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है’दराबाद एन’काउंटर: पु’लिस पर फूलों की बारिश, लगाए गए जिं’दाबाद के नारे

Muzaffarpur Now

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है’दराबाद गैं’गरे’प और म’र्डर के’स में चारों आ’रोपियों का आज तड़के ए’नकाउं’टर कर दिया गया. ए’नकाउं’टर उसी जगह पर किया गया, जहां डॉ’क्टर दिशा के साथ दरिं’दगी को अं’जाम दिया गया था. एन’काउं’टर की खबर पाकर एनएच-44 के अंडरपास के पास भीड़ इकट्ठा हो गई. लोगों ने एन’काउं’टर पर खुशी जाहिर करते हुए पु’लिस पर फू’लों की बा’रिश की गई. लोगों ने पु’लिस जिंदाबाद के नारे भी लगाए.

 

मौका-ए-वारदात पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए हैं. पुलिस जिंदाबाद के नारे लगाए जा रहे हैं. लोगों ने पुलिसवालों को गोद में उठा लिया है. इसके साथ ही कई जगहों पर पुलिसवालों को लड्डू खिलाया गया और आतिशबाजी की गई. डॉक्टर दिशा के पड़ोसियों ने भी पुलिसकर्मियों को मिठाई खिलाई.

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28-वर्षीय शख्स की तोंद ने उसे कुएं में गिरने से बचाया, तस्वीर आई सामने

Ravi Pratap

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इंटरनेट पर जाइए और एक शब्द गूगल कीजिए. तोंद. जैसे ही आप लिखेंगे तोंद, वैसे ही आपको गूगल का पहला सजेशन मिलेगा ‘तोंद कैसे कम करें.’ मतलब गूगल बाबा जानते हैं कि आलसी आदमी ने तोंद टाइप किया है तो यही जानने के लिए किया होगा कि इसे कम कैसे करें. तो सुझा देते हैं.

लॉकडाउन में तमाम लोगों ने बाक़ायदा हेल्थ एक्सपर्ट बनकर वीडियो सीरीज़ चला दी कि तोंद कम कैसे करें. ये कसरत, वो डायट, ये योगा, वो जॉगिंग आदि आदि. लेकिन किसी की तोंद उसकी जान बचा सकती है ये किसी ने सोचा भी नहीं होगा. हुआ ऐसा ही है कि एक शख्स की जान उसकी बढ़ी हुई मोटी तोंद की वजह से बच गई.

मामला है चीन का. जहां एक शख्स अपने घर के पीछे बने सूखे कुएं में गिर गया. लेकिन पूरा गिरता इससे पहले उसकी तोंद फंस गई. जैसे तैये वो थोड़ा ऊपर आया लेकिन तब तक तोंद कुएं में और बुरी तरह फंस गई.  125 किलो के उस शख्स की पहचान लिउ के नाम से हुई. वो अपने घर के पीछे सूखे कुएं को सील करने की कोशिश कर रहा था. उसी समय हादसा हो गया और वो खुद कुएं में अटक गया. 28 साल के लिउ को निकालने के लिए 12 लोगों की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची. उन्होंने रस्सी लगाकर लिउ को खींचा लेकिन नाकामयाब हुए.

लुओयांग शहर की फायर ब्रिगेड ने जब लिउ को कुएं में देखा तो उसका आधा शरीर कुएं के अंदर और आधा बाहर था. उसने कपड़े नहीं पहन रखे थे. हाथों को क्रॉस कर वो खुद को बचाने का वेट कर रहा था. लिउ ने बताया कि ये हादसा तब हुआ जब वो इस कुएं को लकड़ी और कचरे से भरने की कोशिश कर रहा था. अचानक उसका बैलेंस बिगड़ा और वो कुएं में जा गिरा.

हालांकि लिउ के परिवार ने फ़ायर ब्रिगेड सर्विस के अधिकारियों को बताया कि लिउ मानसिक तौर पर स्वस्थ नहीं है. उसकी दिमाग़ी हालत गड़बड़ है. उसी की वजह से परिवार इस सूखे कुएं को भरना चाहता था लेकिन लिउ उस कुएं पर लगे लकड़ी के फट्टे पर अचानक कूद पड़ा और कुएं में फंस गया.

Input : The Lalantop

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अलविदा राहत इंदौरी: नहीं रहा ‘आसमां को जमीन’ पर लाने वाला शायर, पढ़िए उनके चुनिंदा शेर

Muzaffarpur Now

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मशहूर शायर राहत इंदौरी (Rahat Indori) इस दुनिया में नहीं रहे. राहत इंदौरी की कोविड-19 के इलाज के दौरान मृत्यु हुई. इंदौर के जिलाधिकारी मनीष सिंह ने पुष्टि की. उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने के बाद यहां एक निजी अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती किया गया थी.

अलविदा राहत इंदौरी: नहीं रहा 'आसमां को जमीन' पर लाने वाला शायर, पढ़िए उनके 20 चुनिंदा शेर

आज ही (मंगलवार) सुबह 70 वर्षीय शायर ने खुद ट्वीट कर अपने संक्रमित होने की जानकारी थी. उन्होंने कहा, “कोविड-19 के शुरूआती लक्षण दिखायी देने पर कल (सोमवार) मेरी कोरोना वायरस की जांच की गई जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई.” इंदौरी ने ट्वीट में आगे कहा, “दुआ कीजिये (मैं) जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं.” 1 जनवरी 1950 को इंदौर, मध्य प्रदेश में जन्में राहत कुरेशी उर्फ राहत इंदौरी के पिता का नाम रफ्तुल्लाह कुरैशी था जोकि कपड़ा मिल के कर्मचारी थे उनकी माता का नाम मकबूल उन निशा बेगम था.

उर्दू को विश्व पटल को एक नई और आधुनिक पहचान देने वाले शायरों में से एक राहत इंदौरी का इस दुनिया को छोड़ के जाना एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती. आज हम आपको मशहूर शायर राहत इंदौरी के कुछ चुनिंदा शेर शेयर कर रहे हैं. राहत इंदौरी जब अपने खास और बेहद कमाल के लहजे में स्टेज पर शेर पढ़ते थे तालियों की गड़गड़ाहट रुकती नहीं थी. उनका एक शेर ‘आसमान लाये हो ले आओ ज़मीन पर रख दो..’ लोगों को बेहद पसंद है.

राहत इंदौरी के चुनिंदा शेर

1. आसमान लाये हो ले आओ ज़मीन पर रख दो.

मेरे हुजरे में नहीं, और कहीं पर रख दो,
आसमां लाये हो ले आओ, जमीं पर रख दो!
अब कहाँ ढूड़ने जाओगे, हमारे कातिल,
आप तो क़त्ल का इल्जाम, हमी पर रख दो!
उसने जिस ताक पर, कुछ टूटे दिये रखे हैं,
चाँद तारों को ले जाकर, वहीँ पर रख दो!

2. बुलाती है मगर जाने का नहीं
बुलाती है मगर जाने का नहीं
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं

ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो
चले हो तो ठहर जाने का नहीं

सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नहीं

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नहीं

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नहीं

3. ‘किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’

अगर खिलाफ हैं, होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुँआ है, कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिब-इ-मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं जाती मकान थोड़ी है

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.

4. तूफ़ानों से आँख मिलाओ
तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे
जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे

5. फकीरी पे तरस आता है
अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है
जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे

जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे

फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो
इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो

6. बहुत हसीन है दुनिया
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

7. उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है
बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं

8. बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं

9. आँख में पानी रखो होठों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

10. बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ

11. तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

12. अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए

13. न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा

14. मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे
मेरे भाई, मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले

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शिक्षा मंत्री ने 11वीं क्लास में लिया दाखिला, मैट्रिक तक पढ़े होने के कारण होती थी फजीहत

Ravi Pratap

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झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने 11वीं क्लास में पढ़ेंगे. इसके लिए उन्होंने बोकारो जिला के बेरमो प्रखंड के नावाडीह देवी महतो कॉलेज में जगरनाथ महतो ने एडमिशन ले लिया है. मंत्री जी की शिक्षा को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे. मात्र मैट्रिक तक की इनकी शिक्षा पर निशाना साधा जा रहा था. इससे आजिज होकर इन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण करने का निर्णय लिया.

एडमिशन करवाने के बाद श्री महतो ने कहा कि अब वह उच्च शिक्षा हासिल करेंगे. इसलिए आर्ट्स संकाय में एडमिशन करवाया है. कॉलेज जाकर मंत्री महतो ने नामांकन फॉर्म भरा. इसके बाद एक हजार एक सौ रुपये नामांकन शुल्क जमा कर रशीद लिया.

मंत्री जी के नामांकन को लेकर जब पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने कहा कि वह सारा काम देखते हुए सब कुछ करेंगे. ‘क्लास भी करेंगे और मंत्रालय भी संभालेंगे. घर में किसानी का काम भी करेंगे, ताकि मेरे काम को देखकर अन्य लोग भी प्रेरित हों.’

उन्होंने कहा कि शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती. अन्य नौकरियों में रहते हुए लोग आईएएस, आईपीएस की तैयारी करते हैं और सफल भी होते हैं.

बता दें कि शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने वर्ष 1995 में चंद्रपुरा प्रखंड के नेहरू उच्च विद्यालय तेलो से मैट्रिक की परीक्षा सेकेंड क्लास में पास की थी. और इन्होंने जिस कॉलेज की स्थापना इनेक सहयोग से ही हुआ है. उसी कॉलेज में इन्होंने अपना नामांकण कराया है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिस दिन वह झारखंड के शिक्षा मंत्री बने थे, उसी दिन सोच लिया था कि अब आगे की पढ़ाई करेंगे. उनके मंत्री बनने के बाद लोगों ने कहा था कि दसवीं पास विधायक को शिक्षा मंत्री बनाया गया है. इसलिए हमने तय किया कि हम पढ़ेंगे. उच्च शिक्षा हासिल करेंगे और राज्य के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा सुविधा देंगे.

Input : Live Cities

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