

पेड़ काटने से बचें-
हमारे अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए पेड़- पौधे बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में दशहरे के दिन पेड़ काटना शुभ नहीं माना जाता। माना जाता है कि इस दिन पेड़ काटने से व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब होता है।

जीव-जंतु को नुकसान न पहुंचाएं-

दशहरा के दिन अपने शौक के लिए किसी भी जीव-जंतु की हत्या न करें। माना जाता है कि ऐसा करने से आपका सौभाग्य दुर्भाग्य में बदल जाता है।

किसी स्त्री, बुजुर्ग का अपमान- 

दशहरा के दिन भूलकर भी किसी स्त्री या बड़े-बुर्जुग का अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी आपसे रुष्ट हो सकती हैं।

शराब का सेवन-

दशहरा के दिन मासं, मदिरा का सेवन करने से बचना चाहिए।

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RELIGION

महाशिवरात्रि पर बना है शनि-शुक्र का योग, राशि अनुसार किन बातों का ध्यान रखें

Santosh Chaudhary

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जीवन मंत्र डेस्क. शुक्रवार, 21 फरवरी को महाशिवरात्रि पर 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शिवरात्रि पर शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। ये एक दुर्लभ योग है, जब ये दोनों बड़े ग्रह शिवरात्रि पर इस स्थिति में रहेंगे। 2020 से पहले 25 फरवरी 1903 को ठीक ऐसा ही योग बना था और शिवरात्रि मनाई गई थी। जानिए इस शिवरात्रि पर राशि अनुसार किन बातों का ध्यान रखना है…

मेष राशि- नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। कार्य के प्रति लापरवाही करने से बचें। वरना नुकसान की संभावना है। शिवजी को सुगंधित पुष्प चढ़ाएं।

वृषभ राशि- व्यय की अधिकता रहेगी। सोच-समझकर खर्च करें। कार्यों में सुधार होने की संभावना है। शुभ सूचनाएं मिल सकती हैं। शिवजी के अंशावतार हनुमानजी को नारियल और वस्त्र अर्पित करें।

मिथुन राशि- आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। रिश्तों में मजबूती आएगी। मित्रों को आपकी मदद की आवश्यकता पड़ सकती है। दूध मिश्रित जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।

कर्क राशि- धन-संपत्ति से संबंधित कोई विवाद हो सकता है। धन की कमी महसूस हो सकती है। कार्य की अधिकता से परेशानी हो सकती है। शिवजी के पुत्र गणेशजी को फल चढ़ाएं।

सिंह राशि- अचानक धन लाभ मिलने के योग बने हुए हैं। भाग्य अनुकूल रहने से समस्याएं दूर हो सकती हैं। परिवार का साथ मिलेगा। शिवरात्रि पर गायत्री मंत्र का जाप 108 बार करें।

कन्या राशि- कार्य में बाधाएं आ सकती हैं। वाद-विवाद से मन विचलित हो सकता है। सोच-विचार कर काम करें। विवादों से बचें। शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं।

तुला राशि- अनचाहे काम करने पड़ सकते हैं। धन की उपलब्धता में भी समस्याएं उत्पन्न होंगी। कोई बडी सफलता मिलने की संभावनाएं हैं। हनुमानजी के सामने तेल का दीपक जलाएं।

वृश्चिक राशि- नकारात्मकता की अधिकता रहेगी। काम में मन नहीं लगेगा और धन की कमी महसूस हो सकती है। पुरानी योजनाओं में लाभ होगा। शिवरात्रि पर सवा किलो चावल दान करें।

धनु राशि- कोई बड़ी बाधा आ सकती है। सावधानी पूर्वक काम पर ध्यान दें। मित्र की सलाह को नजरंदाज न करें। शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाएं।

मकर राशि- धन लाभ के योग बने हुए हैं, लेकिन पारिवारिक मामलों में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं। धैर्य से काम लें। संतान की चिंता रहेगी। हनुमानजी को लाल वस्त्र में रखकर मसूर की दाल चढ़ाएं।

कुंभ राशि- समस्याओं का निदान होगा, लेकिन व्यय की अधिकता होगी। आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। घर से बाहर सावधान रहें। गणेशजी को गुड़ और तिल चढ़ाएं।

मीन राशि- सफलताएं मिलेंगी। सोचे हुए काम समय पर पूरे होंगे और भाग्य भी अनुकूल बना रहेगा। शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी। देवी दुर्गाजी को लाल वस्त्र चढ़ाएं और मिठाई को भोग लगाएं।

 

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RELIGION

शिवरात्रि में भां’ग चढ़ाने की कैसे बन गई परंपरा? जानें क्या कहते हैं काशी के पंडित

Santosh Chaudhary

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महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था. महाशिवरात्रि के मौके पर भक्त भोले शंकर को प्रसन्न करने की पूरी कोशिश करते हैं. इसी हर्षोल्लास के बीच बाबा के प्रसाद के रूप में ज्यादातर शिवभक्त भां/ग का सेवन करना नहीं भूलते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भोले बाबा को भां/ग चढाने का जिक्र न तो शास्त्रों में है और न ही वेद-पुराणों में.

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द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वोपरी बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद् के अध्यक्ष के मुताबिक शिव पूजा अराधना में भांग का कोई स्थान नहीं है. ये मात्र कुप्रथा है और विग्रह के लिए भी नुकसान दायक है. इसके बावजूद सिर्फ वाराणसी के अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक शिवरात्रि के दौरान भांग की बिक्री 4-5 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. शिवरात्रि पर यहां भांग की दुकानों की बिक्री दोगुनी हो जाती है.

काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष अशोक द्विवेदी ने कहा कि भगवान काशी विश्वनाथ सहित देश के अन्य शिव मंदिरों में होने वाली पूजा में पंडों, पूजारियों और अन्य श्रद्धालुओं ने भांग चढ़ाने की जो परंपरा निभा रहे हैं, हम उन्हें कहना चाहते हैं कि हमारे वैदिक और पौराणिक कर्मकांडों में भी इसका कहीं उल्लेख नहीं हैं. शोष्डोपचार पूजा में अक्षत, दक्षिणा और भांग तक का प्रयोग नहीं है, लेकिन यत भक्षितम, तत निवेदितम, यानि किसी को खाने की आदत थी तो उसने शिवलिंग पर चढ़ाने की आदत लगा दी.

ठीक वैसे ही जैसे कामाख्या में बकरे की बलि होती है. जिसको जो खाने की आदत थी वे चढ़ाने की भी आदत बन गई. अशोक द्विवेदी का कहना है, ’35 वर्ष हो गए मुझे कर्मकांड में हजारों यज्ञ करा चुका हूं, लेकिन ये कहीं नहीं लिखा है कि इस मंत्र से भांग चढ़ेगा. ऋतु फल चढ़ाया जा सकता है, लेकिन भाग चढ़ाने का कहीं उल्लेख नहीं है. लोगों ने इसको लोकाचार बना डाला है.’

विश्वनाथ मंदिर के ही पुजारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए अशोक द्विवेदी ने बताया कि मंदिर में पूजा के वक्त जो पुजारी भांग के आदी है वे भांग का गोला चढ़ा देते हैं. उसकी हम लोगों ने अनदेखी कि लेकिन फिर वही आगे चलकर 10 रूपए के गिलास में दूध, पानी, मंगरैल और भांग घोलकर बाबा विश्वनाथ पर हजारों-हजारों गिलास चढ़ने लगा और पंडों-पुजारियों ने इसे नहीं रोका.

वाराणसी के जिला आबकारी अधिकारी करूणेंद्र सिंह के मुताबिक वाराणसी में शिवरात्रि पर्व के दौरान भाग की बिक्री 4-5 प्रतिशत तक बढ़ जाती है और वर्ष में बनारस की कुल भांग की खपत 48724 किलोग्राम है. वहीं भांग के दुकानदार रमेश ने बताया कि भांग औषधि है और ये काशी विश्वनाथ जी का प्रसाद है. इसकी बिक्री पूरे देश में सबसे ज्यादा वाराणसी में होती है. सबसे ज्यादा होली और शिवरात्रि पर भांग की बिक्री होती है.

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INDIA

श्रद्धालुओं के लिए दुनिया का सबसे विशाल मंदिर तैयार, 10 साल से चल रहा था निर्माण

Santosh Chaudhary

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संस्था का कहना है कि इस मंदिर में हर धर्म, जाति-संप्रदाय और समुदाय के लोग आ सकते हैं, किसी के लिए भी मंदिर के दरवाजे बंद नहीं रहेंगे। इस्कॉन ने लोगों से आह्वान किया है कि वो इस मंदिर में आएँ और ‘संत कीर्तन मूवमेंट’ का हिस्सा बनें।

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में स्थित मायापुर में विश्व के सबसे बड़े मंदिर परिसर का पहला फ्लोर बन कर तैयार हो गया है। इसके अगले महीने श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने की योजना बनाई गई है। ‘द टेम्पल ऑफ वैदिक प्लैनेटेरियम’ अपने-आप में दुनिया का सबसे अनोखा मंदिर है। इसे आप आधुनिक समय का एक विशाल महल कह सकते है, जो अनोखे झूमरों से सुशोभित है। तकनीक के इस्तेमाल से यहाँ हो रहे पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का दुनिया-भर में सीधा लाइव प्रसारण होगा।

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मंदिर का ‘पुजारी फ्लोर’ आकर्षण का विषय है। 1 लाख स्क्वायर फ़ीट में फैले परिसर में 2022 तक निर्माण कार्य पूरी तरह ख़त्म कर लिया जाएगा। मयापुर इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कन्शियनस) का मुख्यालय है और यहाँ इस मंदिर का निर्माण भी उसी का एक भाग है। इस मंदिर के निर्माण का कामकाज आज से एक दशक पहले शुरू हुआ था। इसका मुख्य गुम्बद विश्व के किसी भी मंदिर का सबसे बड़ा गुम्बद होगा। मंदिर के निर्माण में अब तक 2 करोड़ किलो सीमेंट का प्रयोग किया जा चुका है। फ़िलहाल मंदिर के ‘पुजारी सेवा केंद्र’ को खोला गया है।

इस मंदिर का उद्देश्य है कि तकनीक के माध्यम से पूरी दुनिया में वैदिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया जाए। 380 फ़ीट के इस मंदिर में स्पेशल ब्लू बोलिवियन मार्बल का प्रयोग किया जा रहा है। इससे इसे पश्चिमी कलाकृतियों के नमूने की भी झलक मिलेगी। मंदिर के मैनेजिंग डायरेक्टर सदभुजा दास ने बताया कि ये मंदिर पूर्वी और पश्चिमी कलाकृतियों का मिश्रण होगा। इसमें वियतनाम के अलावा भारतीय पत्थरों का प्रयोग भी किया गया है। मंदिर के फ्लोर का डायमीटर 60 मीटर का है। देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी विशेष कक्षों में रखी जाएँगी।

इस्कॉन मंदिरों की ख़ासियत रही है कि यहाँ एक बार में कई श्रद्धालु भजन-कीर्तन में मगन करते हैं, कई ध्यान करते रहते हैं, कुछ नृत्य में आनंद पाते हैं और कई पूजा-पाठ में भी व्यस्त रहते हैं। इस मंदिर में एक समय में एक फ्लोर पर 10,000 श्रद्धालु पूजा-पाठ, नृत्य, ध्यान और भजन-कीर्तन का कार्य कर सकते हैं। इस्कॉन के पदाधिकारियों का कहना है कि संस्था के संस्थापक आचार्य प्रभुपाद हमेशा से चाहते थे कि मायापुर में कुछ ऐसा हो, जो पूरी दुनिया को आकर्षित कर यहाँ खींच लाए। यही वो क्षेत्र है, जहाँ चैतन्य महाप्रभु का जन्म हुआ था। मंदिर में एक साथ 20,000 लोगों के रुकने-ठहरने की व्यवस्था होगी।

संस्था का कहना है कि इस मंदिर में हर धर्म, जाति-संप्रदाय और समुदाय के लोग आ सकते हैं, किसी के लिए भी मंदिर के दरवाजे बंद नहीं रहेंगे। इस्कॉन ने लोगों से आह्वान किया है कि वो इस मंदिर में आएँ और ‘संत कीर्तन मूवमेंट’ का हिस्सा बनें। ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, मायापुर में 70 लाख लोग प्रत्येक वर्ष आते हैं। इस्कॉन का कहना है कि मंदिर के पूर्णरूपेण तैयार हो जाने के बाद पश्चिम बंगाल के उस क्षेत्र में पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मायापुर को ‘हेरिटेज सिटी’ घोषित किया है।

Courtesy : OpIndia

 

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