देसी वस्त्र व अहिंसा के विचार पर चलने वाला जिला खादी ग्रामोद्योग संघ अब मक्के की रोटी संग साग और चटनी भी चखा रहा है। इसके साथ ही इस कोरोना काल में रोजगार उपलब्ध कराने में भी जुटा है। संघ की पहल है रोटी से रोजगार देने की। इसके लिए पारंपरिक चूल्हे पर मक्के की रोटी बनाकर डिलीवरी करने की योजना शुरू की गई है। रोटी के साथ सरसों, मेथी, बथुआ का साग व चटनी भी परोसी जा रही है। मुजफ्फरपुर में दो दिन पहले ही इसकी शुरुआत हुई है। 100 रुपये में दो रोटी, साग व चटनी उपलब्ध कराई जा रही है।
रोजगार का नेटवर्क बढ़ेगा
शुरुआती नतीजे उत्साहजनक हैं। प्रतिदिन 30 से 40 ऑर्डर मिल रहे हैं। खादी ग्रामोद्योग संघ का मानना है कि इस काम से रोजगार का नेटवर्क बढ़ेगा। इसमें अनाज लाने, भोजन तैयार करने, घरों तक पहुंचाने की एक लंबी चेन बनेगी। संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने बताया कि इस काम के संचालन की जवाबदेही अनिल अनल को दी गई है।
मक्के के बाद मडूआ, बाजरा, जौ, चावल की रोटी भी उपलब्ध कराए जाने की योजना है। साथ ही दही, घी, व गुड़ तैयार करने की भी योजना है। लकड़ी के जलावन वाले चूल्हे पर चाय व कॉफी तैयार की जा रही है। संघ अध्यक्ष ने बताया कि 30 से 40 हजार रुपये की पूंजी लगाई गई है। अब परिसर में आकर लोग चाय-कॉफी, रोटी-साग का आनंद ले रहे हैं। किसान समूह बनाकर इस काम को आगे बढ़ाया जा रहा है।
जिला खादी ग्रामोद्योग के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने बताया कि मोबाइल से बुङ्क्षकग कर होम डिलीवरी भी की जाती है। संचालन कर रहे अनिल अनल ने बताया कि एक दिन मकई की रोटी एक गांव में खाने को मिला तो मन मे यह विचार आया कि इसे संघ की ओर से लोगों को खिलाएं और फिर खादी ग्रामोद्योग संघ के अध्यक्ष से मिलकर इसकी शुरुआत की है।
Input: Dainik Jagran