बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) के बजट सत्र के दौरान जीरादेई के भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी (मार्क्‍सवादी-लेलिनवादी) विधायक अमरजीत कुशवाहा (Amarjeet Kushwaha) ने कहा कि वे जेल से आते हैं, इसलिए ऑनलाइन जवाब नहीं पढ़ सकते। विधायक सदन में जब अपने सवाल का मंत्री से उत्‍तर मांग रहे थे, तब विधानसभा अध्यक्ष ने उनसे कहा कि जवाब ऑनलाइन उपलब्‍ध है। इसपर विधायक ने उपरोक्‍त जवाब दिया। उधर, नीतीश कैबिनेट में मंत्री रामप्रीत पासवान (Ram Preet Paswan) ने कहा कि सचिव से बड़ा मंत्री होता है, इसलिए सचिव को मंत्रालय बुलाया जाना चाहिए।

मंत्री का ऑनलाइन जवाब पढ़ने में जताई असमर्थता

बिहार विधानसभा में सीपीआइ एमएल विधायक अमरजीत कुशवाहा ने अपने सवाल का जवाब मांगा। इसपर विधानसभा अध्‍यक्ष ने कहा कि मंत्री ने जवाब दे दिया है, जो ऑनलाइन उपलब्‍ध है। इसपर विधायक ने अध्‍यक्ष से दोबारा जवाब दिलवा देने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा, ”हुजूर हम जेल से आते हैं। वहां ऑनलाइन का जवाब नहीं मिल सकता है। हम कैसे पढ़ें ऑनलाइन जवाब? इसपर विधानसभा अध्यक्ष ने भी तुरंत कहा- पीए जेल में नहीं हैैं न? उन्हें जबाव पढऩे को कहिए। जबाव उनसे निकलवा कर पढि़ए।

अमरजीत कुशवाहा ने शिक्षा विभाग से संबंधित प्रश्न किया था। सीवान जिले से संबंधित था। उन्होंने पूछा कि मैरवां प्रखंड स्थित मिश्री सदा कॉलेज एक अनुदानित कॉलेज है। वर्ष 2008 से 2013 तक वहां अनुदान की राशि बकाया रहने से शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की स्थिति काफी दयनीय हो गयी है। सरकार बकाया अनुदान के भुगतान का विचार रखती है क्या?

मंत्री ने सचिव को मंत्रालय बुलाने की रखी मांग

विधान परिषद में भारतीय जनता पार्टी कोटे से मंत्री रामप्रीत पासवान ने बड़ा बयान दिया। उन्‍होंने कहा कि मंत्री का ओहदा सचिव से बड़ा होता है, इसलिए सचिव को मंत्रालय बुलाया जाना चाहिए। मामला प्रश्नोत्तर काल में उद्योग विभाग से जुड़े एक सवाल पर चर्चा के दौरान उठा। आरजेडी के विधान पार्षद रामचंद्र पूर्वे के उद्योग विभाग से जुड़े सवाल का मंत्री शाहनवाज हुसैन जवाब दे रहे थे। इसी बीच सचिवालय और मंत्रालय पर बहस होने लगी। आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह ने कहा कि ‘मंत्रालय’ नहीं ‘सचिवालय’ होता है। इसपर एक अन्य एमएलसी ने बताया कि महाराष्ट्र में इसे मंत्रालय कहा जाता है। इसी दौरान मंत्री रामप्रीत पासवान ने भी कहा कि मंत्री का ओहदा सचिव से बड़ा होने के कारण ‘सचिवालय’ नहीं ‘मंत्रालय’ ही कहा जाना चाहिए।

विधान परिषद में सचिवालय और मंत्रालय की बहस के बाद अब नीतीश सरकार को इस मुद्दे पर सफाई देनी पड़ सकती है। सरकार में मंत्री ने ही कहा है कि बिहार में सचिवालय को अब अलग-अलग मंत्रालयों के अनुसार बुलाना चाहिए।

Input: Dainik Jagran

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