बिहार में चुनावी बयार बहनी शुरू हो गयी है. इस चुनावी बयार में सभी राजनीतिक पार्टियों अपनी-अपनी सुरीली धुन भी छेड़ रहे हैं. इस चुनाव में राज्य के विकास को मुद्दा सबसे अहम मुद्दों में से एक है. कहा जाता है कि हमारे जनप्रतिनिधि जितने पढ़े-लिखें हों उन्हें देश की तरक्की करेगा. पॉलिटिकल लीडर्स जिनते योग्य होंगे देश विकास के मार्ग पर उतना ही आगे बढ़ता जायेगा. लेकिन असल में ऐसा होता नहीं है चुने गए सभी विधायक 100% पढ़े लिखे भी नहीं होते हैं, कोई ग्रेजुएट, तो कोई 10वीं तक, कोई 5वीं ही पास है. बिहार विधानसभ भी इससे अछूती नहीं है.

बिहार चुनाव के पहले आये एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट में चुने गए प्रतिनिधि की शैक्षणिक योग्यता भी बतायी गयी है. रिपोर्ट के अनुसार बिहार विधानसभा में 94 विधायक 5वीं से 12वीं तक ही पढ़े हैं. बिहार के 10 विधायक ऐसे हैं जो केवल 8वीं पास हैं ऍर 30 विधायक 10 वीं पास हैं. रिपोर्ट के अनुसार 53 विधायक 12वी पास हैं. 134 विधायकों ने अपनी शैक्षिक योग्यता ग्रैजुएट या उससे ऊपर बताई है. 9 विधायकों ने शैक्षिक योग्यता में सिर्फ साक्षर लिखा है.

वहीं बिहार विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 28 है. 15 वीं विधानसभा में इनकी संख्या 34 थी. 243 सदस्यों वाली विधानसभा में इनकी संख्या अब 11.5 फीसदी रह गयी है. पिछली बार यह अनुपात 14 फीसदी था. सबसे ज्यादा शिक्षा प्राप्त महिला विधायक कांग्रेस में हैं. चार में तीन स्नाकतोत्तर और एक स्नातक हैं. जदयू की नौ विधायकों में से एक एमए व एक एलएलबी हैं. एक के पास डॉक्ट्रेट की डिग्री है. जदयू में एक निरक्षर महिला. राजद की दस विधायकों में से दो ग्रेजुएट और एक डॉक्ट्रेट डिग्रीधारी हैं.

Input: Prabhat Khabar

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