जिले में निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम व क्लीनिकों में सही से बायोकचरे का निष्पादन नहीं हो रहा है। जिले के 51 निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम व क्लीनिक संचालकों को नोटिस भेजा गया है। उत्तर बिहार के सवा चार सौ ऐसे संस्थानों को नोटिस जारी किया गया है।

कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया था

बीते दिनों जूरनछपरा व इसके आसपास के इलाकों में कोरोना संक्रमण के बाद भी मास्क, पीपीई किट व ग्लव्स फेंके मिलने का मामला सामने आया था। शिकायत मिलने के बाद बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया था। बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार ने कहा कि मेडिकल अपशिष्ट सामान्य कचरा नहीं होता है। इसका निपटान बेहद सुरक्षित तरीके से किया जाता है। बताया कि जहां से मेडिकल कचरा निकल रहा वहां अलग-अलग रंगों के कूड़ेदान रखना जरूरी है। लाल कूड़ादान माइक्रोबायोलॉजी, सॉयल्ड व सॉलिड वेस्ट के लिए, पीला कूड़ादान मानव व पशु अंग, एक्सपायरी दवाएं, केमिकल वेस्ट, सफेद पंक्चर प्रूफ कंटेनर में वेस्ट शार्प तथा ब्लू कार्ड बोर्ड बॉक्स में केवल कांच के सामान का निस्तारण होना चाहिए।

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