साक्षी मिश्रा ने बनाया नया इंस्टा अकाउंट, खुद को बताया अभि की टाइग्रेस, भाई के लिए रक्षाबंधन की पोस्ट
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साक्षी मिश्रा ने बनाया नया इंस्टा अकाउंट, खुद को बताया अभि की टाइग्रेस, भाई के लिए रक्षाबंधन की पोस्ट

Santosh Chaudhary

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साक्षी ने सोशल मीडिया पर अपना नया प्रोफाइल बना लिया है और उसमें उन्होंने खुद को अभि की टाइग्रेस के तौर पर दिखाया है. हालांकि वे अभी भी फेसबुक और इंस्टग्राम पर अपने परिवार की पुरानी फोटो ही पोस्ट कर रही हैं.

एक बार फिर साक्षी मिश्रा चर्चा में हैं. अब वे एक बार फिर सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एक्टिव हो गई हैं, लेकिन अब प्रोफाइल नया है. अपने विधायक पिता राजेश मिश्रा को आदर्श बताने वाली साक्षी मिश्रा ने अब अपने तेवर बदल लिए हैं. वो अब अपने पति अभि (अजितेश) की टाइग्रेस हो गई हैं. यह खबर खुद ही साक्षी ने अपने नए फेसबुक और इंस्टग्राम अकाउंट के जरिए दी है. साक्षी मिश्रा ने सोशल मीडिया पर अपना नया प्रोफाइल बनाया है और उसमें उन्होंने खुद को अभि की टाइग्रेस के तौर पर दिखाया है. हालांकि वो अभी भी फेसबुक और इंस्टग्राम पर अपने परिवार की पुरानी फोटो ही पोस्ट कर रही हैं.

साक्षी ने इंस्टग्राम पर अपना यह नया अकाउंट ‘सीनूअभि’ के नाम से बनाया है. वहीं फेसबुक पर बनाए अपने अकाउंट में उन्होंने खुद को मनमर्जी की क्वीन और पप्पू भरतौल की बेटी बताया है.

सबसे ज्यादा प्यार भाई करते हैं
लाइव हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार साक्षी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर मंगलवार को रक्षाबंधन से जुड़ा एक पोस्ट किया. इसमें उन्होंने लिखा, ‘भाई कभी आई लव यू नहीं कहते, कभी प्यार से बात भी नहीं करते लेकिन सच यह है कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार सिर्फ भाई ही करते हैं.’ इसके साथ ही साक्षी ने अपने परिवार के साथ कुछ पुराने फोटो भी पोस्ट किए और सभी पर इमोशनल मैसेज लिखे.

साक्षी के परिवार को पता था

वहीं साक्षी के पति अजितेश ने बताया कि विधायक राजेश मिश्रा के परिवार को पता था कि उनके और साक्षी के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा है. अजितेश ने सवाल किया कि यदि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं थी तो उन्होंने साक्षी पर पाबंदियां क्यों लगाईं. इस बात का जवाब तो आमने-सामने बैठकर ही देना पड़ेगा. अजितेश ने दावा किया कि मिश्रा फैमिली और उनके परिवार को इस बारे में पहले से ही पूरी जानकारी थी. साथ ही अजितेश ने दोनों की उम्र को लेकर चल रही चर्चा के बारे में कहा कि हम दोनों की उम्र में 5 से 6 साल का अंतर है.

क्या था पूरा मामला

बरेली से बीजेपी के विधायक राजेश मिश्रा की बेटी साक्षी बीते 3 जुलाई को अपने घर से अचानक चली गईं थी. इसके बाद उन्होंने अजितेश से शादी कर ली थी. 10 जुलाई को दोनों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी जान को खतरा बताया था. इसके अगले दिन यानी 11 जुलाई को साक्षी ने एक और वीडियो जारी कर अपने पिता राजेश मिश्रा, भाई विक्की भरतौल और पिता के करीबी राजीव राणा से जान का खतरा बताया था. यह दोनों वीडियो वायरल हो गए थे और मामले ने काफी तूल पकड़ ली थी.

Input : News18

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मोदी सरकार का ऐलान- कैंप लगाकर 200 जिलों में बांटे जाएंगे लोन, गवाह बनेंगे सांसद

Santosh Chaudhary

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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि 31 मार्च 2020 तक संकटग्रस्त किसी भी एमएसएमई को एनपीए घोषित नहीं किया जाएगा. उन्होंने बैंकों के साथ नकदी की स्थिति की समीक्षा की.

NBFC की स्थिति में सुधार

प्रेस कॉन्फेंस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की पहचान की गई है, जिन्हें बैंक कर्ज दे सकते हैं. बैंक लेंडिंग के लिए नए ग्राहक जोड़े जाएंगे. वित्त मंत्री की मानें तो NBFC की स्थिति सुधर रही है.

200 जिलों में लगेंगे कैंप

वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक कर्ज देने के इरादे से 3 से 7 अक्टूबर के बीच 200 जिलों में एनबीएफसी और खुदरा कर्जदारों के लिए कैंप लगाएंगे. सरकार ने इस मुहिम को बैंक लोन मेला नाम दिया है. वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि 11 अक्टूबर के बाद भी लोन मेले का आयोजन किया जाएगा.

सबसे खास बात यह है कि जिन जिलों में इस लोन मेले का आयोजन किय़ा जाएगा, वहां के सांसद भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए इस मुहिम में हिस्सा लेंगे. इसके अलावा बैंकों के विलय के सवाल पर सीतारमण ने कहा कि नियम के मुताबिक काम तेजी चल रहा है और बैंक रिफॉर्म्स के बेहतर परिणाम आएंगे.

गौरतलब है कि मंदी की आहट के बीच मोदी सरकार की ओर से लगातार बड़ी घोषणाएं की जा रही हैं. खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को दूर करने के लिए कई बड़ी घोषणाएं कर चुकी हैं.

अर्थव्यवस्था में सुधार की लगातार कोशिश

इससे पहले शनिवार को वित्त मंत्री ने 60 फीसदी तक पूरे हो चुके निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं का काम पूरा करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की विशेष सुविधा देने की घोषणा की थी. साथ ही इतनी ही राशि निजी क्षेत्र से जुटाई जाएगी, इसकी भी जानकारी दी थी.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि सरकार अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को दूर करने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. सरकार इस बात को लेकर गंभीर है कि आने वाले दिनों में अगर और जरूरत पड़ी तो घोषणाएं की जाएंगी.

Input : Aaj Tak

 

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ये हैं 5 प्राचीन और प्रभावशाली मंद‍िर

Santosh Chaudhary

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वाराणसी- दुर्गा मंद‍िर
प्राचीन मंद‍िरों में एक वाराणसी शहर के रामनगर इलाके में एक दुर्गा मंद‍िर है। यह मंदिर, भारतीय वास्‍तुकला की उत्‍तर भारतीय शैली की नागारा शैली को दर्शाता है। 18 वीं सदी में बने इस मंद‍िर में वर्गाकार आकृति का एक जल से भरा दुर्गा कुंड हैं। यहां बड़ी संख्‍या में भक्‍तों का आना जाना है। मान्‍यता है क‍ि यह मूर्ति स्‍वयं प्रकट हुई थी।

तमिलनाडु- बृहदेश्‍वर मंद‍िर 

तमिलनाडु के तंजौर का बृहदेश्‍वर मंदिर दुनि‍या का पहला व एकमात्र ग्रेनाइड मंद‍िर माना जाता है। यूनेस्‍को की धरोहर में शामि‍ल इस मंदिर के शिखर ग्रेनाइट के 80 टन के टुकड़े से बने हैं। इसका निर्माण करीब 1003-1010 ई. के बीच चोल शासक राजाराज चोल प्रथम द्वारा 5 सालों में कराया गया था। यह बेहद भव्‍य व आकर्षक है।

ब‍िहार- मुंडेश्वरी मंद‍िर 

ब‍िहार का मुंडेश्वरी देवी का मंदिर भी प्राचीन है। इसकी स्थापना 108 ईस्वी में हुविश्‍क के शासनकाल में हुई थी। यह बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर अंचल में पवरा पहाड़ी पर 608 फीट की ऊंचाई पर बना है। यहां भगवान शिव और पार्वती की पूजा होती है। प्रमाणों के आधार पर यह मंद‍िर भी देश के प्राचीन मंदिरों में शामि‍ल है।

आन्ध्र प्रदेश- वेंकटेश्वर मंद‍िर 

आन्ध्र प्रदेश के तिरुपति शहर में स्थित विष्‍णु मंदिर वेंकटेश्वर का निर्माण 10वीं शताब्‍दी में हुआ था। यह भी विश्‍व का सबसे बड़ा और प्राची धार्मिक स्थल माना जाता है। यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला और शिल्प कला का अद्भुत उदाहरण हैं। कहते हैं इस मंदिर की परछाईं नहीं नजर नहीं आती। यहां भी बड़ीं संख्‍या में भक्‍त आते हैं।

उड़ीसा- लिंगराज मंदिर

उड़ीसा के भुवनेश्‍वर में स्‍थित लिंगराज मंदिर भी बहुत पुराना है। भगवान शिव को समर्पित इस मंद‍िर में शालिग्राम के रूप में भगवान विष्‍णु भी यहां मौजूद हैं। 11वीं शताब्‍दी के करीब बने इस मंद‍िर की वास्‍तुकला ब‍िल्‍कुल अलग द‍िखती है। खास‍ियत यह है क‍ि बाहर से मंदिर चारों ओर से फूलों के मोटे गजरे पहना हुआ सा दिखाई देता है।

 

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Fast Food जेनेटिक बीमारियों को दे रहे बढ़ावा, Indian Food दाल-चावल है सबसे बेस्ट

Santosh Chaudhary

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भारतीय संस्कृति में खान-पान को विशेष महत्व दिया गया है। हमारे यहां भोजन को अन्न देवता जैसा सम्मान दिया जाता है। शोधकर्ताओं ने अब इसका वैज्ञानिक आधार खोज निकाला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भारतीय भोजनों मे ऐसे कई गुण छिपे हैं, जो अनुवांशिक बीमारियों को भी मात दे सकते हैं। शोध में पश्चिमी देशों के प्रचलित फास्ड फूड से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर के बारे में भी विस्तार से बताया गया है।

जर्मनी की ल्यूबेक यूनिवर्सिटी में हुए शोध में पता चला है कि दाल-चावल जैसे साधारण भारतीय भोजन गुणों का भंडार हैं। इन भारतीय भोजनों में कई बड़ी बीमारियों से लड़ने की क्षमता है। इतना ही नहीं, ये भारतीय भोजन अनुवांशिक बीमारियों से लड़ने में बहुत कारगर हैं। गंभीर बीमारियों पर पड़ने वाले भारतीय भोजनों के असर को लेकर किया गया इस तरह का ये पहला शोध है।

गंभीर बीमारियों के DNA ही जिम्मेदार नहीं

शोधकर्ताओं के अनुसार गंभीर या अनुवांशिक बीमारियों के लिए केवल डीएनए की गड़बड़ी ही जिम्मेदार नहीं है। हमारी भोजन शैली भी इसमें काफी अहम रोल रखती है। इसकी वजह से बीमारियां पैदा हो सकती हैं और उन पर लगाम भी लगाया जा सकता है। ल्यूबेक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रॉल्फ लुडविज के नेतृत्व में तीन वैज्ञानिकों द्वारा किया गया ये शोध नेचर मैग्जीन के ताजा अध्ययन में प्रकाशित हुआ। भारतीय भोजन पर शोध करने वाले रिसर्चर्स के दल में रूस के डॉ अर्तेम वोरोवयेव, इजरायल के डॉ यास्का शेजिन और भारत की डॉ तान्या गुप्ता शामिल थे।

रोगों से लड़ते हैं भारतीय भोजन

भारतीय भोजन और पश्चिमी भोजनों पर दो साल तक किए गए शोध में पता चला है कि फास्ड फूड के उच्च कैलोरी आहार अनुवांशिक बीमारियों को बढ़ावा देते हैं। इसके विपरीत भारतीय भोजन में कैलोरी बहुत कम होती है (लो कैलोरी), जो रोगों से लड़ने में अहम भूमिका अदा करते हैं। नेचर मैग्जीन में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि अभी तक तमाम अनुवांशिक रोगों के पीछे केवल डीएनए को ही जिम्मेदार माना जाता था, जो हमें हमारे पूर्वजों और माता-पिता से मिलता है। इस शोध में इन बीमारियों को उन भोजन पर केंद्रित किया गया, जो रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होते हैं।

दो साल तक चूहों पर हुआ शोध

दो साल तक चूहों पर शोध करने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं। ये शोध एक खास किस्म के चूहों पर किया गया, जो ल्यूपस नामक रोग से ग्रसित थे। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि ल्यूपस रोग का सीधा संबंध डीएनए से है। ल्यूपस, ऑटोइम्यून (प्रतिरोधक क्षमता) को प्रभावित करने वाले रोग की श्रेणी में आता है। इसमें शरीर का प्रतिरोधक तंत्र अपने ही अंगों पर हमला करने लगता है। नतीजतन शरीर के विभिन्न अंग जैसे जोड़, किड़नी, दिल, फेफड़े, ब्रेन और रक्त नमूने नष्ट हो जाते हैं। साथ ही शरीर की विभिन्न प्रणालियां काम करना बंद कर देती हैं।

चूहों पर हुए शोध के नतीजे

शोधकर्ताओं ने चूहों को दो समूह में बांटा गया था। इनमें से एक समूह को पश्चिमी देशों में प्रयोग किया जाने वाला ज्यादा सूक्रोज युक्त आहार दिया गया। चूहों के दूसरे ग्रुप को भारत में प्रयोग किया जाने वाला लो कैलोरी भोजन दिया गाय। ज्यादा सूक्रोज वाला भोजन खाने वाले चूहे ल्यूपस रोग की चपेट में आ गए और उनकी हालत बिगड़ गई। वहीं भारतीय भोजन खाने वाले चूहे ल्यूपस रोग की चपेट में आने से बच गए।

Fast Food vs Indian Food

शोधकर्ता वैज्ञानिकों के अनुसार अध्ययन के नतीजों से साबित होता है कि पश्चिम देशों में आहार के तौर पर प्रयोग किए जाने वाले फास्ट फूड जैसे पिज्जा, बर्गर आदि अनुवांशिक रोगों को बढावा देते हैं। इसके विपरीत भारत के शाकाहारी भोजन में शामिल स्टार्च, सोयाबीन तेल, दाल, चावल, सब्जी आदि का इस्तेमाल शरीर को रोगों से लड़ने में मदद करता है। इसमें भी भारतीय भोजन में प्रयोग होने वाली हल्दी का महत्वपूर्ण योगदान होता है, जो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कई तरह की बीमारियों से शरीर की रक्षा करती है।

Input : Dainik Jagran

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