विपक्ष की बैठक पर BJP का वार, कहा- CAA के खिलाफ विपक्ष के प्रस्ताव ने पाकिस्तान को खुश कर दिया होगा
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विपक्ष की बैठक पर BJP का वार, कहा- CAA के खिलाफ विपक्ष के प्रस्ताव ने पाकिस्तान को खुश कर दिया होगा

Md Sameer Hussain

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नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने सोमवार को कहा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खि’लाफ विपक्ष के प्रस्ताव से पाकिस्तान को जरूर खुशी हुई होगी. उन्होंने कहा कि इस कानून का मकसद अल्पसंख्यकों के खिलाफ ‘बर्बर सलूक’ करने के लिए पाकिस्तान को बेनकाब करना है. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने ‘‘अनावश्यक रूप से’’ इस प्रक्रिया में मोदी सरकार पर ह’मला किया है.

विपक्ष की बैठक पर BJP का वार, कहा- CAA के खिलाफ विपक्ष के प्रस्ताव ने पाकिस्तान को खुश कर दिया होगा

विपक्षी दलों पर कटाक्ष करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री प्रसाद ने कहा कि उनकी ‘एकजुटता’ उजागर हो गयी है.

विपक्ष की एकजुटता का पर्दाफाश

प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘विपक्ष की एकजुटता का पर्दाफाश हो गया है क्योंकि सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रस और आप जैसे प्रमुख दल (कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी द्वारा बुलायी गयी बैठक से) दूर रहे. यह प्रस्ताव ना तो देश हित में, ना ही रक्षा हित में हैं. यह उन अल्पसंख्यकों के हितों के भी अनुकूल नहीं है जो कि उत्पीड़न के चलते पड़ोसी देशों से भाग कर आए हैं.’’

बता दें कांग्रेस समेत देश के 20 विपक्षी दलों ने सोमवार को संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को वापस लेने एवं राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि सभी मुख्यमंत्री राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया को निलंबित करें जिन्होंने अपने राज्यों में एनआरसी लागू नहीं करने की घोषणा की थी.

विपक्षी दलों ने कहा, ‘‘सीएए, एनपीआर और एनआरसी एक पैकेज है, जो असंवैधानिक है तथा गरीब, दबे-कुचले लोग, अनुसूचित जाति-जनजाति और भाषायी एवं धार्मिक अल्पसंख्यक इसके मुख्य निशाने पर हैं.’’

बैठक में पारित हुआ प्रस्ताव कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें अर्थव्यवस्था, रोजगार एवं किसानों की स्थिति तथा सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई तथा जेएनयू एवं कुछ अन्य विश्वविद्यालयों में छात्रों पर हमले को लेकर चिंता प्रकट की गई.

इन पार्टियों ने प्रस्ताव में कहा, ‘‘हम नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से अर्थव्यवस्था का पूरी तरह कुप्रबंधन किए जाने के कारण बड़ी संख्या में लोगों के सामने पैदा हुई जीविका की खतरनाक स्थिति को लेकर अपनी चिंता प्रकट करते हैं.’’

उन्होंने आरोप लगाया कि अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार करने की बजाय सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है.

Input : News18

 

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एक्टिंग छोड़ रवीना टंडन अब करने जा रही हैं ये काम, कहा- दोनों काम साथ नहीं कर सकती

Md Sameer Hussain

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मुंबई. लगातार तीन दशक से बॉलीवुड में काम कर रही अभिनेत्री रवीना टंडन (Raveena Tondan) आखिरी बार पर्दे पर फिल्म “शब” में नज़र आई थीं तो वही छोटे पर्दे पर रवीना छोटे पर्दे के मशहूर रियलिटी शो “नच बलिए” में बतौर जज नज़र आई थीं. हलांकि अब फिल्मों के बजाए अब वो अपनी क्रिएटिविटी एक्सप्लोर कर रही हैं. हाल ही में रवीना ने ‘मल्टीपल पर्सनॉलिटी डिसऑर्डर’ पर एक वेब सीरीज लिखी है. इस वेब सीरीज को रवीना खुद प्रोड्यूस कर रही हैं. रवीना की यह वेब सीरीज उनके अपने बैनर एए फिल्म्स के बैनर तले बनेगी.

रवीना टंडन ने न्यूज 18 हिंदी से इस पर बात करते हुए बताया, “जिस कहानी पर मैंने कड़ी मेहनत की है, उसे दुनिया के सामने लाने को लेकर मैं काफी एक्साइटेड हूं. यह एक एंटेरटेनिंग कहानी है, जिसे मैंने खुद लिखा है, यह दर्शकों को उनकी सीट से चिपकाए रखेगा. कॉन्सेप्ट की बात करें तो यह वेब सीरीज बहुत अलग है, इसलिए मुझे आशा है कि लोगों को यह पसंद आएगी.”

स्‍प्‍लिट पर्सनालिटी पर आधारित शो के सवाल पर रवीना ने कहा, “स्प्लिट पर्सनालिटी डिसॉर्डर एक ऐसी चीज रही है जिसके बारे में जानने की उत्सुकता मेरे अंदर हमेशा से रही है. ये बहुत ही दिलचस्प होता है. हां, मैंने कई इंटरनेशनल फिल्में देखी हैं और कई किताबें पढ़ी हैं लेकिन अभी तक कुछ भी एक्सप्लोर नहीं किया गया है. आज की जेनेरेशन भारत में बायपोलर क्या है ये समझने लगी है लेकिन कोई इसकी गहराई में नहीं उतरा है. इसे डिसएसोसिएटेड डिसॉर्डर कहते हैं जिसके बारे में ज्यादा कुछ एक्सप्लोर नहीं किया गया है. इसमें बहुत सा सस्पेंस होता है और ये बहुत ही इंट्रेस्टिंग है.”

हलांकि इस बातचीत में रवीना ने साफ़ किया कि वह इन प्रोजेक्ट्स में पर्दे के पीछे काम करेंगी. इस सीरीज में रवीना एक्टिंग नहीं बल्कि राइटिंग करेंगी और प्रोड्यूसर बनकर शो की कमान संभालेंगी.

रवीना का कहना है कि वेब सीरीज के प्रोडक्शन में बहुत समय लग जाता है. ऐसे में वह खुद को भटकाना नहीं चाहती. इसीलिए वह खुद को पर्दे के रोल से दूर रख पर्दे के पीछे के काम मैनेज करने पर जोर दे रही हैं. बातचीत को आगे बढ़ाते हुए अपने प्रोजेक्ट के नाम का खुलासा करते हुए रवीना टंडन ने बताया, “इस प्रोजेक्ट का नाम है सीकिंग जन्नत और इस किरदार को निभाने के लिए हमें ऐसा एक्टर चाहिए था जो स्ट्रांग हो और अपने भूमिका को अच्छी तरह से निभा सके. क्योंकि इस मुश्किल किरदार को निभाने के लिए एक एक्टर के अंदर गहराई होनी चाहिए”.

Input : News18

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आजादी मिलने के बाद हिमालय क्यों जाना चाहते थे सुभाष चंद्र बोस

Md Sameer Hussain

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आजादी के बाद देश में अक्सर ये माना जाता था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निधन विमान हादसे में नहीं हुआ है. वो जल्द अज्ञातवास से वापस स्वदेश लौटेंगे और तब देश में आमूलचूल बदलाव आएगा. ये तो चर्चाओं की बात थी लेकिन नेताजी आजादी की लड़ाई के दौरान आजाद हिंद फौज के सहयोगियों से एक खास इच्छा जाहिर करते थे, जिसके लिए वो आजादी के बाद हिमालय जाना चाहते थे.

उनके एक खास सहयोगी एसए अय्यर ने इस बारे में कई बार लिखा भी. इसमें ये बताया गया है कि सुभाष उनसे अक्सर आजादी के बाद एक खास काम करने की इच्छा जाहिर करते थे. वो कहते थे कि खून से सनी दिल्ली जाने वाली सड़क पर वो अपनी क्रांतिकारी सेना का संचालन करेंगे लेकिन जैसे ही उन्हें अपने इस उद्देश्य में सफलता मिल जाएगी, तब वो अपने जीवन के असली ध्येय की ओर मुड जाएंगे.

सुभाष बोस पर लिखी पत्रकार संजय श्रीवास्तव की किताब “सुभाष की अज्ञात यात्रा” में इस बारे में चर्चा की गई है. ये भी बताया गया है कि सुभाष क्यों अक्सर ये बात कहते थे. सुभाष कहते थे,” देश को आजादी मिलते ही वो हिमालय चले जाएंगे, जहां वो ध्यान-भजन करेंगे. यही उनके जीवन का असली ध्येय है.”
दरअसल आध्यात्म सुभाष के जीवन का एक अनिवार्य और गहन तत्व था, जिसने उनके अंदर किशोरवय से ही पैठ जमा ली थी. जब वो किशोर हो रहे थे, तब उनका रुझान आध्यात्म की ओर होने लगा. तब वो बाबा और साधुओं की तलाश में लग गए. इससे उनके व्यक्तित्व में अजीब सा बदलाव आने लगा. उनके घरवालों ने भी इसे महसूस किया.

क्यों एकांत जगह की तलाश करते थे
साधु और महात्माओं की संगत को तलाशने के चलते वो घर से कई कई घंटों के लिए बाहर रहते. आसपास के उन स्थानों में चले जाते, जहां प्रकृति की छटा होती और एकांत होता. ऐसी जगहों पर वो ध्यान साधना करने लगते. घर में रहने पर वो कोई अंधेरा कमरा तलाशते और वहां बैठकर खुद को ध्यान में डूबोने की कोशिश करते.किताब कहती है,” बाद में जब वो जर्मनी और जापान में लंबे समय के लिए रहे तब भी हर हाल में रोज रात में ध्यान साधना जरूर करते थे. वो रोज रात भगवद्गीता पढ़ते थे, इससे उन्हें शांति और शक्ति मिलती थी. हालांकि उनका ज्यादा समय लोगों के बीच बीतता था लेकिन रात में ज्यों एकांत मिलता, वो ध्यान साधना में लीन हो जाते.”

रात का समय उनके आध्यात्मक का समय होता था
जनता के बीच वो मंच पर लंबा भाषण देते थे लेकिन मंच से अलग होते ही एकांत चाहते थे. तब वो कम ही लोगों से बातचीत करते थे. भोजन के बाद वो आमतौर पर विश्राम करते लेकिन अगर उनके पास कोई बुलाया हुआ व्यक्ति आ जाता था तो पूरे घंटे में शायद कुछ ही शब्द बोलते थे. वो उस समय शांति ज्यादा चाहते थे. वो उनका आध्यात्मिक समय होता था.

घंटों ध्यान साधना करते थे
रात में उनका ध्यान लंबा होता था. वो देर रात दो-तीन बजे तक सोते थे लेकिन सबेरे उठने पर चेहरे ताजगी और आभा से भरपूर होता था. सिंगापुर में रहने के दौरान सोने के पहले रामकृष्ण परमहंस आश्रम चले जाते थे. वहां जाकर ध्यान करते थे. उनके रोज के काम और आध्यात्मिक साधना साथ-साथ चलती रहती थी. बर्लिन में जब दूसरे विश्व युद्ध के दिनों में बमबारी की आबाज आती थी, तब वो अपने घर में देर रात तक ध्यान करते रहते थे.

मानते थे तंत्र साधना की ताकत
उनकी जीवन की आदतें आमतौर पर सादगी लिये हुए थीं. वो खुद उसी राशन का भोजन करते थे, जो उनके सैनिक करते थे. वो मां काली के भक्त थे. ये भी कहा जाता है कि वो तंत्र साधना की शक्ति मानते थे. जब वो गांधीजी के विरोध के बाद 1939 में कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए तो कुछ समय बाद रहस्यमय तरीके से बीमार हो गए. तब उनका मानना था कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ तंत्र साधना की थी.

1933 में जब वो एसएस गंगे जहाजे से यूरोप जा रहे थे तो अपने दोस्त दिलीप कुमार रॉय को लिखा, मैं शिव के प्रति ज्यादा भक्तिभाव में रहता हूं. कुछ सालों से मंत्रों की शक्ति को मानने लगा हूं. वाकई मंत्रों में बहुत ताकत होती है. पहले मैं मंत्रों को लेकर सामान्य भाव रखता था. बाद में मैने तंत्र फिलास्फी पढ़ी. कुछ मंत्र तो शक्ति देने के मामले में वाकई अदभुत होते हैं.

Input : News18

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जीएसटी के दायरे में आ सकते हैं प्लंबर और इलेक्ट्रिशन भी

Santosh Chaudhary

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सरकार ऐसे प्लंबर, इलेक्ट्रिशन और ब्यूटीशियन जैसे कामगारों को भी जल्द गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) नेटवर्क के दायरे में लाने पर विचार कर रही है, जो ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स पर लिस्टेड हैं। इसे गिग इकॉनमी वर्कर्स (स्वतंत्र रूप से काम करने वाले कामगार) को फॉर्मल वर्कफोर्स में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री ऐंड इंटर्नल ट्रेड (DPIIT) UrbanClap, HouseJoy और Bro4u जैसे ऑनलाइन मार्केटप्लेस के लिए यह अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है कि वे ऐसे सर्विस प्रफेशनल्स को ही जोड़ सकते हैं जिनके पास जीएसटी नंबर है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने ET को यह जानकारी दी।

अधिकतर को नहीं देना होगा जीएसटी

हालांकि, ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स से जुड़े अधिकतर प्लंबर्स, इलेक्ट्रिशन, फिटनेस ट्रेनर्स की सालाना आमदनी 40 लाख रुपये से कम है और इसलिए उन्हें जीएसटी नहीं चुकाना होगा। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम ऐसे प्रफेशनल्स का डेटाबेस तैयार करने के मकसद से भी उठाया है।


‘अभी सरकार के पास इनका डेटा नहीं’

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कहा, ‘ये प्रफेशनल्स लोगों के घर जाते हैं और उनकी पहचान का हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। हो सकता है कि उन्हें जीएसटी नहीं देना पड़ा और तिमाही फाइलिंग की भी जरूरत ना हो, लेकिन यदि वे नेटवर्क पर रजिस्टर्ड हैं तो हम किसी अप्रिय घटना की स्थिति में खोजकर निकाल सकते हैं।’


कपंनियां रखेंगी पूरा हिसाब

अधिकारी ने यह भी बताया कि इन प्रफेशनल्स को जोड़ने वाली कंपनियों से कहा जाएगा कि वे उनके द्वारा किए गए सभी कामों का हिसाब रखें। UrbanClap ने इस मुद्दे पर अभी कॉमेंट करने से इनकार किया है, क्योंकि सरकार की ओर से आधिकारिक रूप में कुछ नहीं गया गया है। Housejoy और Bro4u के अधिकारियों ने अभी कोई जवाब नहीं दिया है।


‘अभी भी है वॉलेंटरी रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था

एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘हम कई मुद्दों की पड़ताल कर रहे हैं, जैसे उपभोक्ता की सुरक्षा और इन वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा। उन्होंने कहा, ‘आज भी वॉलेंटरी जीएसटी रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है। इसलिए हम उन्हें कोई बड़ी चीज नहीं करने को कह रहे हैं।’

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