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सुशांत के दोस्त संदीप ने अंकिता लोखंडे पर लिखी लंबी पोस्ट, कहा- तुम उसे बचा सकती थी!

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मुंबई. लंबे समय तक सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के सबसे अच्छे दोस्तों में शामिल रहे संदीप सिंह ने सुशांत की एक्स गर्लफ्रेंड अंकिता लोखंडे (Ankita Lokhande) को लेकर एक लंबी इंस्टाग्राम पोस्ट लिखी है. इसमें उन्होंने अपने जज्बात उंडेल दिए हैं. उन्होंने अंकिता लोखंडे और सुशांत सिंह राजपूत और अपने बीच के रिश्ते के कई लम्हों को उजागर किया है. अंकिता को संबोधित करते हुए लिखे गए इस लेख में उन्होंने सुशांत के लिए अंकिता के क्या मायने थे ये भी बताएं हैं. उन्होंने अपनी पोस्ट में सुशांत अंकिता और अपनी होली खेलते हुए तस्वीर भी शेयर की है.

सुशांत के दोस्त संदीप ने अंकिता ...

संदीप ने लिखा, ‘प्रिय अंकिता, हर बीतते हुए दिन के साथ मेरे मन में ये बात बार-बार आ रही है कि काश हमने और ज्यादा कठिन प्रयास किया होता और उसे रोक लेते. उससे भीख मांग लेते. यहां तक कि जब तुम उससे अलग हुई तब भी तुम उसकी सफलता के लिए प्रार्थना कर रही थी. तुम्हारा प्यार सच्चा था. ये बहुत ही खास था. तुमने अब तक सुशांत का नाम अपने घर के नेमप्लेट से नहीं हटाया है. मैं वो सारे दिन बहुत याद कर रहा हूं, जब हम लोखंडवाला में परिवार की तरह रहे थे. हमने साथ में बहुत से ऐसे लम्हें जिए हैं, जिनको याद कर आज मेरा दिल रो रहा है. साथ में खाना बनाना, साथ में खाना, मटन भात, हमारी लॉन्ग ड्राइव, कभी लोखंडवाला तो कभी गोवा जाना. हमारा होली मनाना. वो हंसी, वो जिंदगी के कमजोर लम्हें, जब हम सब एक साथ थे तब तुम हम सबमें सबसे ज्यादा सक्रिय थी.”

Sushant Singh Rajput close friend Sandip Singh shared Emotional ...

उन्होंने आगे लिखा, “वो तुम्हीं थी जो सुशांत के चेहरे पर हंसी ला सकती थी. यहां तक कि आज भी मुझे यही लगता है कि वो तुम्हीं दोनों थे जो एक-दूसरे के लिए बने थे. तुम दोनों सच्चे प्यार की मिसाल थे. ये विचार ये यादें मेरे दिल को दुखा रही हैं. मैं उसे कैसे वापस ला सकता हूं. मैं उसे वापस लाना चाहता हूं. मैं हम तीनों को वापस लाना चाहता हूं. वो मालपुआ याद है? और वो कैसे छोटे बच्चे की तरह मेरी मां के हाथ का मटन करी मांगता था. मुझे पता है वो केवल तुम थी जो उसे बचा सकती थी.”

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Dear Ankita, with each passing day, one thought keeps haunting me over and over again. Kaash… I wish… We could have tried even harder, we could've stopped him, we could've begged him! Even when you both seperated, you only prayed for his happiness and success… Your love was pure. It was special. You still haven't removed his name from the nameplate of your house❤️ I miss those days, when the three of us stayed together in lokhandwala as a family, we shared so many moments which bring tears to my heart today…cooking together, eating together, ac ka paani girna, our special Mutton bhaat, our long drives to uttan, lonavala or Goa! Our crazy holi! Those laughs we shared, those sensitive low phases of life when we were there for each other, you more than anyone. The things you did to bring a smile on Sushant's face. Even today, I believe that only you two were made for each other. You both are true love. These thoughts, these memories are hurting my heart…how do I get them back! I want them back! I want 'us three' back! Remember the Malpua!? And how he asked for my mother's Mutton curry like a little kid! I know that only you could've saved him. I wish you both got married as we dreamt. You could've saved him if he just let you be there…You were his girlfriend, his wife, his mother, his best friend forever. I love you Ankita. I hope I never lose a friend like you. I won't be able to take it.

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संदीप ने आगे लिखा, ‘मैं चाहता था कि तुम दोनों की शादी हो. जैसा कि हम सपने देखा करते थे. तुम उसे बचा सकती थी, अगर उसने तुम्हें यहां रहने दिया होता. तुम उसकी गर्लफ्रेंड थी, तुम उसकी पत्नी थी, तुम उसकी मां थी, तुम उसकी बेस्ट फ्रेंड थी. आय लव यू अंकिता. मुझे उम्मीद है मैं कभी तुम्हारे जैसा दोस्त नहीं खोऊंगा. मैं ये बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हूं.’

Input : News18

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तृणमूल में लगातार तेज हो रहे बगावती स्वर, प्रशांत किशोर के खिलाफ नाराजगी

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बंगाल में कुछ माह बाद ही विधानसभा चुनाव होना है, लेकिन तृणमूल के भीतर बगावती स्वर तेज होता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में जिस तरह से एक बाद एक विधायक व मंत्री अपनी नाराजगी जता रहे हैं यह शुभ संकेत नहीं है। तृणमूल के वरिष्ठ नेता और मंत्री धीरे-धीरे बगावत पर उतर रहे हैं, लेकिन ममता के लिए सबसे तगड़ा झटका उनके भरोसेमंद और आंदोलन के दिनों के सहयोगी शुभेंदु अधिकारी का इस्तीफा है। सिर्फ अधिकारी ही नहीं उनके अलावे कई और ऐसे नेता व विधायक हैं जो चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) के पार्टी के भीतर हस्तक्षेप को लेकर मुखर हो रहे हैं। यही नहीं सत्तारूढ़ दल में मची उठापटक के पीछे सिर्फ पीके ही नहीं बल्कि तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी को वजह माना जा रहा है।

पीके के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं तृणमूल के कई नेता

तृणमूल के कई नेता पीके के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं। बता दें कि दिल्ली विधानसभा और आंध्र प्रदेश समेत कई चुनाव में जीत के पीछे अहम भूमिका निभाने वाले पीके को ममता व अभिषेक ने पिछले साल ही बंगाल चुनाव में तृणमूल का कामकाज देखने के लिए हायर किया है। प्रशांत किशोर की एजेंसी आई-पैक पिछले वर्ष जुलाई से तृणमूल के लिए काम कर रही है लेकिन अब जो खबरें आ रही हैं उससे पीके ममता की उम्मीदों को ठेस पहुंचने की आशंका है। क्योंकि, पीके की रणनीति के तहत इस वर्ष जुलाई में ममता ने संगठन में भारी फेरबदल किया था। इसके बाद से ही नाराजगी बढ़ती जा रही है।

कई विधायक जता चुके हैं अपनी नाराजगी

पिछले दिनों मुर्शिदाबाद से तृणमूल विधायक नियामत शेख ने एक जनसभा में प्रशांत किशोर का खुलेआम विरोध करते हुए कहा था, क्या हमें उनसे (पीके) राजनीति समझने की जरूरत है? कौन है वह? अगर बंगाल में तृणमूल को नुकसान पहुंचा तो पीके उसकी वजह होंगे। यही नहीं कूचबिहार से तृणमूल विधायक मिहिर गोस्वामी ने भी प्रशांत किशोर पर आपत्ति जताते हुए फेसबुक पर कई पोस्ट किए। उन्होंने पीके पर निशाना साधते हुए लिखा, क्या तृणमूल अभी भी वाकई ममता बनर्जी की पार्टी है? ऐसा लगता है कि पार्टी को किसी ठेकेदार को दे दिया गया है। शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया तथा नई दिल्ली जाकर भाजपा का दामन थाम लिया।

पीके के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं तृणमूल के कई नेता

बैरकपुर विधानसभा से तृणमूल विधायक शीलभद्र दत्त ने पीके की एजेंसी पर हमला बोलते हुए चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी है। दत्ता ने कहा है कि एक बाहरी एजेंसी उन्हें सिखा रही है कि राजनीति कैसे करें। यही नहीं मंत्री रबींद्रनाथ भट्टाचार्य ने हुगली के सिंगुर के विधायक बेचाराम मन्ना से नाराज होकर इस्तीफा देने की बात कह दी थी। वहीं मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी भी तृणमूल नेता अनुव्रत मंडल से नाराज हैंं।

Source : Dainik Jagran

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दिसंबर में लग सकता है झटका, बढ़ सकते हैं LPG सिलेंडर के दाम

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अगले महीने (दिसंबर) की पहली तारीख को आम जनता को झटका मिलने की आशंका है. ये झटका एलपीजी सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी के रूप में हो सकता है. दरअसल, तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को संशोधित करती हैं और ये अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की दरों पर निर्भर करता है.

देश में एलपीजी की कीमत सरकारी तेल कंपनियां निर्धारित करती हैं और हर महीने की पहली तारीख को ये संशोधित की जाती हैं. तेल विपणन कंपनियां दिसंबर की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में संशोधन पर एक घोषणा कर सकती हैं. यानी 1 दिसंबर, 2020 से देशभर में रसोई गैस की कीमत में बदलाव होना तय है.

हालांकि, कोरोना संकट के दौरान लोगों को राहत देने के लिए घरेलू एलपीजी की कीमतों को स्थिर रखा गया है. उम्मीद कि जा रही है कि आगे भी राहत मिलेगी, लेकिन इसके लिए हमें 1 दिसंबर तक का इंतजार करना होगा. देश में लगभग सभी घरों में एलपीजी कनेक्शन है और इसका उपयोग मुख्य रूप से खाना बनाने के लिए किया जाता है.

एलपीजी की कीमतों में वृद्धि आम आदमी की जेब पर असर डालती है. हालांकि, एक अच्छी बात ये भी है कि भारत सरकार उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी प्रदान कर रही है. सिलेंडर खरीदने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे व्यक्ति के बैंक खाते में जमा हो जाती है और ये हर महीने बदलती है.

उधर, बीपीसीएल एलपीजी गैस का इस्तेमाल कर रहे 7 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के मन में सब्सिडी को लेकर सवाल चल रहे थे. इस सवाल को लेकर केंद्र सरकार की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया है.

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि बीपीसीएल के निजीकरण के बाद भी उसके उपभोक्ताओं को रसोई गैस सब्सिडी मिलती रहेगी. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘‘एलपीजी पर सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं को दी जाती है और किसी कंपनी को नहीं. इसलिए एलपीजी बेचने वाली कंपनी के स्वामित्व का सब्सिडी पर कोई असर नहीं होगा.’’

बता दें कि सरकार प्रत्येक कनेक्शन पर हर वर्ष अधिकतम 12 रसोई गैस सिलेंडर(14.2 किलो गैस वाले) सब्सिडी वाली दर पर देती है. यह सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खातों में दी जाती है. उपभोक्ता डीलर से बाजार मूल्य पर एलपीजी खरीदते हैं और बाद में सब्सिडी उनके खाते में आती है.

बढ़ सकते हैं LPG सिलेंडर के दाम

सरकार तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), बीपीसीएल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के उपभोक्ताओं को सब्सिडी देती है.

Source : Aaj Tak

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किसानों के समर्थन में हरभजन, कहा- बिना भिड़ंत के हम अन्नदाता की बात नहीं सुन सकते क्या

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कृषि कानूनों के खिलाफ सड़क पर उतरे किसानों को टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाज हरभजन सिंह का साथ मिला है. उन्होंने किसानों को सुनने की अपील की है. हरभजन सिंह ने ट्वीट किया कि किसान हमारा अन्नदाता है. हमको अन्नदाता को थोड़ा समय देना चाहिए.

Harbhajan Singh condemns Bandra incident, says 'what happened today is  unacceptable' | Cricket News – India TV

टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाज ने कहा कि क्या यह वाजिब नहीं होगा. बिना पुलिस भिड़ंत के क्या हम किसानों की बात नहीं सुन सकते. कृपया किसान की भी सुनिए. जय हिंद. बता दें कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान सड़क पर उतरे हैं. वो सरकार से कृषि कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

Delhi Chalo' protest: Farmers brave water cannons, tear gas as they inch  towards national capital | India News – India TV

प्रदर्शनकारी किसानों के दिल्ली में प्रवेश करने को लेकर पुलिस से झड़प भी हुई. एक ओर जहां किसान दिल्ली में दाखिल होने पर अड़े रहे तो वहीं पुलिस उन्हें बॉर्डर पार करने से रोकती रही. पुलिस ने किसानों पर आंसू गैस के गोले भी छोड़े. इन सबके के बावजूद किसान अड़े रहे. आखिरी में प्रशासन को उनके आगे झुकना पड़ा और दिल्ली में प्रवेश करने की इजाजत देनी पड़ी.

Delhi Chalo' against farm laws: Farmers cross barricades, water jets;  Tomar, Rajnath offer talks | Cities News,The Indian Express

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