मौसम में ठंड का असर लगातार बढ़ रहा है। तापमान के गोते खाने से सर्दी कंपकंपाने लगी है। सोमवार की सुबह घना कुहासा छाया रहा। इसके साथ तापमान में गिरावट के कारण ठंड में इजाफा हुआ है और कनकनी बरकरार है। अधिकतम तापमान 17.1 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 8.2 रिकॉर्ड किया गया। यहां यह गौरतलब है कि वर्ष 2013 से अबतक 21 दिसंबर के अधिकतम तापमान का यह न्यूनतम बिंदु रहा।

ठंड के कारण सुबह-शाम सड़कों पर वाहनों का परिचालन कम दिख रहा है। कुहासा की वजह से वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। गांव से लेकर शहर तक लोग जगह-जगह अलाव जला रहे हैं। मौसम के पूर्वानुमान में बताया गया है कि दिन में धूप निकल सकती है लेकिन कनकनी बरकरार रहेगी।

ठंड के कारण बीमारियों की मार

ठंड बढऩे के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी ज्यादा हैं। अस्पतालों में सर्दी-खांसी व कोल्ड डायरिया के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। केजरीवाल अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार व डॉ. बीएन तिवारी ने सलाह दी है कि बच्चों को ठंड से बचाए रखें। उनको गर्म पानी का सेवन कराते रहें। शरीर पर पर्याप्त गर्म कपड़े रहने चाहिए। अगर उल्टी, दस्त हो तो नमक, चीनी, पानी का घोल या ओआरएस का सेवन कराएं। अगर इससे निजात नहीं मिले तो चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

ठंड में वृद्धि की यह वजह

लद्दाख, जम्मू-कश्मीर व हिमाचल प्रदेश में हो रही बर्फबारी से उत्तर बिहार में शीतलहर का प्रभाव दिख रहा है। तेज बर्फीली हवा चलने से मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के जिलों में ठंड अचानक बढ़ गई है। इससे न्यूनतम तापमान इस मौसम में सबसे नीचे चला गया है। न्यूनतम तापमान 6.9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। जबकि मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अभी तापमान न्यूनतम 10 से 11 डिग्री सेल्सियस के बीच रहना चाहिए।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 20 दिसंबर को वर्ष 2004 से 2020 के दौरान 17 वर्षों में दूसरी बार न्यूनतम तापमान सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। इससे पहले 2015 में न्यूनतम तापमान सबसे नीचे 4.8 डिग्री पर पहुंचा था। इसके बाद दूसरी बार वर्ष 2020 में न्यूनतम तापमान सबसे नीचे 6.9 डिग्री पर पहुंचा है।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के मौसम विभाग के नोडल पदाधिकारी डॉ. ए सत्तार ने बताया है कि अभी बर्फीली हवाएं उत्तर बिहार में चलती रहेंगी। इससे कुछ दिनों तक तापमान में और गिरावट होगी। आसमा में हल्के बादल छाए रहेंगे। कुहासा का असर भी दिखेगा। पशु पालकों को सलाह दी गई है कि वे दुधारू पशुओं को ठंड से बचाएं तथा उनको उचित आहार देते रहें।

Input: Dainik Jagran

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