राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र एवं महुआ के विधायक तेजप्रताप यादव पार्टी की ओर से विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार हो सकते हैं। दूसरे और तीसरे उम्मीदवार के लिए अति पिछड़ा और अल्पसंख्यक कोटे से भी किसी नेता पर पार्टी की मुहर लग सकती है। ऐसे अगर कोई सीट सवर्ण को गया तो राजपूत वर्ग की भी दावेदारी मजबूत है, क्योंकि एडी सिंह को राज्यसभा में भेजकर पार्टी ने भूमिहार जाति को प्रतिनिधित्व दे दिया है। विधान परिषद की नौ सीटों के लिए हो रहे चुनाव में विपक्ष को काफी लाभ होगा। जिन नौ सीटों पर चुनाव होना है वह सभी जदूय और भाजपा कोटे की हैं, लेकिन विधामंडल में सदस्यों की संख्या के हिसाब से इस बार तीन सीट राजद को मिलनी तय है। इसी के साथ कांग्रेस के खाते में भी एक सीट जाएगी। शेष पांच में तीन जदूय और दो भाजपा के खाते में जाएंगी। राजद को जो भी तीन सीटें मिलनी हैं उसके लिए उम्मीदवारों की चर्चा तेज हो गई है। अंतिम रूप देने में थोड़ा वक्त लगेगा, लेकिन चर्चाओं पर भरोसा करें तो एक सीट तेजप्रताप यादव के लिए तय है। वह इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। दूसरी सीट अति पिछड़ा वर्ग के कोर्ट में जा सकती है। इस वर्ग से अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रामबली सिंह चन्द्रवंशी का नाम सबसे आगे है। तीसरी सीट अगर अल्पसंख्यक समाज के खाते में जाती है तो शिवहर से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले फैसल अली की दावेदारी मजबूत होगी।

तीसरी सीट पर राजपूत उम्मीदवार उतारने की चर्चा तीसरी सीट के लिए राजपूत उम्मीदवार बनाने की चर्चा भी तेज हो गई है। अगर इस समाज से किसी को उम्मीदवार बनाया जाता है तो प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और बिस्कोमान के अध्यक्ष सुनील सिंह उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि सुनील सिंह ने कभी संसदीय राजनीति में अपनी रूचि नहीं दिखाई है, लेकिन पार्टी के साथ वह मजूबती से लंबे समय से जुड़े हैं।

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