झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास पर्षद द्वारा विभिन्न मंदिरों को नोटिस भेजे जाने तथा सूचना सार्वजनिक किए जाने के बाद शहर के मंदिरों के बीच इसे लेकर चर्चाएं प्रारंभ हो चुकी हैं। शहर के तीन मंदिर बिहार हिंदू धार्मिक न्यास पर्षद से निबंधित थे, लेकिन झारखंड बनने के बाद इन मंदिरों को इसे लेकर कोई निर्देश नहीं आया।
शहर के साकची स्थित शीतला मंदिर, बिष्टुपुर राम मंदिर तथा धर्म सास्था मंदिर बिहार सरकार के समय न्यास पर्षद से निबंधित थे। झारखंड बनने के बाद यह परिषद अस्तित्व में है या नहीं अब तक नहीं मालूम चला। शीतला मंदिर के ओर पुजारी राजू वाजपेई ने कहा कि उनके पिताजी बिहार सरकार के समय एक निर्धारित शुल्क पर्षद को जमा करते थे। इसकी कई रसीद उनके पास हैं। झारखंड बनने के बाद की रसीद नहीं है। वहीं बिष्टुपुर राम मंदिर के पूर्व अध्यक्ष शंकर राव ने बताया कि हां यह सही है कि बिहार सरकार के समय धर्म सास्था मंदिर तथा राम मंदिर को न्यास पर्षद से पत्राचार होता है। कुछ सालों तक शुल्क भी भरा गया।
नइ व्यवस्था को पारदशी बनाने की सलाह
झारखंड में अगर यह व्यवस्था चालू हो रही है तो यह अच्छी बात है, लेकिन इसे पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। सिर्फ मंदिरों से शुल्क वसूली की खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए, बल्कि पर्षद को मंदिरों को सहयोग भी करना चाहिए। बिहार सरकार के समय मंदिरों को पर्षद से कोई सहयोग नहीं मिल रह था, इस कारण शुल्क देना बंद कर दिया गया था।
Input: Dainik Jagran









