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वाराणसी से पीएम मोदी आगे तो अमेठी से राहुल गांधी पीछे, जानें 12 वीआईपी सीटों के रुझान

Santosh Chaudhary

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लोकसभा चुनाव 2019 के सियासी जंग का आज निर्णायक दिन है। वोटों की गिनती जैसे-जैसे पूरी होती जाएगी, प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला भी भी होता चला जाएगा। देश की 542 लोकसभा सीटों में से यूपी की 80 सीटों पर सबकी ज्यादा नजर होगी। कारण कि यूपी के नतीजे केंद्र की सत्ता की तकदीर लिखते रहे हैं। यूपी की हर एक-एक सीट अपने आप में मायने रखती है। यूपी में कई ऐसी सीटें हैं जिन पर सबकी नजर है। यूपी में वीवीआईपी सीटों पर कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मुलायम सिंह यादव, सपा प्रमुख और पूर्व सीएम अखिलेश यादव, उनकी पत्नी डिंपल यादव की सीटें हैं, जिनके नतीजों पर सबकी निगाहें हैं। तो चलिए जानते हैं उत्तर प्रदेश की उन सभी वीआईपी सीटों के रुझानों के बारे में…

 

1. वाराणसी लोकसभा सीट: रुझान में पीएम मोदी आगे चल रहे हैं
उत्तर-प्रदेश की सबसे चर्चित वीआईपी सीट है वाराणसी। वाराणसी सीट से इस बार भी भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी मैदान में हैं। पिछली बार भी वाराणसी से पीएम मोदी ने ही जीत हासिल की थी। दरअसल, पीएम मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव में वाराणसी के अलावा गुजरात के वडोदरा से भी चुनाव लड़ा था और दोनों ही जगह से जीत हासिल की थी, लेकिन उन्होंने वाराणसी को अपने संसदीय क्षेत्र के रूप में चुना। इस बार वाराणसी से पीएम मोदी का मुकाबला कांग्रेस के अजय राय और सपा-बसपा गठबंधन की ओर से शालिनी यादव से है। वाराणसी सीट पर सातवें चरण में वोटिंग हुई थी। यह सीट बीएसएफ से बर्खास्त जवान तेजबहादुर यादव की उम्मीदवारी और पर्चा निरस्त होने की वजहों से भी सुर्खियों रहा।

2. रायबरेली लोकसभा सीट: सोनिया गांधी आगे चल रही हैं
उत्तर-प्रदेश की रायबरेली सीट कांग्रेस पार्टी की मजबूत गढ़ रही है और सोनिया गांधी पांचवीं बार चुनावी मैदान में हैं। इस बार भी कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी ही चुनाव लड़ रही हैं। बीजेपी ने सोनिया गांधी के खिलाफ दिनेश प्रताप सिंह को उतारा है। दिनेश प्रताप सिंह रायबरेली सीट से कांग्रेस एमएलसी थे और वह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। रायबरेली सीट पर पिछले चार बार से लगातार सोनिया गांधी चुनाव जीतती आ रही हैं। रायबरेली में पांचवें चरण में मतदान हुए हैं।

3. अमेठी लोकसभा सीट: राहुल गांधी पीछे चल रहे हैं, जबकि स्मृति ईरानी आगे
अमेठी कांग्रेस परिवार की परंपरागत सीट में शुमार है। अमेठी लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हैं। पिछली बार की तरह ही इस बार भी राहुल गांधी का मुकाबला केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से है। बीजेपी ने एक बार फिर से स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के खिलाफ मैदान में उतारा है। हालांकि, पिछली बार स्मृति ईरानी को हार का सामना करना पड़ा था। राहुल गांधी इस बार अमेठी के साथ-साथ केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं। अमेठी में भी पांचवें चरण में ही मतदान हुए।

4. कन्नौज लोकसभा सीट:
उत्तर-प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट मुलायम परिवार का मजबूत गढ़ है। कन्नौज सीट से कई चुनावों से मुलायम परिवार के ही सदस्य जीतते आ रहे हैं। पिछले दो चुनाव से अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव चुनाव जीत रही हैं। इस बार भी सपा की ओर से डिंपल यादव चुनावी मैदान में हैं, वहीं बीजेपी ने सुब्रत पाठक मैदान में है। 2014 में भी डिंपल यादव ने बीजेपी के सुब्रत पाठक को हराया था। चौथे चरण में कन्नौज लोकसभा सीट पर वोटिंग हुई थी।

5. आजमगढ़ लोकसभा सीट: अखिलेश यादव आगे, निरहुआ पीछे
यूपी की आजमगढ़ लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद हैं मुलायम सिंह यादव। मगर इस बार सपा की ओर से खुद अखिलेश यादव चुनावी मैदान में हैं। अखिलेश यादव के खिलाफ बीजेपी ने दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ को उतारा है। अखिलेश यादव के खिलाफ भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ को उतार कर बीजेपी ने सबको चौंका दिया। आजमगढ़ सीट पर छठे चरण में मतदान हुए। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने बीजेपी के रमाकांत त्रिपाठी को हराया था।

6. गाजीपुर लोकसभा सीट: मनोज सिन्हा पीछे चल रहे हैं
पूर्वांचल की गाजीपुर लोकसभा सीट पर सातवें चरण में मतदान हुए। इस सीट पर भाजपा के मनोज सिन्हा और बसपा के अफजल अंसारी के बीच में कड़ी टक्कर है। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा इस सीट से मौजूदा सांसद हैं और पिछली बार उन्होंने सपा के शिवका को हराया था।

7. सुल्तानपुर लोकसभा सीट: मेनका गांधी पीछे चल रही हैं

सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर इस बार बीजेपी ने अपने उम्मीदवार बदले हैं। इस सीट पर भाजपा की मेनका गांधी और बसपा की चंद्रभद्र सिंह के बीच कड़ा मुकाबला है। कांग्रेस ने यहां से डॉ संजय सिंह को उतारा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर से मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी ने जीत हासिल की थी। मगर इस बार वरुण गांधी पीलीभीत से चुनाव लड़ रहे हैं। सुल्तानपुर सीट पर 6ठे चरण में मतदान हुए।

8. लखनऊ लोकसभा सीट: राजनाथ सिंह चल रहे हैं
लखनऊ लोकसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ कांग्रेस ने जहां आचार्य प्रमोद कृष्णम को उतारा है, वहीं महागठबंधन की ओर से शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा मैदान में हैं। 2014 में इस सीट से राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की प्रोफेसर रीता को हराया था। बता दें कि इस सीट से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहावी वाजपेयी कई बार चुनाव जीत चुके हैं। इस सीट पर छठे चरण में मतदान हुए।

8. मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट:
यूपी की मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर महागठंबधन को ओर से रालोद प्रत्याशी अजित सिंह चुनावी मैदान में हैं। यहां अजित सिंह और भाजपा प्रत्याशी संजीव बाल्यान के बीच सीधी लड़ाई है। मुजफ्फरनगर सीट पर पहले चरण में चुनाव हुए थे। यहां से मौजूदा सांसद हैं संजीव बालियान हैं। पिछली बार इस सीट पर संजीव बालियान ने बसपा के कादिर राणा को हराया था।

9. बागपत लोकसभा सीट: जयंत चौधरी पीछे, सत्यपाल सिंह आगे चल रहे हैं
उत्तर प्रदेश की बागपत लोकसभा सीट पर रालोद के जयंत चौधरी और भाजपा के सत्यपाल सिंह के बीच लड़ाई है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के सत्यपाल सिंह ने सपा के गुलाम मोह को हराया था। वहीं, 2009 में आरएलडी के अजित सिंह यहां से जीते थे। यहां पहले चरण में ही वोटिंग हुई थी।

10. रामपुर लोकसभा सीट:
यूपी में इस बार रामुपर लोकसभा सीट के नतीजे पर भी सबकी नजर होगी। यहां पर आजम खान और जया प्रदा के बीच सीधा मुकाबला है। इस बार जयाप्रदा भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा है। जयाप्रदा पर विवादित टिप्पणी के लिए आजम खान को प्रचार के दौरान चुनाव आयोग की ओर से 72 घंटे का बैन झेलना पड़ा था। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से नेपाल सिंह ने जीत हासिल की थी। हालांकि, इस सीट से जयाप्रदा सपा की टिकट पर पहले भी चुनाव जीत चुकी हैं। रामपुर में लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण में वोटिंग हुई।

11. गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट:
लोकसभा चुनाव 2019 के रण में यूपी की गौतमबुद्ध नगर सीट से केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा पर सबकी नजरें हैं। इस सीट से पिछली बार भी महेश शर्मा ने जीत हासिल की थी। मगर इस बार केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा के सामने SP-BSP-RLD गठबंधन के साझा प्रत्याशी के रूप में BSP के सतवीर नागर हैं और इस सीट पर BSP का खासा वोट बैंक माना जाता है। यही वजह है कि यहां पर कड़ी टक्कर देखने को मिली।

12. गाजियाबाद लोकसभा सीट:
गाजियाबाद लोकसभा सीट के नतीजे इसलिए भी मायने रखती हैं, क्योंकि इस सीट पर केंद्रीय मंत्री वीके सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार भी केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने चुनाव जीता था। इस सीट से कांग्रेस ने डॉली शर्मा को उतारा है, वहीं महागठबंधन की ओर से सुरेश बंसल चुनावी मैदान में हैं। बता दें कि पहले चरण में ही इस सीट पर मतदान हुए थे।

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अलविदा राहत इंदौरी: नहीं रहा ‘आसमां को जमीन’ पर लाने वाला शायर, पढ़िए उनके चुनिंदा शेर

Muzaffarpur Now

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मशहूर शायर राहत इंदौरी (Rahat Indori) इस दुनिया में नहीं रहे. राहत इंदौरी की कोविड-19 के इलाज के दौरान मृत्यु हुई. इंदौर के जिलाधिकारी मनीष सिंह ने पुष्टि की. उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने के बाद यहां एक निजी अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया थी.

अलविदा राहत इंदौरी: नहीं रहा 'आसमां को जमीन' पर लाने वाला शायर, पढ़िए उनके 20 चुनिंदा शेर

आज ही (मंगलवार) सुबह 70 वर्षीय शायर ने खुद ट्वीट कर अपने संक्रमित होने की जानकारी थी. उन्होंने कहा, “कोविड-19 के शुरूआती लक्षण दिखायी देने पर कल (सोमवार) मेरी कोरोना वायरस की जांच की गई जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई.” इंदौरी ने ट्वीट में आगे कहा, “दुआ कीजिये (मैं) जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं.” 1 जनवरी 1950 को इंदौर, मध्य प्रदेश में जन्में राहत कुरेशी उर्फ राहत इंदौरी के पिता का नाम रफ्तुल्लाह कुरैशी था जोकि कपड़ा मिल के कर्मचारी थे उनकी माता का नाम मकबूल उन निशा बेगम था.

उर्दू को विश्व पटल को एक नई और आधुनिक पहचान देने वाले शायरों में से एक राहत इंदौरी का इस दुनिया को छोड़ के जाना एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. आज हम आपको मशहूर शायर राहत इंदौरी के कुछ चुनिंदा शेर शेयर कर रहे हैं. राहत इंदौरी जब अपने खास और बेहद कमाल के लहजे में स्टेज पर शेर पढ़ते थे तालियों की गड़गड़ाहट रुकती नहीं थी. उनका एक शेर ‘आसमान लाये हो ले आओ ज़मीन पर रख दो..’ लोगों को बेहद पसंद है.

राहत इंदौरी के चुनिंदा शेर

1. आसमान लाये हो ले आओ ज़मीन पर रख दो.

मेरे हुजरे में नहीं, और कहीं पर रख दो,
आसमां लाये हो ले आओ, जमीं पर रख दो!
अब कहाँ ढूड़ने जाओगे, हमारे कातिल,
आप तो क़त्ल का इल्जाम, हमी पर रख दो!
उसने जिस ताक पर, कुछ टूटे दिये रखे हैं,
चाँद तारों को ले जाकर, वहीँ पर रख दो!

2. बुलाती है मगर जाने का नहीं
बुलाती है मगर जाने का नहीं
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं

ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो
चले हो तो ठहर जाने का नहीं

सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नहीं

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नहीं

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नहीं

3. ‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’

अगर खिलाफ हैं, होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुँआ है, कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.

4. तूफ़ानों से आँख मिलाओ
तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे
जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे

5. फकीरी पे तरस आता है
अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है
जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे

जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे

फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो
इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो

6. बहुत हसीन है दुनिया
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

7. उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है
बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं

8. बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं

9. आँख में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

10. बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ

11. तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

12. अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए

13. न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा

14. मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे
मेरे भाई, मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले

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शिक्षा मंत्री ने 11वीं क्लास में लिया दाखिला, मैट्रिक तक पढ़े होने के कारण होती थी फजीहत

Ravi Pratap

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झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने 11वीं क्लास में पढ़ेंगे. इसके लिए उन्होंने बोकारो जिला के बेरमो प्रखंड के नावाडीह देवी महतो कॉलेज में जगरनाथ महतो ने एडमिशन ले लिया है. मंत्री जी की शिक्षा को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे. मात्र मैट्रिक तक की इनकी शिक्षा पर निशाना साधा जा रहा था. इससे आजिज होकर इन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण करने का निर्णय लिया.

एडमिशन करवाने के बाद श्री महतो ने कहा कि अब वह उच्च शिक्षा हासिल करेंगे. इसलिए आर्ट्स संकाय में एडमिशन करवाया है. कॉलेज जाकर मंत्री महतो ने नामांकन फॉर्म भरा. इसके बाद एक हजार एक सौ रुपये नामांकन शुल्क जमा कर रशीद लिया.

मंत्री जी के नामांकन को लेकर जब पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने कहा कि वह सारा काम देखते हुए सब कुछ करेंगे. ‘क्लास भी करेंगे और मंत्रालय भी संभालेंगे. घर में किसानी का काम भी करेंगे, ताकि मेरे काम को देखकर अन्य लोग भी प्रेरित हों.’

उन्होंने कहा कि शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती. अन्य नौकरियों में रहते हुए लोग आईएएस, आईपीएस की तैयारी करते हैं और सफल भी होते हैं.

बता दें कि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने वर्ष 1995 में चंद्रपुरा प्रखंड के नेहरू उच्च विद्यालय तेलो से मैट्रिक की परीक्षा सेकेंड क्लास में पास की थी. और इन्होंने जिस कॉलेज की स्थापना इनेक सहयोग से ही हुआ है. उसी कॉलेज में इन्होंने अपना नामांकण कराया है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिस दिन वह झारखंड के शिक्षा मंत्री बने थे, उसी दिन सोच लिया था कि अब आगे की पढ़ाई करेंगे. उनके मंत्री बनने के बाद लोगों ने कहा था कि दसवीं पास विधायक को शिक्षा मंत्री बनाया गया है. इसलिए हमने तय किया कि हम पढ़ेंगे. उच्च शिक्षा हासिल करेंगे और राज्य के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा सुविधा देंगे.

Input : Live Cities

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14 साल बाद मिला खोया हुआ पर्स, पुलिस ने शख्स को लौटाए पैसे

Muzaffarpur Now

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मुंबई में एक शख्स को उसको खोया हुआ पुराना पर्स वापस मिल गया। ये पर्स 14 साल पहले मुंबई की लोकल ट्रेन में खोया था और इस पर्स में उस समय 900 रुपये थे। साल 2006 में खोया हुआ ये पर्स शख्स को 14 साल बाद अब मिला है और पुलिस ने शख्स को उसकी राशि भी लौटा दी है।

14 साल पहले मुंबई लोकल में खो गया था ...

हेमंत पेडलकर साल 2006 में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-पनवेल लोकल ट्रेन में सफर कर रहे थे, जिस वक्त उनका पर्स ट्रेन में गुम हो गया। आज सरकारी रेलवे पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में बताया। इस साल अप्रैल महीने में हेमंत को जीआरपी की ओर से कॉल आई और उन्हें जानकारी दी गई कि उनका 14 साल पहले खोया हुआ पर्स अब मिल गया है।  हालांकि तब मुंबई में कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन के कारण हेमंत अपना पर्स लेकर नहीं आ पाए थे। लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद पेडलकर जो कि पनवेल में रहते हैं, वाशी के जीआरपी ऑफिस गए और अपना पर्स वहां से बरामद किया और पुलिस ने हेमंत को पर्स में रखी राशि भी लौटाई।

हेमंत पेडलकर ने बताया कि मेरे पर्स में 900 रुपये थे, जिसमें एक पांच सौ का नोट भी था जो साल 2016 में बंद कर दिया गया। पुलिस ने हेमंत को तीन सौ रुपये लौटा दिए और स्टाम्प पेपर काम के लिए पुलिस ने सौ रुपये काट लिए। हेमंत ने बताया कि पुलिस उसको 500 रुपये बदलकर देगी।

हेमंत ने कहा कि जब वो जीआरपी ऑफिस गए थे तो वहां कई लोग थे जो अपने चुराए हुए पैसे वापस लेने आए थे। इसमें कई हजारों नोट थे जो नोटबंदी के दौरान बंद हो चुके थे, इन लोगों को इस बात की चिंता थी कि उन्हें उनका पैसा कैसे और कब वापस मिलेगा।

हेमंत पेडलकर ने बताया कि वो उनके पैसे वापस मिलने पर बेहद खुश हैं। एक जीआपरी अधिकारी ने बताया कि जिसने हेमंत पेडलकर का पर्स चुराया था, उसे कुछ समय पहले ही गिरफ्तार किया गया था। अधिकारी ने बताया कि हमें आरोपी से हेमंत का पर्स मिला, जिसमें 900 रुपये थे।

अधिकारी ने बताया कि हमने हेमंत को 300 रुपये लौटा दिए हैं और 500 रुपये तब लौटा दिए जाएंगे, जब पुराना नोट नए नोट से बदल दिया जाएगा।

Input : Amar Ujala

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