बिहार में गोपालपुर से जदयू विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल अपने बयानों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। जेडीयू विधायक रविवार को एक बार फिर चर्चा में आ गए। इस बार विधायक नरेंद्र कुमार अपनी दबंगई के चलते चर्चा में आए हैं। मामला बांका जिले के बौसी थाना क्षेत्र का है। जहां श्याम बाजार स्थित दुर्गा मंदिर के पास जमीन को अपने कब्जे में करने के लिए हथियार से लैस होकर जदयू के गोपालपुर विधायक नरेंद्र कुमार नीरज ने जमकर हंगामा किया।

जानकारी के अनुसार, चार वाहनों से करीब एक दर्जन हथियार और दर्जनों लाठी लेकर पहुंचे विधायक और उनके गुर्गों ने वहां के स्थानीय नंदकिशोर साह का कॉलर पकड़कर हंगामा शुरू किया और अपनी गाड़ी में उन्हें बिठाने की कोशिश करने लगे। जिस पर नंदकिशोर साह के साथ आए कुमोद यादव और जितेंद्र यादव ने विरोध करना शुरू किया।

जबरन गाड़ी में डालने की कोशिश करने लगे विधायक और उनके गुर्गे

इधर नंद किशोर साह को जबरन गाड़ी में डालने की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों की भारी भीड़ इकट्ठी हो गई और लोगों ने करीब 1 घंटे तक विधायक और उनके गुर्गें को बंधक बनाए रखा। घटना की जानकारी मिलते ही थानाध्यक्ष राजकिशोर सिंह के निर्देश पर एसआई केदार पासवान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया।

विधायक ने मांगी माफी, तब शांत हुए ग्रामीण
पुलिस के मौके पर पहुंचे के बाद जेडीयू विधायक नरेंद्र कुमार ने स्थानीय लोगों से माफी भी मांगी तब जाकर लोगों का गुस्सा शांत हुआ। इस दौरान करीब 1 घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद विधायक अपने गुर्गों के साथ वहां से रवाना हुए। वहीं मामले में नंदकिशोर साह ने भी बताया कि विधायक और उनके गुर्गों ने उनके साथ बदतमीजी की।

ये है मामला
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय अनिरुद्ध यादव और बरमसिया गांव निवासी जदयू के उमेश यादव घटनास्थल पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद मामले को शांत कराया गया। बताया गया कि वहां की करीब 20 एकड़ जमीन को विधायक नरेंद्र कुमार खुद की जमीन बता रहे थे। विधायक का कहना था कि उक्त जमीन उसने शंभू राय सहित अन्य भाइयों से खरीदी है। वहीं दूसरे पक्ष के लोगों ने कहा कि करीब 50 सालों से इस जमीन पर स्थानीय लोगों का कब्जा है। जिस पर वह लोग मकान बनाकर रह रहे हैं।

सवाल यह उठता है कि एक जमीन 2 -2 लोगों को किस आधार पर बेची गई और कैसे इसका कागजात तैयार हो पाया। मामले की जांच अंचल कार्यालय तक भी पहुंच सकती है। हालांकि घटना के बाद विधायक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि 24 मार्च को इस मामले में बैठकर हम लोग आपस में फैसला करेंगे। साथ ही बताया कि जमीन के कागजात लेकर पहुंचेंगे। जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि जमीन किसकी है। अगर जमीन आप लोगों की हुई तो हम इसे छोड़ देंगे।

Input: NBT

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