बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घड़ी अब नजदीक आते जा रही है। मई-जून महीने में संभावित पंचायत चुनाव नौ चरणों में कराए जा सकते हैं। इस संभावना और राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय अभी से सुरक्षा तैयारियों में जुट गया है। पुलिस मुख्यालय जिलावार रिपोर्ट तैयार कर रहा है, ताकि पुलिस बल को चुनाव में तैनात किया जा सके।
सभी जिलों से पुलिस बल की आवश्यकता का हो रहा आकलन
मुख्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव के मद्देनजर पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों से जानकारी तलब की है कि उनके जिले में कितने पुलिस बल की आवश्यकता है। असल में निर्वाचन आयोग ने पुलिस मुख्यालय से शांतिपूर्ण मतदान के लिए आवश्यक पुलिस और सुरक्षा बलों की मांग की थी। जिसके बाद यह कवायद शुरू की गई है।
गृह विभाग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों से मांगी जानकारी
इधर गृह विभाग ने जिलों के निर्वाचन पदाधिकारियों से यह जानकारी मांगी है कि उनके जिले में प्रखंडवार मतदाताओं की संख्या कितनी है। मतदान के लिए कितने केंद्र बनाए जा रहे हैं। वज्रगृह कितने बनाए जाने की संभावना है। इसके साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी भी गृह विभाग ने जिलों से तलब की है। सूत्रों ने बताया कि जिलों से जानकारी मिलने के बाद ही सामान्य मतदान केंद्र, संवेदनशील मतदान केंद्र, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस बलों की तैनाती वज्रगृहों की सुरक्षा को लेकर अंतिम निर्णय लेगा।
समय पर चुनाव कराने में फंस रहा ईवीएम का पेंच
पंचायत चुनाव को लेकर समय पर संपन्न कराने में ईवीएम का पेंच फंस सकता है। बिहार के पंचायत चुनावों में पहली बार ईवीएम के इस्तेमाल पर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के बीच सहमति बन गई है। हालांकि इस प्रस्ताव के लिए ईवीएम की खरीद होनी बाकी है और यह तब होगा जब भारत निर्वाचन आयोग इसके लिए अनुमति दे देगा। अब तक ईसीआइ से इसकी अनुमति नहीं मिली है। पंचायत चुनाव में ईस्तेमाल होने वाली ईवीएम लोकसभा, विधानसभा और नगर परिषद चुनाव से अलग होगा। इस मल्टी पोस्ट ईवीएम से एक साथ पंचायत चुनाव के सभी छह पदों के लिए वोट डाले जाते हैं।
Input: Dainik Jagran









