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रोजाना 50 हजार कॉल, 22 घंटे तक काम, सोनू सूद ने बताया कैसे करते हैं सबकी मदद

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कोरोना काल में मसीहा बनकर उभरे एक्टर सोनू सूद लगातार देश की जनता की मदद कर रहे हैं. ऐसे में आजतक से सोनू सूद नेे खास बातचीत की. पिछले लॉकडाउन से लेकर अभी तक के लॉकडाउन तक सोनू सूद मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. सोनू और उनकी टीम लगातार कोरोना से जरूरतमंदों की मदद में लगी हुई है. सोनू ने अपने एक्सपीरियंस और राहत कार्य में आने वाली मुश्किलों के बारे में खुलासे किए. सोनू से हमने पुछा कि वह कैसे इतने लोगों की मदद कर पाते हैं.

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कैसे लोगों की मदद कर रहे हैं सोनू सूद और उनकी टीम?

इसपर सोनू सूद ने कहा, ”मैं ये कहूंगा कि प्रशासन भी मदद कर रहा है लेकिन हर एक इंसान को करना पड़ेगा. क्योंकि इस समय हर किसी को हर किसी की जरूरत है. मैं कैसे करता हूं मुझे खुद नहीं पता. मैं करीबन 22 घंटे फोन पर रहता हूं. हमें 40000 से 50000 रिक्वेस्ट आती है. मेरी 10 लोगों की टीम सिर्फ ऐसी है जो Remdesivir के लिए घूमती है. मेरी एक टीम बेड्स के लिए घूमती है, शहर के हिसाब से हम लोग घूमते हैं. मुझे देशभर के डॉक्टर्स से बात करनी होती है, उन्हें जिस चीज की जरूरत होती है तो हमें जल्द से जल्द मुहैया करवानी होती है. जिन लोगों की मदद हम कर चुके हैं वो एक तरह से हमारी टीम का हिस्सा बन जाते हैं. मैं आपको बताऊं कि मुझे जितनी रिक्वेस्ट आती हैं उन सबको देखने चलूं तो कम से कम 11 साल लगेंगे उनतक पहुंचने में, इतनी ज्यादा रिक्वेस्ट हैं. लेकिन हमारी कोशिश जारी है कि ज्यादा से लोगों की जाने बचा सकें.”

लाखों लोग सोनू सूद को शुक्रिया बोल रहे हैं 

इस मुश्किल समय में अपने आप को कैसे साधे रखते हैं सोनू सूद इसपर उन्होंने कहा एक किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा, ”हम एक लड़की को अस्पताल में बेड दिलाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बेड नहीं मिल पा रहा था. रात के 1 बजे रहे थे और उसकी बहन फोन पर बहुत रो रही थी और कह रही थी कि प्लीज बचा लीजिए वरना परिवार खत्म हो जाएगा. तो मैं बहुत परेशान था. ऐसा करते-करते रात को 2.30 बज गए थे और मैं दुआ कर रहा था कि वो लड़की सुबह तक बच जाए ताकि हम उसे बेड दिलवा सकें. सुबह 6 बजे मुझे कॉल आया और मैंने उसे बेड दिलवाया और अभी वो ठीक है. तो खुशी होती है कि मैं मदद कर पाया.”

इतना ही नहीं सोनू सूद ने कहा कि इस समय उनके पास निगेटिव सोच और गुस्से का समय नहीं है. वह कहते हैं कि मुश्किल के इस समय में लोगों को गुस्सा और चिढ़ छोड़कर अपना ध्यान दूसरों की मदद में लगाना चाहिए.

राहत कार्य में आने वाली सबसे बड़ी मुश्किल है ये

अपने काम में आने वाली मुश्किलों पर भी सोनी सूद ने बात की. उन्होंने कहा, ”सबसे बड़ी मुश्किल नए शहर में होती है. जब आपके कोई कॉन्टैक्ट नहीं है, तो क्या किया जाए. हम वहां के लोगों को अपना हिस्सा बनाने की कोशिश करते हैं. जैसे गांव में पहुंचने के साधन नहीं हैं तो हम खुद गाड़ियां भेजते हैं, उन्हें अस्पताल पहुंचाते हैं. अस्पतालों के भी हाल बहुत बुरे हैं. ऐसे में दिक्कत तो बहुत है.”

लोगों को बचाना है तो समंदर में कूदना ही होगा- सोनू 

सोनू सूद से पूछा गया कि राहत के काम में कई बार ऐसे वीडियो और तस्वीरें उन्हें देखने को मिलती होंगी, जो उन्हें विचलित करती होंगी. इसपर सोनू ने कहा, ”बहुत सारे हैं. मैं आपको छोटा-सा किस्सा बताता हूं. देहरादून में एक लड़की थी सबा, वो छह महीने प्रेग्नेंट थी और उसे ट्विन्स होने वाले थे. सबा बहुत तकलीफ में थी. उसके पति और बहन ने हमें ट्विटर के जरिए कॉन्टैक्ट कर मदद मांगी थी. हमने उनको अस्पताल में बेड दिलवाया, उन्हें ICU की जरूरत पड़ी हमने वो दिलवाया, फिर प्लाज्मा की जरूरत पड़ी वो दिलवाया, फिर वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी वो भी दिलाया. तो हमें लगा कि हमने बचा लिया है और वो ठीक भी हो गई थी. लेकिन अगले दिन हमें कॉल आया कि वो नहीं रही. तो बड़ा दुख हुआ. ऐसा लगा जैसे आपके घर से कोई चला गया हो.

आप विश्वास नहीं करेंगे कि 10 घंटे बाद उसकी बहन और पति से मुझे कॉल किया और कहा कि हम आपकी टीम से साथ जुड़कर मदद का काम करना चाहेंगे, ताकि हम दूसरों को बचा सकें. तो वो जज्बा होता है जब आप किसी के लिए मेहनत करते हैं. उनको पता है कि आप मजबूर इंसान हैं. ये समय ऐसा है कि कोई फर्क नहीं पता कि आप कितने अमीर हो, कितने कनेक्टेड हो. इतने बड़े-बड़े लोग जिनसे मैं भी मदद मांगता, वो मुझे कॉल करते हैं और कहते हैं कि सोनू मुझे मदद की जरूरत है, इस चीज का इंतजाम करवा के दे. मैं सबसे कहना चाहूंगा कि आप ये मत सोचिए कि आप कैसे करेंगे, आपके लिए पहला कदम उठाना जरूरी है. आपका समंदर में कूदना जरूरी है, तैरना लहरें खुद सिखा देंगी.”

सोनू सूद को खुद भी कोरोना हुआ था

मैं एक्शन से आउट नहीं था. बल्कि मैं और ज्यादा एक्शन में आ गया था. मैं एक कमरे में बंद था, बाहर नहीं निकल रहा था. मेरे पास मेरा फोन था और मुझे ढेरों कॉल आ रहे थे. मैं अभी 22 घंटे काम करता हूं तब मैं 24 घंटे काम करता था. क्योंकि समय ही समय था मेरे पास. तो मुझे लगता है कि उस समय तब मैं आइसोलेशन में था मैं ज्यादा लोगों से जुड़ा और ज्यादा लोगों को मदद पहुंचा पाया. मुझे याद है मेरे दोस्त बोलते थे कि यार फिल्में देखना अच्छी-अच्छी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर. मैंने अभी तक अपने रिमोट को हाथ ही नहीं लगाया. समय ही नहीं है. यह वो समय है जब आपको हर चीज पीछे छोड़नी है, हर एक इंसान हो. हर एक इंसान को आगे आना है, टीम बनानी है और अपने साधनों का इस्तेमाल करना है. मैं मंटा हूं कि कोई भी इंसान भले ही वो एक्टर हो, टीचर हो या कोई भी हो किसी ना किसी ऐसे को जनता है जो दूसरे की जान बचा सकता है. ऐसे लोगों को उठना होगा और अपने कॉन्टैक्ट्स को एक्टिवेट वापस करना होगा.

सिस्टम की लाचारी से रूबरू हो रहे है सोनू सूद 

बहुत ज्यादा. मुझे लगता है कि पहले हम शिकायतें करते थे कि हिंदुस्तान में ऐसा होता तो अच्छा होता. सड़कें अच्छी होतीं, अस्पताल अच्छे होते. लेकिन इस बार जो हुआ है. इतने मासूम लोगों ने अपनी जानें गंवाई हैं कि मैं आपको बता नहीं सकता. सब यंग लोग हैं. 18, 20 22 साल के लोग, जिन्होंने अपनी जान गंवाई है. इन्होने एक महीने पहले सोचा नहीं होगा कि एक ऐसी वेव आएगी और इतना भारी नुक्सान होगा. तो हम लोग कैसे इसको देख रहे हैं आने वाले समय में, हम लोग देख रहे हैं कि देश का जीडीपी जो है उसका 1 से 2 फीसदी हेल्थकेयर को जाता है. लेकिन इन मासूम लोगों ने जो जाने गंवाई है उनका कुछ नहीं हो सकता. मेरे हिसाब से 7 से 8 फीसदी हेल्थकेयर को जाना चाहिए ताकि हमारे देश के लोग ऐसी किसी भी घटना में सुरक्षित हों. मुझे नहीं लगता कि इन लोगों के परिवार वाले कभी भी उन चीजों से बाहर आ पाएंगे कि हमारे परिवार वालों ने जाने गंवाई, क्योंकि उन्हें एक ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं मिल पाया. लोग बिलखते हैं मेरे कॉल पर कि आप बचा लीजिए हमारे आपको को, मैं बेबस महसूस करता हूं. मैं चाहता हूं ऐसा कभी किसी के साथ दोबारा ना हो.”

नेक्स्ट लेवल पर सोनू का क्या प्लान है?

सोनू सूद ने आगे आने वाले समय में उनका क्या प्लान है इस बारे में बात करते हुए कहा, ”मुझे तो खड़े होना ही है देश के लिए. मैं बहुत बच्चों को जनता हूं जिन्होंने अपने मां-बाप को खोया है. लेकिन अब सरकारों को आगे आना होगा. कोरोना से मां-बाप खो चुके बच्चों के लिए पढ़ाई का कोई खर्चा नहीं लगना चाहिए. ऐसे में बच्चों के लिए सरकारी हो या प्राइवेट कहीं भी पैसे नहीं लगने चाहिए. मैं पहले भी बोल चुका हूं कि श्मशान घाट में भी लोगों के लिए सब फ्री होना चाहिए. ये वो समय है जब हम उन बच्चों को बता सकते हैं कि उनका साथ देने के लिए हम यहां हैं. मैं खुद भी कोरोना से अपने मां-बाप खो चुके बच्चों की पढ़ाई के लिए एक मुहीम शुरू कर रहा हूं. मुझे अभी इसमें कुछ समय लगेगा क्योंकि अभी मैं व्यस्त हूं, लेकिन मैं पूरी कोशिश कर रहा हूं कि मैं इन बच्चों की पढ़ाई फ्री करवा दूं.”

Source : Aaj Tak

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22 साल पहले आज ही के दिन सेना ने कारगिल में किया था तोलोलिंग हिल्‍स पर कब्‍जा, पाकिस्‍तान को था खदेड़ा

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कारगिल की जंग को 22 साल पूरे होने वाले हैं. मई 1999 की गर्मियों में कारगिल सेक्‍टर जो अब लद्दाख में है, उस समय जम्‍मू कश्‍मीर में आता था, वहां पर 60 दिनों तक भारत और पाकिस्‍तान की सेनाएं आमने-सामने थीं. इस जंग में भारत को कई सफलताएं हासिल हुईं. इन्‍हीं कई सफलताओं में से एक था तोलोलिंग पर फिर से कब्‍जा करना. तोलोलिंग, भारत और भारत की सेनाओं के लिए बहुत जरूरी है. इस पर कब्‍जा भारत के लिए एक अहम रणनीतिक विजय साबित हुआ था.

क्‍यों जरूरी था तोलोलिंग पर कब्‍जा

13 जून 1999 को इंडियन आर्मी ने पाकिस्‍तान की लाइट इनफेंट्री के सैनिकों को तोलोलिंग से खदेड़ा था. इस रेजीमेंट में सैनिकों के साथ ही पाकिस्‍तानी घुसपैठिये भी शामिल थे. तोलोलिंग, लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के एकदम करीब है. इसकी पोजिशन ऐसी है कि यहां से श्रीनगर-लेह हाइवे जिसे नेशनल हाइवे 1 के तौर पर जानते हैं, उसे साफ देखा जा सकता है. यह हाइवे लद्दाख को जम्‍मू कश्‍मीर और देश के दूसरे हिस्‍सों से जोड़ने वाला अहम रास्‍ता है. पाकिस्‍तान सेना, तोलोलिंग से इस हाइवे को लगातार निशाना बना रही थी. इस हाइवे पर हमला यानी युद्ध में जीत का तय होना.

पाकिस्‍तान रख रहा था नजर

तोलोलिंग पर कब्‍जा आसान नहीं था और कई दिनों तक इस पर कब्‍जे के लिए युद्ध चला. करगिल के द्रास सेक्टर में तैनात 18 ग्रेनिडयर्स को तोलोलिंग की चोटी पर भारतीय तिरंगे फहराने का आदेश मिला था. तोलोलिंग पर कब्जा किए बिना दुश्मन को पीछे धकेलना आसान नहीं था. हजारों फीट की ऊंचाई पर बैठे घुसपैठियों को भगाने के लिए मेजर राजेश अधिकारी अपने जवानों को लेकर आगे बढ़े. पहले बताया गया कि घुसपैठियों की संख्या 4 से 5 के बीच है लेकिन जब सेना वहां पर पहुंची तो पूरी एक कंपनी मौजूद थी. तोलोलिंग टॉप पर होने की वजह से वो एक मजबूत स्थिति में पहुंच गए थे. टॉप पर होने की वजह से पाकिस्‍तानी घुसपैठिये लगातार इंडियन आर्मी पर नजर रखे हुए थे.

25 जवान हो गए थे शहीद

भारतीय सेना के ऑफिसर्स और जवानों के जज्‍बे का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि सबने खाने के पैकेट की जगह गोला-बारूद साथ ले जाना बेहतर समझा था. पाकिस्‍तानी सेना को जैसे ही आहट मिली उन्‍होंन अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. इस गोलीबारी में 18 ग्रेनेडियर्स के 25 जवान शहीद हो गए जिसमें मेजर राजेश अधिकारी भी शामिल थे. इसी समय कर्नल कुशल ठाकुर ने मोर्चा संभाला और लेफ्टिनेंट कर्नल विश्‍वनाथन भी उनके साथ आ गए. 2 और 3 जून को पूरी यो‍जना बनाकर फिर से हमला किया गया लेकिन इस बार भी असफलता मिली.

दुश्‍मन पर टूट पड़े यशवीर सिंह

2 राजपूताना राइफल्‍स के मेजर विवेक गुप्‍ता 90 जवानों के साथ हमले के लिए आगे बढ़े. मेजर गुप्‍ता प्‍वाइंट 4950 पर कब्‍जा करने वाली थी कि अचानक 12 जून को दुश्‍मन ने फिर से फायरिंग तेज कर दी. 13 जून को हवलदार यशवीर सिंह पाकिस्‍तानी सेना के बंकरों पर टूट पड़े. उनका यह शौर्य भारतीय सेना के लिए विजय में तब्‍दील हो गया. भारत ने तोलोलिंग से दुश्‍मन को खदेड़ा और इस चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराया. युद्ध के बाद मेजर राजेश अधिकारी, मेजर विवेक गुप्‍ता और दीगेंद्र कुमार को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्‍मानित किया गया. साथ ही कर्नल विश्‍वनाथन और हवलदार यशवीर सिंह को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्‍मानित किया गया थ

Input: tv9

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20 स्पेशल ट्रेनों को लेकर आई बड़ी अपडेट, यात्रियों की सुविधा को लेकर रेलवे ने दी अच्छी खबर

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रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ सुनीत शर्मा (Suneet Sharma, Chairman, Railway Board) ने इसी मंगलवार को ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश में अभी 889 ट्रेनें चलाई जा रही हैं और अगले 5 से 6 दिन में 100 ट्रेनें और चलाए जाने का प्लान है. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दिन से ही रेलवे के अलग-अलग जोन की ओर से लगातार ट्रेन सेवाएं बढ़ाई जा रही हैं. वहीं रेलवे की ओर से ट्रेनों के संचालन का विस्तार भी किया जा रहा है.

इसी क्रम में शनिवार को मुंबई, अहमदाबाद से चलाई जा रही 10 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाए गए हैं. पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ राजेश कुमार ने बताया कि यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए उनकी सुविधा के लिए बांद्रा टर्मिनस, मुंबई सेंट्रल, अहमदाबाद आदि स्टेशनों से पूर्व मध्य रेल के बरौनी, समस्तीपुर, दानापुर सहित अन्य स्टेशनों के लिए वर्तमान में चलाई जा रही 10 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के फेरों में वृद्धि की गई है.

यहां देखें स्पेशल ट्रेनों की लिस्ट

1. 09011 उधना-दानापुर स्पेशल ट्रेन का परिचालन 14 जून 2021 को किया जाएगा.

2. 09012 दानापुर-उधना स्पेशल ट्रेन का परिचालन 16 जून 2021 को किया जाएगा.

3. 09049 मुंबई सेंट्रल- समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन का परिचालन 14, 15, 17 और 19 जून, 2021 को किया जाएगा.

4. 09050 समस्तीपुर-मुंबई सेंट्रल स्पेशल ट्रेन का परिचालन 16, 17, 19 और 21 जून, 2021 को किया जाएगा.

5. 09117 मुंबई सेंट्रल- भागलपुर स्पेशल ट्रेन (वाया मुजफ्फरपुर, बेतिया) का परिचालन 18.09.2021 को किया जाएगा.

6. 09118 भागलपुर-मुंबई सेंट्रल स्पेशल ट्रेन (वाया मुजफ्फरपुर, बेतिया) का परिचालन 21 जून 2021 को किया जाएगा.

7. 09175 मुंबई सेंट्रल- भागलपुर स्पेशल ट्रेन (वाया मुजफ्फरपुर, बेतिया) का परिचालन 13 जून 2021 को किया जाएगा.

8. 09176 भागलपुर-मुंबई सेंट्रल स्पेशल ट्रेन (वाया मुजफ्फरपुर, बेतिया) का परिचालन 15 जून 2021 को किया जाएगा.

9. 09177 मुंबई सेंट्रल-भागलपुर स्पेशल ट्रेन (वाया मुजफ्फरपुर, बेतिया) का परिचालन 16 जून 2021 को किया जाएगा.

10. 09178 भागलपुर-मुंबई सेंट्रल स्पेशल ट्रेन (वाया मुजफ्फरपुर, बेतिया) का परिचालन 19 जून 2021 को किया जाएगा.

11. 09181 बांद्रा टर्मिनस-दानापुर स्पेशल ट्रेन का परिचालन 15 जून 2021 को किया जाएगा.

12. 09182 दानापुर-बड़ोदरा स्पेशल ट्रेन का परिचालन 17 जून 2021 को किया जाएगा.

13. 09453 अहमदाबाद- समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन का परिचालन 13 जून 2021 को किया जाएगा.

14. 09454 समस्तीपुर- अहमदाबाद स्पेशल ट्रेन का परिचालन 16 जून 2021 को किया जाएगा.

15. 09501 ओखा-गुवाहाटी स्पेशल ट्रेन (वाया पंडित दीन दयाल उपाध्याय जं.-पटना) का परिचालन 18 जून 2021 को किया जाएगा.

16. 09502 गुवाहाटी-ओखा स्पेशल ट्रेन (वाया पंडित दीन दयाल उपाध्याय जं.-पटना) का परिचालन 21 जून 2021 को किया जाएगा.

17. 09521 राजकोट- समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन का परिचालन 16 जून 2021 को किया जाएगा.

18. 09522 समस्तीपुर- राजकोट स्पेशल ट्रेन का परिचालन 19 जून 2021 को किया जाएगा.

19. 09005 बांद्रा टर्मिनस- बरौनी (वाया पटना, बक्सर, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जं.) स्पेशल का परिचालन 18 जून 2021 को किया जाएगा.

20. 09006 बरौनी-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल (वाया पटना, बक्सर, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जं.) 09006 बरौनी-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल का परिचालन 21 जून 2021 को होगा.

इन स्पेशल ट्रेनों का समय, ठहराव और कोच संयोजन पहले की तरह रहेगा. सीपीआरओ राजेश कुमार ने कहा कि ये सभी स्पेशल ट्रेनें पूरी तरह आरक्षित हैं. यात्रियों को सफर के दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा.

Input: tv9

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विधानसभा चुनाव से पहले क्या यूपी का होगा बंटवारा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड बनने के वायरल मैसेज की जानिए सच्चाई

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यूपी में आजकल सियासी सरगर्मी तेज है। विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियाें ने तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा में बैठकों का दौर तेजी से चल रहा है। लगातार हो रही मीटिंग के बीच सरकार और संगठन में बदलाव की चर्चा ने भी जोर पकड़ लिया। इन सबके बीच सोशल मीडिया पर यूपी के बंटवारे की खबर वायरल हो गई। कुछ लोगों का दावा है कि 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल और बुंदेलखंड को अलग कर दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सूचना विभाग ने वायरल हो रहे इस मैसेज का खंडन किया है। सूचना विभाग ने फैक्ट चेक करते हुए ट्वीट किया है कि उत्तर प्रदेश के बंटवारे की खबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल है। उत्तर प्रदेश के विभाजन को लेकर जताई जा रही आशंका निराधार है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भ्रामक खबरों का प्रसार करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

यूपी में बदलाव की भी चर्चा :

पहले राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष का लखनऊ दौरा उसके बाद प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह का राज्यपाल से मिलना। इसके बाद सीएम योगी का दिल्ली जाकर पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात की घटना ने अफवाहों को और बल दे दिया। हालांकि बीजेपी ने स्प्ष्ट किया है कि वह यूपी में कोई बदलाव नहीं करने जा रही है।

कुछ लोगों का काम सनसनी फैलाना: सिद्धार्थनाथ सिंह
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा है कि आजतक कुछ लोग राजनीतिक खबरों की सनसनी बना रहे हैं। इससे जनता गुमराह होती है। उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री पद को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चा चल रहीं हैं। उनका कहना है ऐसी खबरें कुछ देर के लिए बस ध्यान खींच सकती है, इनकी कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने कहा कि इससे समाज का भला नहीं होता। ऐसा करने वाले यह जान लें कि इससे कोई उन्हें याद नहीं रखेगा।

Input: live hindustan

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