मंगलवार को बिहार विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान विधायकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच जमकर धक्का मुक्की हुई। सदन से बाहर निकाले जाने के बाद एक विधायक ने मीडिया के सामने हांफते हुए अपनी आपबीती सुनाई। विधायक ने पटना के डीएम आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने लोगों को मारने के लिए उकसाया। साथ ही उन्होंने कहा कि एसपी ने मेरे छाती पर बूट रखकर मारा।
शर्म आती है ये कहते कि हमारे देश में लोकतंत्र है। बिहार विधानसभा में शर्म की हर हद तोड़ दी गई! pic.twitter.com/6WfVVGHN18
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) March 23, 2021
कांग्रेस विधायक सत्येंद्र सिंह ने सदन से बाहर निकाले जाने के बाद हांफते हुए मीडिया को बताया कि डीएम ने पुलिसकर्मियों से मुझे मारने के लिए कहा और मेरे साथ गाली गलौज किया। एसपी ने छाती पर बूट रखकर मुझे मारा। साथ ही सत्येंद्र सिंह ने कहा कि मेरे छाती पर बहुत जोर की चोट लगी है। ये ज्यादती नहीं है बल्कि ये लोकतंत्र की हत्या है। साथ ही एक अन्य राजद विधायक ने कहा कि नीतीश कुमार ने यहां गुंडों को भेजा है। हमलोग बिल का विरोध कर रहे हैं लेकिन यहां पर गुंडई की जा रही है।
नीतीश कुमार जैसी अनैतिक राजनीति करने वाला C ग्रेड, बेशर्म और अलोकतांत्रिक मुख्यमंत्री पूरे देश में नहीं होगा।
गुंडा सरकार के मुखिया देखिए कैसे 3 लाख लोगों द्वारा निर्वाचित विपक्षी माननीय विधायक को घसीटवा कर अपनी सरकार की गुंडई को प्रदर्शित करवा रहे है।#नीतीशकुमार_शर्म_करो pic.twitter.com/1GaNPOW4du
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) March 23, 2021
बाद में अधिकारियों का आदेश मिलते ही मार्शलों ने विपक्षी विधायकों को सदन से बाहर फेंकना शुरू कर दिया। जिसकी वजह से कई विधायक गंभीर रूप से घायल हो गए। मकदुमपुर से राजद विधायक सतीश कुमार दास के सिर में चोट लगी और वे बेहोश हो गए। घायल विधायक को एंबुलेंस बुलाकर और स्ट्रेचर पर लाद कर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सदन में मंगलवार को विपक्षी महिला विधायकों के तेवर भी काफी तल्ख़ रहे। सशस्त्र पुलिस विधेयक के विरोध में राजद और कांग्रेस की करीब 7 महिला विधायकों ने अध्यक्ष के आसन को ही घेर लिया। लगातार घंटी बजने के बावजूद भी महिला विधायकों ने आसन के सामने से हटने से इनकार कर दिया। विधानसभा के मार्शलों ने महिला विधायकों को भी नहीं बख्शा। महिला विधायकों को भी सुरक्षा कर्मियों ने घसीट कर बाहर निकाला।
अपने महिला विधायकों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा कि लोकलाज त्याग चुके लज्जाहीन नीतीश कुमार के आदेश पर हमारी क्रांतिकारी माननीय महिला विधायकों को ब्लाउज़ से पकड़ कर खींचा गया। उनकी साड़ी खुली, धक्का दिया गया, बता नहीं सकने वाली बदसलूकी की गयी लेकिन बीजेपी के चरणों में अपमान का आनंद ले रहे CM को शर्म नहीं आती।

साथ ही उन्होंने कहा कि निहत्थी महिला विधायकों की इज्जत तार-तार होने पर क्या निर्लज्ज नीतीश कुमार को नींद आएगी? इसके अलावा तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि सदन के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि पुलिस सदन के अंदर आई। डीएम ने विधायकों को घसीट कर सदन से बाहर निकाला। यह काला दिन है। लाखों लोग मिलकर विधायक को चुन कर सदन में भेजते हैं लेकिन किसी महिला विधायक के बाल खींचे गए तो किसी विधायक को लात और जूते से मारा गया।
हालांकि भारी हंगामे के बावजूद इस विधेयक को पास कर दिया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाषण के बाद सशस्त्र पुलिस विधेयक को पास कर दिया गया। अपने भाषण के दौरान सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि बिल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही रही है। उन्होंने कहा कि बीएमपी का नाम बदलकर बिहार सशस्त्र पुलिस बल कर दिया गया है। इससे हम पुलिस बल को नई जिम्मेदारी देंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष ने क्या इस बिल को देखा है या पढ़ा है? यह कानून लोगों की रक्षा के लिए न कि लोगों को कष्ट देने के लिए। साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष ने जो आज किया वैसा कभी भी हमने नहीं देखा। विरोध प्रदर्शन किया जाना चाहिए लेकिन इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।
Input: Jansatta








