बिहार के गया में जात-पात, ऊंच-नीच, अमीर-गरीब के भेदभाव से ऊपर उठकर दूल्हा-दुल्हन ने गयाजी के विष्णुपद मंदिर में शादी की. ये दोनों जन्म से ही देख नहीं सकते हैं. इस अनोखी शादी की मिसाल देखने के लिए काफी संख्या में आसपास के लोग मौजूद थे.

जन्म से देख नहीं सकते दूल्हा-दुल्हन (फोटो आजतक)

महाराष्ट्र के नागपुर के रहने वाले राठौर परिवार के युवक गोपाल ने गया की रहने वाली पिंकी से आज समाज के सामने विष्णुपद मंदिर में सात फेरे लिए. विष्णुपद मंदिर प्रबंधन समिति के पंडा समाज ने स्वयंसेवी संस्था कन्या विवाह एवं विकास सोसायटी के सचिव विकास माली ने पूरे विवाह का खर्च उठाया.

जन्म से देख नहीं सकते दूल्हा-दुल्हन

संस्था के सचिव विकास कुमार ने बताया कि उन्हें गया के बागेश्वरी मोहल्ले की रहने वाली पिंकी कुमारी के परिवार ने शादी के खर्च के लिए असमर्थता जताई थी. संस्था पिंकी की शादी का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार हुई और आज गया के विष्णुपद मंदिर परिसर में पिंकी और गोपाल की शादी संपन्न हुई.

इस मौके पर पिंकी ने समाज को संदेश दिया कि जिस तरह, जाति, धर्म, संप्रदाय, अमीर, गरीब के बंधन से ऊपर उठकर आदर्श विवाह हमने किया है. ठीक उसी तरह आज समाज में फैली दहेज जैसी कुरीतियों से ऊपर उठकर युवक-युवतियों को शादी कर समाज को सही दिशा देने की पहल करनी चाहिए.

बता दें कि इस स्वयंसेवी संस्था ने अब तक बिहार और आसपास के राज्यों के रहने वाले गरीब, असहाय, निर्धन परिवार में पले बढ़े युवक-युवतियों की लगभग 10,000 जोड़ो की शादी करवाई है. शादी समारोह के पूरे खर्च के अलावा विदाई में रजाई, ट्रंक, श्रृंगार के सामान सहित कई उपयोगी सामग्री देकर खुशी खुशी विदाई कराते हैं.

Source : Aaj Tak

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