धान की खरीद को लेकर सरकार के ताजा निर्णय से किसान चकित हैं। सरकार ने खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर डेढ़ गुना किया। अभियान तेज हुआ। एलपीसी और निबंधन सहित कई तरह की छूट दी गई। जनवरी में खरीद का रिकार्ड बना। लेकिन, किसानों का धान तैयार हुआ तो सरकार ने खरीद का समय दो माह कम कर दिया। अब पूर्व में घोषित 31 मार्च की जगह 31 जनवरी तक ही धान की सरकारी खरीद होगी।

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राज्य के धान में शुरू में नमी काफी रहती है। सरकार 17 प्रतिशत तक नमी वाला धान ही खरीद करती है। लिहाजा जनवरी के बाद ही धान की खरीद अधिक होती है। उस समय तक किसानों के धान से नमी कम हो जाती है। हर साल सरकार नमी में दो प्रतिशत का छूट भी देती थी। इस बार उस लाभ से भी किसान वंचित हो गये। लिहाजा 45 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य पूरा होने पर संशय है।

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पिछले सालों का रिकार्ड भी देखें तो जितने भी धान की खरीद हुई उसका दो तिहाई से ज्यादा हिस्सा जनवरी के बाद ही क्रय केन्द्रों पर आया। पिछले साल बीस लाख टन धान की खरीद हुई। लगभग 17 लाख टन धान की खरीद जनवरी के बाद ही हुई। उसके पहले लगभग 16 लाख टन धान की खरीद हुई थी तो 31 जनवरी तक मात्र 2.5 लाख टन धान की ही खरीद हुई थी। इस साल अभियान तेज हुआ।

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सहकारिता सचिव बंदना प्रेयसी ने खरीद अभियान को लेकर चुस्ती दिखाई तो जनवरी के आरंभ में ही खरीद का आंकड़ा नौ लाख टन के आसपास पहुंच गया। पहली बार लगा कि सरकार लक्ष्य पूरा कर लेगी। लेकिन तब तक अभियान को संक्षिप्त करने की घोषणा हो गई। किसान एक बार फिर हाथ मलते रहे गए।

खरीद अभियान को संक्षिप्त करने का संकेत शुरू में ही सहकारिता मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने दे दिया था। तब उन्होंने कहा था कि हमारा लक्ष्य है कि 15 फरवरी तक किसानों का धान खरीद लिया जाए। लेकिन तब सवालों के जवाब में उन्होंने यह भी कहा था कि यह लक्ष्य है लेकिन धान खरीद 31 मार्च तक चलती रहेगी। लेकिन अब खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने बजाप्ता नोटिस निकालकर किसानों से 31 जनवरी तक धान बेचने की अपील की है।

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सरकार कभी धान खरीदना नहीं चाहती है। लक्ष्य सिर्फ दिखावे के लिए रखती है। कभी पूरा नहीं करती है। इस बार लगा कि लक्ष्य पूरा हो जाएगा तो खरीद का दो महीना समय कम कर दिया गया। दक्षिण बिहार के कई किसानों का तो धान अभी बेचने लायक तैयार भी नहीं हुआ है।- योगेन्द्र सिंह, प्रगतिशील किसान, रोहतास

Source : Hindustan

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