कोरोना की दूसरी लहर ने बिहार को पूरी तरह से अपनी आगोश में ले लिया है. कोरोना से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और स्वस्थ होने वालों की संख्या घट रही है.राज्य के अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन और दवाओं की कमी होने लगी है. हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि हर परेशानी का समाधान निकाला जा रहा है. हालात ऐसे हो गये हैं कि अस्पतालों में बेड नहीं है तो श्मशान घाट पर भी लंबा इंतजार चल रहा है. कोरोना संक्रमण के कारण आम लोग से लेकर वीआईपी तक लाचार है.

100 से ज्यादा बडे़ अधिकारी कोरोना की चपेट में हैं तो वहीं कई की मौत हो चुकी है. सोमवार सुबह पूर्व शिक्षा मंत्री मेवा लाल चौधरी की मौत हो गई. राजद विधायक बच्चा राय कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गये हैं. इस तरह से कोरोना संक्रमण इस बार अधिक खतरनाक रूप में सामने आया है. केवल 17 दिनों में संक्रमण की दर आठ गुना बढ़ गई है.

मुजफ्फरपुर स्थित उत्तर बिहार के सबसे बडे़ अस्पताल एसकेएमसीएच में डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर, हेल्थ मेनेजर, 17 नर्स और 5 फैकल्टी समेत 50 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी कोरोना पॉजिटिव हो गये हैं. पॉजिटिव होने के बाद सभी को होम आइसोलशन में भेज दिया है. इसके बाद मरीज के इलाज पर संकट गहराया है. मरीजों का इलाज करने में काफी दिक्कतें आ रही हैं.

वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार मौत के सही आंकडे़ को छिपा रही है. आम लोग भी मानते हैं कि संक्रमण की वजह से अपने घर में ही दम तोड़ देने वाले नागरिकों का डाटा सरकार नहीं इकट्ठा कर पा रही है. अब एक-एक दिन में आठ हजार से अधिक नए संक्रमित मिल रहे हैं. कोरोना के कुल सक्रिय मामलों की संख्या अब करीब 40 हजार के पार पहुंच गई है.

राज्य में ना केवल राजधानी पटना बल्कि गया सहित अन्य दूसरे शहरों में भी कोरोना महामारी ने विकराल रूप अख्तियार कर लिया है. सरकार का दावा है कि संक्रमितों के लिए अस्पतालों में पर्याप्त बेड हैं और कहीं कोई समस्या नहीं है. इस दावे के इतर सरकारी अस्पताल पूरी तरह से फुल हैं. नए मरीजों के लिए कहीं कोई व्यवस्था नहीं हैं. प्राइवेट अस्पताल ऑक्सीजन नहीं होने के कारण मरीजों को वापस कर रहे हैं.
Input: Lokmat




