अगर उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने अपने शासनकाल भर में तटस्थता, निर्भिकता एवं बड़ी लगन से एक ही मुद्दे को बड़ी संजीदगी से जनता के सामने प्रस्तुत किया है। “लालू यादव ने चारा घोटाला किया और तेजस्वी नौंवी फेल है, और अब आईआईटी जैसी शिक्षा विद्यालयों में दिलानेवाले सुशील मोदी को चरवाहा विद्यालय भी याद आ गई है। उनके इन पहलुओं पर अत्यधिक जोड़ देने से लगता है, जनता ने उन्हें इसलिए बिहार विधानसभा में चुनकर भेजा है।

चुनाव आयोग के आदेशानुसार 29 नवंबर से पहले होगी , तिथि की घोषणा अभी नहीं हुई है। लेकिन राज्य के शीर्ष नेता भाजपा सुप्रीमो सुशील मोदी 15 साल पुरानी सारी समस्याएं आभामंडल से होते हुए टिवटर पर आने लगी है। एक तरफ विपक्ष ने सरकार के 15 सालों के शासन काल पर सवाल पूछ रहा है तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष लालू-राबड़ी शासनकाल को याद दिलाने की कोशिश में है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से आज उनके 15 वर्षों के शासन काल का हिसाब मांगा है।
उपमुख्यमंत्री ने ताबड़तोड़ कई ट्वीट कर लालू पर हमला बोला है। उन्होंने लिखा है-‘सजायाफ्ता लालू प्रसाद यदि कहते हैं किसान लाचार हैं, तो बतायें उनके समय खेती की क्या हालत थी? क्या कोई कृषि रोडमैप बना था? किसानों को बिजली मिलती थी? उपज का समर्थन मूल्य कितना मिलता था?

उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है-‘लालू बतायें कि क्या आज की तरह किसानों के खाते में सालाना 6 हजार रूपये डाले जाते थे? क्या उनके राज में बाढ़ पीड़ितों के खाते में कभी सहायता राशि डाली गई? वे बतायें कि मजदूरों को पलायन के लिए मजबूर किसने किया था? लालू प्रसाद और उनकी पार्टी को बिना तर्क या तथ्य के आरोप लगाने की पुरानी आदत है, इसलिए वे कुछ भी बोलते रहते हैं। वे शिक्षा को बदहाल बताते हैं, तो बतायें कि उनके 15 साल में चरवाहा विद्यालय खुलने के सिवा क्या हुआ?’ जाहिर है बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पंद्रह साल बनाम पंद्रह साल की लड़ाई शुरू हो गयी है।
Team : Satyam
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