सूख गया वैशाली का ऐतिहासिक अभिषेक पुष्करणी सरोवर, लिच्छवियों के अभिषेक को नहीं बचा बूंद भर पानी, सरोवर के पास है विश्व शां‍ति स्तूप

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तिरहुत नहर में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण सूख गया पवित्र सरोवर

वैशाली | ढाई हजार वर्ष पूर्व वैशाली गणराज्य ने अभिषेक पुष्करणी सरोवर बनवाया था। सालोंभर पानी से लबालब रहने वाला सरोवर अब पूरी तरह सूख चुका है। इसका कारण है तिरहुत नहर में पर्याप्त पानी नहीं होना। कई वर्षों से तिरहुत नहर में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण अभिषेक पुष्करणी सूखता चला गया। सरोवर से 4 किलोमीटर दूर मनिकपुर से गुजर रही तिरहुत नहर बरसात के दिनों में ओवरफ्लो हो जाती थी, जिससे यह सरोवर कभी नहीं सूखता था। अब उम्मीद जल संसाधन विभाग से जगी है। विभाग के अधिकारी एक बार फिर तिरहुत नहर से ही इसमें पानी लाने पर विचार कर रहे हैं। अभिषेक पुष्करणी के नजदीक ही बौद्ध समुदाय द्वारा बनवाया गया विश्व शां‍ति स्तूप स्थित है।

असर

तालाब सूखने से चार फीट तक जलस्तर नीचे चले जाने के कारण विश्व शांति स्तूप के आसपास के गांवों का हैंडपंप सूखने लगा है। कोल्हुआ स्थित अशोक स्तंभ के पास तालाब भी सूख रहा है। लोगों की आस्था का केन्द्र रहे इस सरोवर में आसपास के लोग किसी भी शुभ संस्कार में स्नान करते थे। इस सरोवर को एक तरह से गंगा का दर्जा प्राप्त था।

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550 मीटर लंबा और 300 मीटर चौड़ा है अभिषेक पुष्करणी सरोवर

25 दिनों के अंदर जल संसाधन विभाग को प्रोजेक्ट बनाने का निर्देश

25 सौ वर्ष पुराना है वैशाली के अभिषेक पुष्करणी सरोवर का इतिहास

4 किमी दूर मनिकपुर से गुजरती तिरहुत नहर के पानी से भरा रहता था सरोवर

सरोवर का ऐसा था गौरव

प्राचीन लिच्छवी गणराज्य में जब भी कोई नया शासक निर्वाचित होता था तो उनका इसी सरोवर के जल से अभिषेक कराया जाता था। इस सरोवर के पवित्र जल से शुद्ध होकर लिच्छवियों के शासक गणतांत्रिक सभागार में बैठते थे।

पुष्करणी सरोवर की ये है दुर्दशा

अभिषेक पुष्करणी सरोवर में जनवरी महीने में भी लिच्छवियों के लिए इस सरोवर में एक बूंद पानी नहीं बचा है। सरोवर में धूल उड़ रही है। जानवरों का यह चारागाह बना हुआ है।

Input : Dainik Bhaskar