छात्रवृति की राशि को लेकर राज्य के सभी जूनियर डॉक्टर (जूडा, पीजी) बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। इसमें जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के पीजी जूनियर डॉक्टरों ने भी समर्थन दे दिया है। इनके हड़ताल पर जाने से अस्पताल में चिकित्सीय व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और आइसोलेशन वार्ड में मरीजों को परेशानियां झेलनी पड़ेगी। मरीजों को निजी नर्सिंग होम का सहारा लेना पड़ सकता है। दरअसल, जेएलएनएमसीएच में भागलपुर, मुंगेर, बांका, खगडिय़ा, कटिहार, अररिया के अलावा झारखंड के साहिबगंज, गोड्डा, दुमका जिले से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इधर, जूडा संघ का कहना है कि वर्ष 2017 में ही सरकार की ओर से तीन वर्ष पर छात्रवृति राशि का तीन वर्षों में पूर्ण निर्धारण करना था, लेकिन ऐसा नहीं है। जब तक राशि का निर्धारण नहीं होगा हड़ताल जारी रहेगी।
आउटडोर, इंडोर से लेकर आइसोलेशन वार्ड की बिगड़ेगी व्यवस्था
हड़ताल के कारण आउटडोर और इंडोर में इलाज कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को फजीहत होगी। मेडिकल अस्पताल में 150 के करीब पीजी जूनियर डॉक्टर है। आउटडोर और इमरजेंसी में इनकी सेवा रहती है। रात में जूनियर डॉक्टरों के भरोसे ही मरीज रहते हैं। ऐसे में हड़ताल पर जाने से मरीजों को देखने वाला कोई नहीं होगा। कोरोना वार्ड में भी जूनियर डॉक्टरों की ड्यूटी लगी रहती है, ऐसे में कोरोना के मरीजों को भी परेशानी होगी।
सदर अस्पताल को किया अलर्ट, फायदा नहीं
जूडा की हड़ताल की घोषणा के बाद सदर अस्पताल को अलर्ट किया गया है, लेकिन इससे मरीजों को कोई फायदा नहीं है। भले ही यहां 100 बेड का इमरजेंसी बनाया गया है, लेकिन इलाज के नाम पर कोरम ही पूरा किया जाता है। सदर अस्पताल में तो मामूली मरीज को हर दिन जेएलएनएमसीएच में रेफर किया जाता है। ऐसे में सदर अस्पताल में बेहतर इलाज होना संभव नहीं है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने बेहतर चिकित्सा व्यवस्था का दावा किया है।
Input: Dainik Jagran





