बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को राजधानी पटना में जल जीवन हरियाली कार्यक्रम के दौरान अपने लिए रखी वीआईपी कुर्सी छोड़ दी। सीएम ने अपने लिए सबसे छोटी कुर्सी मंगाई। उनके इस अंदाज से कार्यक्रम में मौजूद दोनों डिप्टी सीएम और बड़े-बड़े सरकारी अफसर दंग रह गए। माना जा रहा है कि अरुणाचल में छह जेडीयू विधायकों के बीजेपी में शामिल होने के बाद बिहार में उनको लेकर विपक्ष द्वारा लगाई जा रही अटकलों के बीच नीतीश इशारों ही इशारों में संदेश दे रहे हैं।

मंगलवार को पटना में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन सीएम नीतीश ने किया। कार्यक्रम में वह अचानक अपनी कुर्सी छोड़कर उठ गए। यह कुर्सी मंच पर लगाई गई कुर्सियों में सबसे बड़ी और ऊंची थी। इसके बाद सीएम ने अपने लिए सबसे छोटी कुर्सी मंगाई और उस पर बैठे। सीएम के सबसे छोटी कुर्सी पर बैठने की वजह से उनके आसपास बैठे नेता और अधिकारी भी खुद को असहज स्थिति में पा रहे थे। गौरतलब है कि कोरोना काल में यह पहला मौका था जब जल, जीवन, हरियाली के तहत सीएम नीतीश अधिवेशन भवन में किसी बड़े सरकारी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में डिप्टी सीएम तार किशोर प्रसाद, रेणु देवी, ग्रामीण विकास मंत्री विजय चौधरी सहित विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव मौजूद थे।

सरकार गठन के पहले से ही विपक्ष उठा रहा सवाल
बिहार में भाजपा से काफी कम सीटें होने के बावजूद नीतीश कुमार के सीएम बनने को लेकर विपक्ष सरकार गठन के पहले से ही सवाल उठा रहा है। यहां तक कि भाजपा के अंदर से भी कई नेताओं ने इसे लेकर सवाल खड़े किए। जेडीयू संख्या बल के हिसाब से बिहार में तीसरे नंबर की पार्टी है। उधर, सीएम नीतीश लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि वो कभी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठना चाहते थे। पिछले दिनों उन्होंने यह कहकर सबको चौंका दिया था कि मुझे कुर्सी से प्यार नहीं, काम करना चाहता हूं। इस बीच मंगलवार को सार्वजनिक कार्यक्रम में वीआईपी कुर्सी छोड़ने के नीतीश के कदम को भी उनके इसी संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है।
Source : Hindustan



