बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने इसी साल फरवरी में कहा था-बिहारियों में हुनर की कमी नहीं है. अगर चांद पर नौकरी निकले तो वो वहां जाकर भी काम कर लेंगे. अब कोई पूछे इनसे कि चांद पर नौकरी करवाने वाली सरकार के पास दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में फंसे हुए मजदूरों को घर लाने के लिए बस क्यों नहीं है?

बिहार में एक प्रचलित क्रिया है: छीछ काटना. जब कोई काम करने का मन ना हो. शक्ति ना हो. सीधे-सीधे इंकार करने का स्कोप ना हो तो जो किया जाता है उसे ही छीछ काटना कहते हैं.

राज्य की मौजूदा सरकार फिलहाल यही कर रही है. कोरोना की वजह से पिछले चालीस दिनों से देशभर में लॉकडाउन है. ऐसी उम्मीद है कि लॉकडाउन तीन मई के बाद भी बढ़ सकती है. राज्य की बड़ी आबादी जिसमें छात्र और महेनत-मज़दूरी करने कामगार शामिल हैं, देश के कई राज्यों में फंसे हैं. दूसरों के आसरे हैं. वो सब घर लौटना चाहते हैं. जैसे चूहे के बिल में कोई पानी डाल दे तो वो उलबुला-उलबुला कर बाहर निकलता है वैसे ही पिछले चालीस दिनों में ये लोग कई बार सड़कों पर निकल चुके हैं.

सबसे पहले दिल्ली में निकले. कई दिनों तक सड़क पर रहे. कुछ पैदल, कुछ साइकिल तो कुछ ठेले पर बैठकर निकल गए. फिर सूरत में निकले. पुलिस से मार खाई फिर अपने कमरों में चले गए. इसके बाद मुम्बई में निकले. मीडिया के एक सबके ने उन्हें ‘भड़काए गए’ लोग कहा. वो फिर अपने कमरों में भेज दिए गए. जिस राज्य से इनका तालुक्क है. उसने कहा- हम अपनी सीमाएं सील कर रहे हैं। जैसे बाहर से घुसपैठिए आ रहे हों.

राज्य में कोरोना का ताजा हाल ????

पिछले चालीस दिनों से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और उतराखंड में लाखों मज़दूर बिलबिला रहे हैं. राजस्थान के कोटा में पढ़कर इंजीनियर बनने का ख़्वाब देख रहे हज़ारों छात्र सोशल मीडिया पर अपील के बाद अपील किए जा रहे हैं और सरकार बार-बार कह देती है-नहीं हो पाएगा. बुला नहीं सकेंगे. घुसने नहीं देंगे.

जब यूपी ने अपने छात्रों को कोटा से बुलवाया तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आंखे तरेरीं. लॉकडाउन का हवाला दिया. इसे पीएम मोदी के साथ हुई मीटिंग में उठाया. अब केंद्र सरकार ने भी नए गाइडलाइन जारी कर दिए हैं. नए गाइडलाइन में केंद्र सरकार ने साफ किया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने नोडल अधिकारी नियुक्त करने और ऐसे फंसे हुए व्यक्तियों को वापस भेजने और लेने के लिए एक एसओपी की तैनाती करनी होगी. नई गाइडलाइन के तहत एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के इच्छुक लोगों के लिए राज्यों को आपस में बात करनी होगी.

गाइडलाइन में साफ-साफ कहा गया है कि दूसरे राज्यों में फंसे हुए प्रवासी मजदूरों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और छात्रों को उनके गृह राज्य में लाया जा सकता है. इस नए गाइडलाइन के बाद तो साफ हो गया कि बिहार चाहे तो अपने छात्रों को कोटा से और अपने कमाऊ पूतों को देशभर से बुला सकता है.

रास्ता साफ है. जब केंद्र सरकार द्वारा नई गाइडलाइन जारी करने के कुछ ही घंटों बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता सुशील मोदी ने ट्विटर पर पीएम मोदी को और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बधाई थी. पीछे-पीछे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आए. उन्होंने भी एक के बाद एक दो ट्वीट करके बधाई दी.

लेकिन जब नए गाइडलाइन के मुताबिक छात्रों को और मज़दूरों को बिहार लाने की बात पत्रकारों ने सुशील मोदी ने पूछा तो बोले, “ट्रेन चलाने की अनुमति तो केंद्र सरकार ने दी नहीं है. बसों से ही आना होगा लेकिन हमारे पास इतनी बसें कहां हैं कि सब जगह भेज दें?”

पता नहीं ये कहते हुए सुशील मोदी को याद भी रहा या नहीं कि वो एक राज्य के उपमुख्यमंत्री हैं. लाखों लोग उनकी तरफ उम्मीद से देख रहे हैं. वो इस उम्मीद से देख रहे हैं कि अब तो उनके राज्य के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री कोई ना कोई रास्ता निकालेंगे ही. उन्हें एक कमरे से निकालकर अपने गांव पहुंचा देंगे. उल्टे अपने लोगों का भार सुशील मोदी ने उन राज्यों पर डाल दिया जहां से छात्र या मज़दूर घर आना चाहते हैं.

वो कह रहे हैं कि उन्हें अंदाजा था कि केंद्र जल्द ही नए दिशानिर्देश जारी कर सकता है और वो लोग मानसिक तौर पर इसके लिए तैयार भी थे. अब कोई पूछे कि वो कैसी तैयारी थी? कोई पूछे कि एक दिन पहले सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को बधाई देने और अगले ही दिन “बस नहीं है” कहने को कैसे देखा जाए? अगर सरकार के पास बस नहीं है तो उसका इंतज़ाम भी तो किया जा सकता है.

आखिर राज्य में डबल इंजन की जो सरकार है वो किस काम की है? बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने इसी साल फरवरी में कहा था-बिहारियों में हुनर की कमी नहीं है. अगर चांद पर नौकरी निकले तो वो वहां जाकर भी काम कर लेंगे. अब कोई पूछे इनसे कि बिहारियों से चांद पर नौकरी करवाने वाली सरकार के पास दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में फंसे हुए मजदूरों को घर लाने के लिए बस क्यों नहीं है?

बिहार में कोरोना

बिहार में आज फिर covid-19 के चार नए मरीजों से कोरोना का खाता खुल चुका है. अब प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या 422 हो चुकी है. आज के चारों मरीज सीतामढ़ी जिले के हैं. इससे पहले कल भी काफी संख्या में कोरोना के नए मरीज मिले हैं. बिहार में बुधवार को कोरोना संक्रमण के 37 नए मामले सामने आने आए थे. राज्य के कुल 38 जिलों में से 29 जिलों में अबतक कोरोना ने पैर पसार लिए हैं.  बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि बुधवार को राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के 37 नए मामले सामने आए हैं.

देश में कोरोना 

स्वास्थ्य विभाग की ओर से गुरुवार सुबह जारी ताजा अपडेट के मुताबिक, अब तक देश में कुल 33610 कोरोना मरीजों की पुष्टि हुई है. इसमें से 1075 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8373 लोग ठीक हो चुके हैं. अभी देश में 23 हजार 651 एक्टिव केस हैं.

दुनिया में कोरोना 

कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है. इससे संक्रमित लोगों की संख्या दुनिया में बढ़कर 31.48 लाख हो गई है. दुनिया में कोरोना वायरस ने अब तक 2.18 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली है. राहत की बात यह भी है कि दुनिया भर में अब तक कोरोना नाम की इस महामारी से 9.62 लाख लोग ठीक भी हो चुके हैं.

Input : Asiaville Hindi

Muzaffarpur Now – Bihar’s foremost media network, owned by Muzaffarpur Now Brandcom (OPC) PVT LTD