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माता के जयकारे से गूंजा क्षेत्र, पट खुलते ही दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु

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शारदीय नवरात्र की सप्तमी पर मां के पट खुलने के साथ आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। विभिन्न पंडालों में दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंच गए। वैदिक मंत्रोच्चार व जयकारे के बीच मां दुर्गा के पट खुले। प्रमुख मंदिरों में भी मां का आशीर्वाद लेने के लिए भक्त कतार में लगे रहे। भव्य मूर्तियों के साथ पंडाल सजाए गए हैं। कोरोना की वजह से शारीरिक दूरी और मास्क लगाकर ही घर से निकलने की अपील की गई है।

दुर्गा मंदिर बी एम पी-6

सप्तमी पर मुजफ्फरपुर समेत प्रदेश के सभी पंडालों में मां के पट खुल गए।

दुर्गा स्थान (गोला रोड)

माई स्थान (रामबाग)

 

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माता चामुंडा स्थान : यहीं हुआ था राक्षस बंधुओं चंड और मुंड का वध

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कटरा प्रखंड मुख्यालय में शक्तिपीठ माता चामुंडा का मंदिर अवस्थित है। यह भक्तों के लिए असीम श्रद्धा का केंद्र है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से मां की आराधना करता है वह समस्त कष्टों से मुक्त हो जाता है। मां के दर्शन के लिए सालों भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है। यहां सोम, बुध व शुक्रवार को पूजा करने से विशेष फल मिलता है। शारदीय नवरात्र के पर विशेष पूजा होती है। मंदिर की देखभाल बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड के संरक्षण में चामुंडा न्यास समिति करती है।

No photo description available.

इतिहास

चामुंडा स्थान अति प्राचीन काल से एक कीलानुमा गढ़ पर अवस्थित है। कहा जाता है कि यहां पर चंद्रवंशी राजाओं का किला था। त्रेता युग में देवताओं के आह्वान पर माता ने इसी स्थल पर चंड-मुंड राक्षस बंधुओं का संहार किया था। इसीलिए देवी चामुंडा नाम से विख्यात हुई। पहले यहां गह्वरनुमा मंदिर था। 1980 में तत्कालीन बीडीओ ब्रजनाथ सिंह को पुत्र रत्न प्राप्ति होने पर मंदिर निर्माण की आस्था जगी। इस पुनीत कार्य के लिए नैमिष पीठाधीश्वर स्वामी नारदानंद सरस्वती के शिष्य डा. शौनक ब्रह्मचारी के संरक्षण में समस्त क्षेत्रवासियों के जन सहयोग से भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। इसके बाद से निरंतर मंदिर का विकास हुआ और मातारानी की ख्याति बढ़ती जा रही है।

विशेष आकर्षण

नवरात्र के अष्टमी की रात निशा पूजा तथा नवमी को ग्रामीण पूजा का विशेष महत्व होता है।

माता का स्वरूप ¨पडनुमा है जो जागृतवस्था में है। देवी वैष्णवी रूप में विराजमान हैं।

मान्यता है कि माता के शरण में आए असाध्य रोगी, नि:संतान, बाधा पीड़ित आदि मनवांछित फल पाते हैं।

माता की ख्याति सुन आशीर्वाद लेने 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर राजकीय यात्र पर आए थे।

चामुंडा माता के दर्शन और मन्नतें मांगने के लिए दूर दूर से भक्त सालों भर आते हैं।

krishna-motors-muzaffarpur

कैसे पहुंचें : मुजफ्फरपुर जंक्शन से लगभग 30 किमी पूवरेत्तर भाग में कटरा गढ़ स्थित है। यहां माता का दरबार है। मंदिर के बगल से ही एनएच 527 सी गुजरती है।

शक्ति स्वरूपा मां का आशीर्वाद भक्तों पर कवच की तरह असर करती है। माता हर प्रकार के दु:खों का नाश करने वाली हैं। जो भक्त श्रद्धापूर्वक शरण में आते हैं माता उनका कल्याण अवश्य करती है।

पं. मुरारी झा, प्रधान पुजारी

चामुंडा माता की प्रतिदिन सुबह-शाम निष्ठापूर्वक आरती होती है। इसमें बडी संख्या में भक्तजन भाग लेते हैं। प्रतिदिन फूलमाला से मां का श्रृंगार किया जाता है।

पं कन्हाई झा, पुजारी

Source : Dainik Jagran

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देश भर में प्रसिद्ध है यहां का मां कात्यायनी सिद्धपीठ, यहीं मां भगवती ने दिया था कात्यायन ऋषि को दर्शन

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कोसी-बागमती नदी किनारे खगडिय़ा जिले के चौथम प्रखंड अंतर्गत रोहियार पंचायत स्थित बंगलिया गांव में अवस्थित सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां कात्यायनी स्थान की ख्याति दूर-दूर तक है। शारदीय नवरात्र में ष्ठी के दिन यहां मां की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन यहां श्रद्धा का सागर उमड़ पड़ता है।

यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। चार से पांच लाख श्रद्धालु वर्ष भर में मां के दरबार में आकर माथा टेकते हैं। शारदीय नवरात्र में तो अहर्निश श्रद्धा की सरिता प्रवाहित होती रहती है। यहां सोमवार व शुक्रवार को वैरागन के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखते ही बनती है। इस शक्ति पीठ में माता के हाथ की पूजा की जाती है।

krishna-motors-muzaffarpur

मंदिर का इतिहास

1595 ई. में राजा मुरार शाही को जलालुद्दीन अकबर ने चौथम तहसील सौंपा था। उनके वंशज राजा मंगल ङ्क्षसह और उनके मित्र सिरपत जी महाराज ने मां कात्यायनी की स्थापना की थी। एक ङ्क्षकवदंती के अनुसार राजा मंगल ङ्क्षसह शिकार करने जाते थे। सिरपत जी महाराज (हजारों गाय व भैंस के मालिक थे) जंगल में पशु चरा रहे थे। उस क्रम में उन्होंने देखा कि गाय रोजाना एक निश्चित स्थान पर दूध का स्श्राव करती हैं। उक्त स्थल पर मां का हाथ मिला। जिसे स्थापित कर मां की पूजा-अर्चना आरंभ कर दी गई। उस समय अस्थाई मंदिर का निर्माण किया गया। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। पशुपालक यहां गाय-भैंस की दूध का पहला चढ़ावा चढ़ाते हैं। पशुपालक दूध का चढ़ावा चढ़ाने कितने भी दूर से क्यों नहीं आए, लेकिन दूध फटता नहीं है।

75 दिनों बाद श्रद्धालुओं के लिए खुला मां कात्यायनी मंदिर का पट - Bihar  Khagaria General News

शक्ति पीठ पहुंचने का मार्ग नहीं है सुगम

मानसी- सहरसा रेलखंड के धमारा घाट स्टेशन पर उतरकर श्रद्धालु दक्षिण पूर्व दिशा में लगभग डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर मां कात्यायनी स्थान पहुंचते हैं। इसके अलावा वाहनों से बदला घाट होते हुए मानसी- सहरसा रेल ट्रैक के बगल के रास्ते से छोटी लाइन के परित्यक्त पुल संख्या 50 तक पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों की मदद से उक्त पुल की मरम्मत कर रास्ता को सुगम बनाया गया है। उसके पश्चात पुल संख्या 50 को पैदल पार कर लगभग 500 मीटर उत्तर दिशा में चलकर मां कात्यायनी स्थान पहुंचते हैं। फिलहाल डीएम के निर्देश पर चौथम सीओ भरत भूषण ङ्क्षसह मंदिर की व्यवस्था की देखरेख कर रहे हैं।

Source : Dainik Jagran

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जिलाधिकारी ने जिले में विकासात्मक योजनाओं का लिया जायजा, पारदर्शिता रखने का दिया आदेश

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जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर प्रणव कुमार की अध्यक्षता में विकास समन्वय समिति की बैठक समाहरणालय सभाकक्ष में आहूत की गई।

बैठक में सरकार की विकासात्मक एवं कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का विभागवार समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने उपस्थित विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता के साथ ससमय करना सुनिश्चित करें।क्रियान्वयन के क्रम में कोताही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2020-21से संबंधित प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण की समीक्षा के क्रम में निर्देश दिया गया कि राशि की तृतीय किस्त जहां पेंडिंग है वहां जांचोपरांत नियमानुसार तृतीय किस्त का भुगतान करना सुनिश्चित करें। इसमें सबसे अधिक औराई में 770, कटरा में 407, गायघाट में 346 लाभुकों को तृतीय किस्त किस्त का भुगतान नहीं किया गया है।इस पर नाराजगी प्रकट करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि 10 दिन के अंदर इसका निष्पादन करना सुनिश्चित करें अन्यथा करवाई हेतु तैयार रहें

बैठक में बताया गया कि 101624 वास्तविक लक्ष्य के विरुद्ध 100062 का जियो टैग किया गया है। वही कूल 76725 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं जो कि सैंक्शन लक्ष्य का 76. 68 परसेंट है। डीआरडीए निदेशक चंदन चौहान के द्वारा बताया गया कि विगत कुछ महीनों से अभियान चलाकर निर्धारित लक्ष्य को पाने के दिशा में प्रभावी कार्य किए गए हैं जिसका परिणाम पूर्ण आवासों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि देखने को मिली है। सबसे अधिक अपूर्ण आवासों की संख्या कटरा में, उसके बाद गायघाट और औराई में पाया गया है। निर्देश दिया गया कि इस माह के अंत तक अपूर्ण आवासों को पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाए।साथ ही डीआरडीए निदेशक को निर्देश दिया गया कि इसका सतत अनुश्रवण करना सुनिश्चित करें।

बैठक में मुख्यमंत्री वास स्थल क्रय सहायता योजना की समीक्षा के क्रम में निदेश दिया गया कि निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। बताया गया कि उक्त योजना के तहत कुल 276 लाभुकों को पेमेंट किया गया है निर्देश दिया गया कि कैंप मोड में अभियान चलाकर इसकी जांच भी कर ली जाए।

सामुदायिक शौचालय की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि कुल लक्ष्य 770 के विरुद्ध 454 सामुदायिक शौचालय पूर्ण किए जा चुके हैं। इसमें लचर प्रदर्शन करने वाले प्रखंडों के बीडीओ को निर्देशित किया गया कि कार्य में गति लाते हुए निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करना सुनिश्चित करें।

आईसीडीएस की समीक्षा के क्रम में डीपीओ आईसीडीएस के द्वारा जानकारी दी गई कि जिले में कुल स्वीकृत आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या 5617 है। 5525 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं जिसके विरूद्ध कुल लाभुकों की संख्या 584951 है।बताया गया कि पोषाहार मद में प्राप्त आवंटन का 87.48 प्रतिशत व्यय किया गया है। मनरेगा के सहयोग से पूर्ण किए गए आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या 12 है।कुल 5525 सेविकाओं और 5034 सहायिकाओं का चयन हुआ है।वही मातृ वंदना योजना के बारे में बताया गया है कि इस की उपलब्धि 122% है।

सामाजिक सुरक्षा योजना के समीक्षा के क्रम में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत है अब तक कुल प्राप्त आवेदनों की संख्या 158620 है जिसमें से 137700 लोगों को स्वीकृति दी गई है। वही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय निशक्तता पेंशन के तहत 94 लाभुकों को स्वीकृति दी गई है। बिहार राज्य निशक्तता पेंशन के तहत 3900लाभुकों को ,इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन के तहत 4515 लाभुकों को, लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत 4490 लाभुकों को ,इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धजन पेंशन योजना के तहत 5695 लाभुकों को स्वीकृति दी गई है। कबीर अंत्येष्टि अनुदान योजना के तहत जानकारी दी गई कि अब तक 969 लाभार्थी में से 429 लाभार्थियों के खाते में डीबीटी पोर्टल के माध्यम से भुगतान किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सामाजिक सुरक्षा के तहत सरकार की महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन होता है। पूरी संजीदा के साथ विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीरता बरतें।

बैठक में जिला लोक शिकायत निवारण की समीक्षा की गई निर्देश दिया गया की जिला लोक शिकायत निवारण एवं अनुमंडल लोक शिकायत निवारण में सुनवाई हेतु लंबित मामलों का निष्पादन शीघ्र करना सुनिश्चित करें। इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में हर घर नल का जल, पक्की नाली गली, भवन प्रमंडल, जिला कल्याण, जिला अल्पसंख्यक कल्याण ,पीएचईडी की भी समीक्षा की गई। इन योजनाओं के क्रियान्वयन ससमय हो इस बाबत सख्त निर्देश जिलाधिकारी के द्वारा दिए गए

बैठक में उप विकास आयुक्त आशुतोष द्विवेदी, सहायक समाहर्ता श्रेष्ठ अनुपम, डीआरडीए निदेशक चंदन चौहान, डीपीआरओ कमल सिंह के अलावा सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी उपस्थित थे।

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