बिहार में चुनावी सरगर्मी जोरों पर है. पार्टियां गठबंधन को मजबूत बनने के लिए कई बड़े फैसले ले रही हैं. राजद ने अपने सिटिंग एमएलए की सीट काटकर गठबंधन पार्टी को दे दिया है. यह महागठबंधन में राजद का नया प्रयोग है. जिसमें उसने अपने सिटिंग विधायक की टिकट काटकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह गठबंधन के मजबूती के लिए हर कुर्बानी देने के लिए तैयार है.

मुजफ्फरपुर जिले का औराई विधानसभा क्षेत्र (89) में औराई और कटरा प्रखण्ड की कुल 42 पंचायतों को मिलाकर बना है. जहां इस चुनाव में भी प्रमुख मुद्दा चचरी पुल, बाढ़ और विस्थापन बना हुआ है. मुजफ्फरपुर के बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में दोनों प्रखंड आज भी शामिल हैं. इस वर्ष बाढ़ ने औराई विधनसभा क्षेत्र में काफी तबाही मचाई है. अब हम राजनीतिक रूप से औराई विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो 1962 में यहां से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पांडव राय पहली बार औराई से विधायक बने.

1962 से लेकर 2015 तक यदि हम विजयी प्रत्याशियों की बात करें तो 1962 और 2015 के बीच में एक बार 1967 में सीएमपी सिंह और दूसरी बार 1972 मे राम बाबू सिंह कांग्रेस से चुनाव जीते. फिर से 1977 से लगातार 6 बार पांडव राय के बेटे गणेश प्रसाद यादव 2000 तक विधायक रहे.जिन्हें भी जदयू प्रत्याशी अर्जुन राय ने ही हराया .

जदयू विधायक अर्जुन राय के लोकसभा चुनाव में जीतने के बाद फिर औराई से राजद प्रत्याशी डॉ सुरेंद्र राय राजद के टिकट पर उप चुनाव में डॉ सुरेंद्र राय उप चुनाव में वर्ष 2009 में जीत हासिल कर एक वर्ष तक विधायक रहे. 2010 में राजद के टिकट पर फिर चुनाव लड़े, लेकिन इन्हें भाजपा प्रत्याशी रामसूरत राय ने ही पराजित कर दिया.

राजद ने इन्हें पुनः 2015 में टिकट देकर औराई का प्रत्याशी बनाया और राजद के डॉक्टर सुरेंद्र राय ने बीजेपी के राम सूरत राय को हराया. ऐसे में महागठबंधन में सीट शेयरिंग के तहत यह सीट माले को दी गई है. औराई विधानसभा क्षेत्र की पिछले 50 वर्षों से विजयी प्रत्याशियों की लिस्ट देखने से ऐसा लग रहा है कि पिछले 50 वर्षों में किसी पार्टी के प्रत्याशी जीते हों लेकिन यादव जाति से ही रहे है.

2015 के चुनाव में भी बीजेपी के राम सूरत राय को राजद के डॉ सुरेंद्र कुमार ने ही पराजित किया था. ऐसे में महागठबंधन में राजद का यह एक नया प्रयोग है जिसमे उसने अपने सिटिंग विधायक की टिकट काटकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह गठबंधन के मजबूती के लिए हर कुर्बानी देने के लिए तैयार है.

इसका प्रभाव राजद के पारम्परिक वोटरों पर कितना प्रभाव पड़ेगा यह तो आने वाला समय बताएगा.
साथ ही वही देखने वाली बात यह भी होगी कि टिकट कटने के बाद डॉक्टर सुरेंद्र राय का अगला राजनीतिक कदम क्या होता है.

प्रमुख मुद्दे औराई विधानसभा क्षेत्र में आज भी सुंदर खौली समेत आधा दर्जन से ज्यादा चचरी पुल है. तो हर साल की तरह इस बार भी इलाके में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ एक बड़ी समस्या बनी हुई है. वहीं बांध बनाने के बाद बांध के अंदर रहने वाले कई विस्थापित गांवों के लिए आज समस्याएं बनी हुई हैं.

Input: Aaj Tak

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