जहां राजद तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्य चेहरा बनाने में लगी है, वहीं अन्य सहयोगी दल तेजस्वी को चेहरा मानने के बजाय गठबंधन ही तोड़ रहे है। ऐसे में राजद अपने प्रयत्नों में कहां तक खड़ा ऊतर पाती है, यह भविष्य के गर्त में छिपा है। ऐसे में बड़ी खबर यह है, कि उपेंद्र कुशवाहा ने महागठबंधन से नाता तोड़ लिया है। हालांकि उन्होंने इसका खुले तौर पर एलान तो नहीं किया लेकिन अपनी पार्टी की बैठक में इसकी घोषणा कर दी है।

कारण सीट समीकरण हो राजद से पटरी बैठ पाना , लेकिन सच्चाई यही है कि महागठबंधन में अपनी उपेक्षा से नाराज उपेंद्र कुशवाहा ने आज अपनी पार्टी के नेताओं की बैठक बुलायी थी। राज्य भर से रालोसपा के नेता आज पटना में जुटे थे। बैठक को संबोधित करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने समर्थकों को बता दिया कि अब उनकी पार्टी महागठबंधन का हिस्सा नहीं है। कुशवाहा ने आज तेजस्वी यादव पर खुला हमला बोला। उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं से वो सारे घटनाक्रम बताये जो महागठबंधन में उनके साथ हुए।

अपने कार्यकर्ताओं-नेताओं के बीच उपेंद्र कुशवाहा बोले –
“आरजेडी ने जिस नेतृत्व को खडा किया है उसके पीछे रह कर बिहार में सत्ता परिवर्तन नहीं होने जा रहा है. आज भी सीट का मामला हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। जो साथी हमारे चुनाव लड नहीं पायेंगे, हम उन्हें समझा लेते। क्योंकि एक-दो साथी का सवाल नहीं है, क्योंकि बिहार का सवाल है। सीट की संख्या का कोई मामला नहीं था। इतनी बात जरूर थी कि बिहार की जनता चाहती है कि नेतृत्व ऐसा हो जो नीतीश कुमार के सामने ठीक से खड़ा हो सके। तब बिहार की जनता उसे पसंद करती। आरजेडी ऐसा नहीं कर पाया।
आज लोग भले ही जो सोंचे-समझे लेकिन उनके मन में आज भी ये बात है कि अगर राष्ट्रीय जनता दल ये तय करे कि हम अपना नेतृत्व बदल देंगे तो उपेंद्र कुशवाहा आज भी अपने लोगों को समझा लेगा। लेकिन अब शर्त यही है कि राष्ट्रीय जनता दल अपना नेतृत्व बदले। तेजस्वी यादव को हटाकर दूसरा नेतृत्व लाये”
जाहिर है उपेंद्र कुशवाहा ने सीधे तौर पर महागठबंधन छोड़ने का एलान कर दिया है। उन्होंने तेजस्वी यादव को बेहद कमजोर नेता करार दिया है। उपेंद्र कुशवाहा कह रहे हैं कि अगर राजद नेतृत्व बदले तो वे महागठबंधन में रहेंगे। ऐसे में कोई सवाल नहीं उठता कि राजद से उनका गठबंधन हो पायेगा।



