नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को चुनावी सभाओं में जहां एक ओर एनडीए सरकार पर तीखे हमले किये, वहीं दूसरी ओर युवाओं में जोश भरा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि वे थक गये हैं। इसलिए अब उनसे बिहार संभल नहीं रहा है। न तो युवाओं को रोजगार दे पाये और न ही कोरोना में लौटे प्रवासियों के लिए कुछ कर सके। लिहाजा वे फिर पलायन को विवश हुए। नेता प्रतिपक्ष ने भोजपुर, भभुआ और भागलपुर के कहलगांव में चुनावी सभाओं को संबोधित किया।

उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी पर भी तंज कसते हुए कहा कि वे कहते हैं कि शौक से कुछ लोग बाहर जाते हैं। जबकि हकीकत है कि लोग बीमारी का इलाज और रोजगार पाने के लिए बिहार जाते हैं। खुद को ठेठ बिहारी कहते हुए कहते हुए युवाओं से कहा कि वे तेजस्वी सरकार बनवाएं। हम आयेंगे तो आपको पहली ही कैबिनेट की बैठक में आपको दस लाख नौकरी देंगे। नौकरी के लिए फार्म भरने में युवाओं का एक रुपया नहीं लगेगा। नौकरी के लिए शहरों में आने-जाने में भी युवकों का पैसा नहीं लगेगा।

आरोप लगाया कि नीतीश कुमार सिपाही बहाली में केवल नालंदा वाले को भरते हैं, इसलिए अपराध बढ़ रहा है। स्थानीय युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि बक्सर-आरा के लंबे नौजवान भर्ती रहते तो पांच बदमाशों को कांख में ही जात लेते। इसलिए खाली पेट बेरोजगार युवा वोट से चोट कर नीतीश सरकार को उखाड़ फेंके।

तेजस्वी यादव ने कहा कि 15 साल में नीतीश चाचा बिहार में एक भी कल-कारखाना नहीं खोल सके तो पांच साल में क्या करेंगे? हमें अगर पांच साल और मौका मिला तो नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन दिया जाएगा। वृद्धा पेंशन को बढ़ाकर एक हजार रुपये किया जाएगा। कहा कि कोरोना काल में मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों के साथ मजाक किया। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिला पाये और न ही विशेष पैकेज ले सके। तेजस्वी ने अपने पिता लालू प्रसाद के कार्यकाल में बिहार में हुए विकास का उल्लेख किया । तेजस्वी के साथ उनके बड़े भाई तेज प्रताप भी चुनावी सभा में शिरकत किए, पर उन्होंने सभा को संबोधित नहीं किया।

Input: Live Hindustan

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