बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections 2020) को लेकर सियासी सरगर्मियां जोरों पर हैं। इसी बीच देश की राजधानी दिल्ली से चौंकाने वाली खबर आई। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान (Ram Vilas paswan) का गुरुवार को निधन हो गया। वो 74 वर्ष के थे। उनके बेटे और एलजेपी के अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने इस बात की जानकारी दी। रामविलास पासवान की पहचान समाज के वंचित तबके से जुड़े लोगों के मुद्दे उठाने वाले नेता के तौर पर रही है। पासवान के राजनीतिक करियर पर नजर डालें तो वो आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार (Nitish Kumar) से भी पहले विधायक बन गए थे।
पासवान 1969 में पहली बार बने विधायक
रामविलास पासवान पहली बार 1969 में विधायक बने थे, जब उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से जीत दर्ज की। हालांकि उन्हें उस जीत के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी थी। लेकिन, इस जीत के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पासवान के पहली बार विधायक बनने के करीब 11 साल बाद यानी 1980 में लालू प्रसाद यादव विधायक बने। हालांकि, लालू यादव 1977 में ही सांसद बन गए थे। वहीं, नीतीश कुमार ने 1985 में पहली बार विधायक बने।
1969 में रामविलास पासवान जब पहली बार विधायक बने तो निकटतम प्रतिद्वंद्वी से जीत का अंतर करीब 906 वोटों का था। वहीं जब लालू यादव 1980 में विधानसभा चुनाव लड़ने उतरे तो उनका जीत का अंतर 9 हजार से ज्यादा वोटों का था। सोनपुर से उम्मीदवारी कर रहे लालू प्रसाद यादव को 45 हजार से ज्यादा वोट मिले और उन्होंनें 9167 मतों से जीत दर्ज की।
अपने पहले चुनाव में नीतीश ने दर्ज की थी लालू-पासवान से भी बड़ी जीत
नीतीश कुमार 1985 में पहली बार नालंदा के हरनौत से चुनाव जीतकर विधायक बने। हालांकि, पहले विधानसभा चुनाव में जीत के अंतर में वो पासवान और लालू यादव दोनों से ही आगे निकल गए। नीतीश कुमार ने करीब 21 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी।






