बिहार में नागरिक सेवाओं के ​तहत कोई सर्टिफिकेट बनवाना हो, लाइसेंस रीन्यू कराना हो, लोन लेना हो या फिर ऐसे ही अन्य काम करवाने हों… सरकारी ऑफिस का चक्‍कर लगाना ही पड़ता है. बाबूगिरी और अफसरशाही से भी परेशान होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं. इनके पीछे जटिल नियम कायदे बड़ा कारण होते हैं. नागरिक सेवाओं को सुगम बनाने में आने वाली इन्हीं अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.

प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश की नीतीश सरकार ने नागरिक सेवाओं से जुड़े 345 नियम-कायदों को या तो खत्म कर दिया है या फिर पूरी तरह शिथिल कर दिया है. ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर रोजगार लोन लेने तक तमाम अड़चनें दूर करने की दिशा में यह कदम उठाया गया है. बिहार सरकार ने ऐसे 407 नियम कानूनों की पहचान करने के बाद यह फैसला लिया. इनमें ज्यादातर नियम कायदे नागरिक सेवाओं से जुड़े हैं

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क्यों खत्म किये गए नियम कायदे?

आम लोगों को सरकारी सेवाओं में कोई दिक्कत न हो, उन्हें अफसरों और कर्मचारियों की चिरौरी न करनी पड़े, इसलिए यह कदम उठाया गया है. इस प्रक्रिया में पदाधिकारियों की दखल को ना के बराबर कर दिया गया है. जैसे कि जाति, आय, आवास और चरित्र प्रमाण पत्र जैसे सर्टिफिकेट्स के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दिए जाने से आम लोगों को काफी राहत मिली है, इसी तरह यह भी राहत भरा कदम बताया जा रहा है. बता दें कि केंद्र ने 1200 कठिन नियम कायदे की जांच कर इन्हें शिथिल करने के लिए राज्य सरकार को सूची भेजी थी.

आम आदमी को होगा फायदा

सबसे ज्यादा नियम कायदे बिजनेस सेक्टर में शिथिल किए गए हैं. बिजनेस सेक्टर में सर्टिफिकेट, लाइसेंस और परमिशन सेक्शन में 9 तरह की प्रक्रिया से जुड़े 77 नियम कायदों को शिथिल कर दिया गया है. ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर इस तरह के तमाम दस्तावेजों की रिन्यूअल प्रक्रिया खत्म हो जाएगी. इंश्योरेंस कॉस्ट रीन्यू चार्ज की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस तरह की कई अन्य योजनाओं में इंस्पेक्शन, एग्जामिनेशन और ऑडिट से जुड़े 21 नियम हटा दिए गए हैं.

रोजगार के अवसर बनेंगे

बिहार में इज ऑफ डूइंग यानी कारोबार सुगमता को लेकर भी कई तरह के नियम-कायदों को शिथिल किया गया है. नया काम शुरू करने वाले लोगों, इंटरप्रेन्योर्स के लिए सरकारी प्रक्रिया आसान बनाई जा सके. इस दिशा में भी कदम उठाए गए हैं. बिहार में इस तरह की योजनाओं पर काम करने के लिए उद्योग विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है. सरकारी प्रक्रिया आसान होगी तो कारोबार बढ़ेगा, प्रदेश में निवेश आएंगे और इससे रोजगार के अवसर भी बनेंगे.

मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के उदाहरण से समझिए

बिहार में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का उदाहरण देखिए. पहले इसमें आवेदक के पास डाक से कॉल लेटर जाता था या फिर जिला उद्योग केंद्र या फिर विभाग जाना पड़ता था. लेकिन अब इसमें आवेदन भी ऑनलाइन होगा, कॉल लेटर भी ऑनलाइन जाएगा. यही नहीं आवेदक के डॉक्‍युमेंट्स का वेरीफिकेशन भी ऑनलाइन होगा और उनका इंटरव्यू भी ऑनलाइन लिया जाएगा.

आवेदक को केवल ट्रेनिंग के लिए ही अफसरों से मिलना होगा. स्पष्ट है कि इस तरह की प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी. आम लोगों को अफसरशाही, बाबूगिरी और बिचौलियों के चंगुल से भी मुक्ति मिलेगी.

Source: tv9

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