शुक्रवारः आज के दिन करें ये काम तो हो जायेंगे मालामाल, मां लक्ष्मी का मिलेगा वरदा
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RELIGION

शुक्रवारः आज के दिन करें ये काम तो हो जायेंगे मालामाल, मां लक्ष्मी का मिलेगा वरदा

Santosh Chaudhary

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सनातन हिन्दू धर्म में शुक्रवार का दिन लक्ष्मी और वैभव-विलास का दिन माना जाता है। आज के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कुछ टोने-टोटके भी किए जाते हैं। आज हम आपको कुछ टोटकों के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे बहुत सारा धन आपके पास आ सकता है। आइए जानते हैं।

* कहते हैं घर में किसी भी समय लक्ष्मी जी आ सकती है लेकिन शाम का समय ऐसा होता है, जिस समय लक्ष्मी जी का आना संभव होता है इसलिए शाम के समय सारे घर की लाइट जला कर पूरे घर में रोशनी कर देना चाहिए।

*  कहा जाता है मां लक्ष्मी के समक्ष मोगरे का इत्र अर्पित करना चाहिए और रति और कामसुख के लिए गुलाब का इत्र चढ़ाना चाहिए। इसी के साथ देवी लक्ष्मी के सामने केवड़े का इत्र अर्पित करने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

* कहा जाता है शुक्रवार के दिन सुबह के समय गो-माता को ताज़ी रोटी खिलाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होगी और आप पर सदेव अपनी कृपा बनाये रखेंगी।

* कहते हैं घर में स्वच्छता का जरुर ध्यान दे क्योंकि इससे माता लक्ष्मी जरुर प्रसन्न होती है और साथ ही कभी शाम के समय घर में झाडू न लगाए इससे घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है।

* कहा जाता है शुक्रवार के दिन उस जगह जाए जहां मोर नृत्य करते है और उसके बाद वहां की मिट्टी लाकर एक लाल रंग के कपड़े में बांधकर पवित्र जगह में रख दें और उसकी रोज पूजा करें धनलाभ होगा।

इसके अलावा और क्या करें-

* घर में तुलसी का पौधा लगाएं और उसकी पूजा करें।

* श्वेत चंदन का तिलक करें।

* पानी में चंदन मिलाकर स्नान करें।

* चांदी का टुकड़ा या चंदन की लकड़ी नदी या नहर में प्रवाहित करें।

* सुगंधित पदार्थ का इस्तेमाल करें।

* संतान प्राप्ति के चाहवान दंपति हरसिंगार का पौधा घर में लगाएं तथा उसको ऐसे सींचे, जैसे अपने छोटे बच्चे की देखभाल करते हैं(मुजफ्फरपुर नाउ  किसी भी टोने-टोटके या अंध विश्वास को प्रोत्साहित नहीं करता है)

BIHAR

बिहार से दक्षिण भारत तक, ऐसे मंदिर जिनका इतिहास है हजारों साल पुराना, कोई 1900 तो कोई 3500 साल पुराना है

Santosh Chaudhary

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हिंदू देवी-देवताओं के मंदिर प्राचीनता और मान्यताओं के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। कई मंदिर ऐसे हैं, जिनका इतिहार हजारों साल पुराना है, साथ ही कुछ मंदिरों के महत्व के बारे में धर्म-ग्रंथों में भी वर्णन मिलता है। ऐसे ही 5 सबसे प्राचीन मंदिरों जो न सिर्फ प्राचीन हैं बल्कि बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी भी हैं।

  1. मीनाक्षी मंदिर (तमिलनाडु)

तमिलनाडु में मदुरई शहर में स्थित मीनाक्षी मंदिर भगवान शिव व मीनाक्षी देवी पार्वती का है। मीनाक्षी मंदिर पार्वती के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। मंदिर का मुख्य गर्भगृह 3500 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है।

  1. श्री जगन्नाथ मंदिर(उड़ीसा)

पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर एक हिन्दू मंदिर है, जो भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) का है। इस मंदिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है। यह मंदिर हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की उम्र भी 1 हजार साल से ज्यादा पुरानी मानी जाती है।

  1. पद्मनाभ स्वामी मंदिर (केरला)

पद्मनाभ स्वामी मंदिर की कुल संपत्ति एक लाख करोड़ रुपए की है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है। इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। यहां पर भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को पद्मनाभ कहा जाता है और इस रूप में विराजित भगवान पद्मनाभ स्वामी के नाम से विख्यात हैं।

  1. गुरुवयुर मंदिर (केरला)

गुरुवयुर श्री कृष्ण मंदिर गुरुवयुर केरला में है। यह मंदिर विष्णु भगवान का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर लगभग 5000 साल पुराना है। गुरुवयुर मंदिर वैष्णवों की आस्था का केंद्र है। अपने खजाने के कारण यह मंदिर भी भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। यहां हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

  1. मुंडेश्वरी मंदिर (बिहार)

बिहार का मुंडेश्वरी मंदिर भारत के प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को लगभग 1700 साल पुराना माना जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की भी पूजा की जाती है। अपनी प्राचीनता और पौराणिक महत्वों के लिए यह मंदिर भारत के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है।

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INDIA

कामाख्या मंदिर का यह गुप्त रहस्य जानकार होश उड़ जायेंगे आपके, दुनिया से छुपा था अब तक

Santosh Chaudhary

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51 शक्तिपीठों में से एक कामाख्या शक्तिपीठ बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है। कामाख्या देवी का मंदिर अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। असम की राजधानी दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर है। कामाख्या मंदिर सभी शक्तिपीठों का महापीठ माना जाता है। इस मंदिर में देवी दुर्गा या मां अम्बे की कोई मूर्ति या चित्र आपको दिखाई नहीं देगा। वल्कि मंदिर में एक कुंड बना है जो की हमेशा फूलों से ढ़का रहता है। इस कुंड से हमेशा ही जल निकलता रहतै है। चमत्कारों से भरे इस मंदिर में देवी की योनि की पूजा की जाती है और योनी भाग के यहां होने से माता यहां रजस्वला भी होती हैं। मंदिर से कई अन्य रौचक बातें जुड़ी है, आइए जनते हैं …

kamakhya

मंदिर धर्म पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस शक्तिपीठ का नाम कामाख्या इसलिए पड़ा क्योंकि इस जगह भगवान शिव का मां सती के प्रति मोह भंग करने के लिए विष्णु भगवान ने अपने चक्र से माता सती के 51 भाग किए थे जहां पर यह भाग गिरे वहां पर माता का एक शक्तिपीठ बन गया और इस जगह माता की योनी गिरी थी, जोकी आज बहुत ही शक्तिशाली पीठ है। यहां वैसे तो सालभर ही भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बुवासी और मनासा पूजा पर इस मंदिर का अलग ही महत्व है जिसके कारण इन दिनों में लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुचतें है।

Source : NorthEast Travelers

यहां लगता है अम्बुवाची मेला

हर साल यहां अम्बुबाची मेला के दौरान पास में स्थित ब्रह्मपुत्र का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है। पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है। फिर तीन दिन बाद दर्शन के लिए यहां भक्तों की भीड़ मंदिर में उमड़ पड़ती है। आपको बता दें की मंदिर में भक्तों को बहुत ही अजीबो गरीब प्रसाद दिया जाता है। दूसरे शक्तिपीठों की अपेक्षा कामाख्या देवी मंदिर में प्रसाद के रूप में लाल रंग का गीला कपड़ा दिया जाता है। कहा जाता है कि जब मां को तीन दिन का रजस्वला होता है, तो सफेद रंग का कपडा मंदिर के अंदर बिछा दिया जाता है। तीन दिन बाद जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं, तब वह वस्त्र माता के रज से लाल रंग से भीगा होता है। इस कपड़ें को अम्बुवाची वस्त्र कहते है। इसे ही भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

Source : Adib Zamali

1. मनोकामना पूरी करने के लिए यहां कन्या पूजन व भंडारा कराया जाता है। इसके साथ ही यहां पर पशुओं की बलि दी जाती ही हैं। लेकिन यहां मादा जानवरों की बलि नहीं दी जाती है।

2. काली और त्रिपुर सुंदरी देवी के बाद कामाख्या माता तांत्रिकों की सबसे महत्वपूर्ण देवी है। कामाख्या देवी की पूजा भगवान शिव के नववधू के रूप में की जाती है, जो कि मुक्ति को स्वीकार करती है और सभी इच्छाएं पूर्ण करती है।

Source : Adib Zamali

3.मंदिर परिसर में जो भी भक्त अपनी मुराद लेकर आता है उसकी हर मुराद पूरी होती है। इस मंदिर के साथ लगे एक मंदिर में आपको मां का मूर्ति विराजित मिलेगी। जिसे कामादेव मंदिर कहा जाता है।

4. माना जाता है कि यहां के तांत्रिक बुरी शक्तियों को दूर करने में भी समर्थ होते हैं। हालांकि वह अपनी शक्तियों का इस्तेमाल काफी सोच-विचार कर करते हैं। कामाख्या के तांत्रिक और साधू चमत्कार करने में सक्षम होते हैं। कई लोग विवाह, बच्चे, धन और दूसरी इच्छाओं की पूर्ति के लिए कामाख्या की तीर्थयात्रा पर जाते हैं।

5. कामाख्या मंदिर तीन हिस्सों में बना हुआ है। पहला हिस्सा सबसे बड़ा है इसमें हर व्यक्ति को नहीं जाने दिया जाता, वहीं दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं जहां एक पत्थर से हर वक्त पानी निकलता रहता है। माना जाता है कि महीनें के तीन दिन माता को रजस्वला होता है। इन तीन दिनो तक मंदिर के पट बंद रहते है। तीन दिन बाद दुबारा बड़े ही धूमधाम से मंदिर के पट खोले जाते है।

6. इस जगह को तंत्र साधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण जगह मानी जाती है। यहां पर साधु और अघोरियों का तांता लगा रहता है। यहां पर अधिक मात्रा में काला जादू भी किया जाता ह। अगर कोई व्यक्ति काला जादू से ग्रसित है तो वह यहां आकर इस समस्या से निजात पा सकता है।

Input : Patrika

 

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RELIGION

शनिदेव को पसंद हैं ये 5 चीजें, भेंट करने से बदल जाएगा भाग्य

Santosh Chaudhary

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शनि की पीड़ा समाप्त करने के लिए लोहे का छल्ला धारण किया जाता है. यह छल्ला अगर घोड़े की नाल या नाव की कील से बना हो तो ज्यादा लाभकारी होता है. इस छल्ले को धारण करने के लिए जो अंगूठी बनाई जाती है, उसको आग में नहीं तपाया जाता. आइए जानते हैं शनिदेव की 5 सबसे प्रिय चीजें.

लोहे का छल्ला

शनिवार को इसको सरसों के तेल में थोड़ी देर रख दें, फिर जल से धोकर दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण करें. अगर आप को शनि के कारण शारीरिक पीड़ा है या दुर्घटनाओं के योग हैं तो इसको धारण करना बेहद शुभ होगा.

सरसों का तेल

– शनि के लिए सरसों के तेल का दान करना और प्रयोग करना काफी अनुकूल परिणाम देता है

– अगर शनि के कारण चीज़ें रुक गयीं हों और जीवन में कोई सफलता नहीं मिल पा रही हो तो सरसों के तेल का विशेष प्रयोग करें

– शनिवार को प्रातः लोहे के पात्र में सरसों का तेल ले लें , उसमे एक रूपये का सिक्का डालें

– तेल में अपना चेहरा देखकर किसी निर्धन व्यक्ति को दान कर दें या पीपल के नीचे रख आएँ

– शनि की कृपा पाने के लिए शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक भी जलाना चाहिए

काली उरद की दाल और काला तिल

– शनि के कारण धन की समस्याओं में काली उरद की दाल या काले तिल का प्रयोग करें

– शनिवार को सायं काल सवा किलो काली उरद की दाल या काला तिल किसी निर्धन व्यक्ति को दान करें

– कम से कम पांच शनिवार ये दान करें

– दान करने के साथ ही साथ आपकी आर्थिक समस्याएँ समाप्त हो जायेंगी

– जिस शनिवार को काली दाल या या काला तिल दान करें उस दिन स्वयं इसे न खाएं

लोहे के बर्तन जैसा तवा, कराही, चिमटा

– शनि के लिए जो तमाम दान किये जाते हैं उनमे खाना बनाने के लोहे के बर्तन विशेष महत्व रखते हैं

– शनि अगर दुर्घटनाकारक हो तो खाना बनाने के लोहे के बर्तनों का दान करना चाहिए

– शनिवार को शाम को किसी निर्धन व्यक्ति को तवा , कराही या लोहे के बर्तन दान करने से दुर्घटना के योग टल जाते हैं

काले कपडे, और काले जूते

– अगर स्वास्थ्य की गंभीर समस्या हो और बीमारी नहीं जा रही हो तो पहनने की काली चीजें दान करनी चाहिए

– शनिवार को शाम को किसी निर्धन व्यक्ति को काले कपडे और काले जूतों का दान करें

– दान करने के बाद उस निर्धन व्यक्ति से आशीर्वाद लें , आपका स्वास्थ्य धीरे धीरे ठीक होने लगेगा

घोड़े की नाल

– घोड़े की नाल का शनि के लिए अत्यंत महत्व होता है

– परन्तु ध्यान रक्खें कि उसी घोड़े की नाल का शनि के लिए प्रयोग करें जो घोड़े के पैर में पहले लगी रही हो

– एकदम नयी खरीदी गई, बिना इस्तेमाल की गई नाल कोई प्रभाव पैदा नहीं करती

– शुक्रवार को घोड़े की नाल ले आएँ , सरसों के तेल से धोकर शुद्ध कर लें

– शनिवार को शाम को घर के मुख्य द्वार पर “यू” के आकार की तरह लगा दें

– ऐसा करने से घर के सभी लोगों पर शनि की कृपा रहेगी, और घर में कलह क्लेश नहीं रहेगा.

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