बिहार में अब कहीं भी बिना अनुमति के मोबाइल टावर नहीं लग सकेंगे। इसके लिए निर्धारित प्राधिकार से पूर्व अनुमति लेनी होगी। ठीक ऐसी ही प्रक्रिया ऑप्टिकल फाइबर केबल डालने के मामले में अपनानी होगी। इसकी नियमावली जारी की जा चुकी है। नगर विकास एवं आवास विभाग को इसका नोडल बनाया गया है। निकायों द्वारा अनुमति प्रदान की जाएगी। जिला और राज्य स्तर पर दूरसंचार समिति गठित की जाएगी।
अभी तक राज्य में मोबाइल टावर लगाने को लेकर कोई नीति निर्धारित नहीं है। तमाम जगह इसे लेकर विवाद की स्थिति भी है। स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों के यहां इसे लेकर शिकायतें भी दर्ज करा रखी हैं। मगर अब ऐसा नहीं होगा। नगर विकास एवं आवास विभाग ने मोबाइल टावर और ऑप्टिकल फाइबर केबल डालने के लिए नियमावली अधिसूचित कर दी है।
केंद्र से मोबाइल टावर या केबल डालने के लिए लाइसेंसधारक जिस क्षेत्र में इनकी स्थापना करना चाहता है, वहां के स्थानीय निकाय में उसे निर्धारित प्रारूप पर तय शुल्क के साथ आवेदन करना होगा। संबंधित पदाधिकारी को 30 दिन के अंदर प्राप्त आवेदन के आधार पर परमिट जारी करने या उसे अस्वीकृत करने की कार्रवाई करनी होगी। अधूरे आवेदनों को सुधारने के लिए भी संबंधित लाइसेंसधारी को 15 दिन का समय दिया जाएगा।

बिना अनुमति के टावर लगाने वालों पर संबंधित निकाय और जिला स्तर पर गठित दूरसंचार समिति जुर्माना भी लगाएंगी। इसके अलावा सरकारी जमीनों या इमारतों पर टावर लगाने के लिए संबंधित निकाय शुल्क भी वसूलेंगे।
जिला समाहर्ता की अध्यक्षता में होगी जिला दूरसंचार समिति
हर जिले में दूर संचार समिति गठित की जाएगी। जिला समाहर्ता की अध्यक्षता वाली इस समिति में उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जिला परिषद, वन क्षेत्र पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला समाहर्ता द्वारा संयोजक के रूप में नामित पदाधिकारी, भवन निर्माण विभाग और पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता, जिले की सभी निकायों के नगर आयुक्त या ईओ, बीएसएनएल के जिला प्रमुख, सभी टेलीकॉम इंफास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर के सर्किल प्रमुख, अध्यक्ष द्वारा नामित व्यक्ति। यह समिति सभी सार्वजनिक शिकायतों का निस्तारण करेगी। यह प्रथम अपीलीय प्राधिकार होगा।
राज्य स्तरीय दूरसंचार समिति को होंगे सारे अधिकार
राज्य स्तरीय दूरसंचार समिति नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव या सचिव की अध्यक्षता में होगी। उसमें विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव या सचिव सदस्य होंगे। यह द्वितीय अपीलीय प्राधिकार होगा। जिला स्तरीय समिति के फैसलों से असंतुष्ट यहां अपील कर सकेंगे। इस समिति को जिला स्तरीय समिति के फैसलों को रद्द करने या संशोधित करने का पूरा अधिकार होगा।
Input : News18






