फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के नाम पर राजनीति शुरू हो गई है. इसकी शुरुआत सबसे पहले बीजेपी (BJP) की तरफ से हुई है. पिछले दिनों बिहार बीजेपी के एक नेता ने सुशांत सिंह राजपूत का फोटो सहित कई पोस्टर छपवाए थे, जिसमें लिखा था ‘न भूले हैं न भूलेंगे’. सुशांत सिंह राजपूत का मुद्दा अब बिहार विधानसभा चुनाव में उठेगा यह लगभग साफ हो चुका है. शिवसेना और कांग्रेस जैसी पार्टियां पहले से ही कहती आ रही है कि बीजेपी बिहार चुनाव को लेकर सुशांत मामले को तूल दे रही है. जबकि सीबीआई, ईडी और अब एनसीबी की जांच में भी मामला अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है. ऐसे में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार से नाराज चल रहे एलजेपी नेता चिराग पासवान भी इस मुद्दे को हाथ से नहीं जाने देना चाहेंगे.

राजनीतिक पार्टियों को लिए क्यों मजबूरी है सुशांत का मुद्दा
बिहार में राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं. जेडीयू ने जहां सोमवार को वर्चुअल रैली कर चुनाव का ऐलान कर दिया है तो वहीं कांग्रेस ने भी वर्चुअल रैली के जरिए बिहार चुनाव में दमखम के साथ उतरने की बात कही है. ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां मुद्दे की तलाश में हैं. ज्यादातर युवा वोटर होने के कारण सभी पार्टियों की नजर इस पर है. इसी को ध्यान में रख कर पिछले दिनों बीजेपी ने सुशांत सिंह राजपूत का मुद्दा उछाल दिया है. वहीं एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान सुशांत सिंह की मौत के शुरुआती दिनों से ही सीबीआई जांच की मांग करते रहे हैं. इसके लिए चिराग बिहार के सीएम नीतीश कुमार को कटघरे में भी खड़ा कर चुके हैं.

बेरोजगारी के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए सुशांत का मुद्दा उठाया जा रहा है?
बिहार को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय कहते हैं, ‘बिहार की तमाम राजनीतिक पार्टियां सुशांत सिंह राजपूत मामले को भुनाने को लेकर बेचैन है. सभी पार्टियां सुशांत का मुद्दा बना कर एक जाति विशेष का चैंपियन बनना चाहती है. क्योंकि, बिहार में राजपूत मतदाताओं की संख्या ज्यादा है. कई विधानसभा सीटों पर राजपूत मातदाता उम्मीदवार को हरवाने और जितवाने का मद्दा रखते हैं. इसलिए ये पार्टियां राजपूत जाति के वोटर्स में अपनी पैठ बनाना चाह रहे हैं. सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच केंद्रीय एजेंसी कर रही है इसलिए इसका फायदा बीजेपी लेना चाह रही है. एलजेपी और जेडीयू भी इस मुद्दे को जरूर भुनाएगी. हालांकि, हमें नहीं लगता है कि दूसरी जाति के युवा इस मुद्दे पर मोबलाइज होंगे. बिहार में राजपूत जाति के मतदाता भारतीय जानता पार्टी और एनडीए के साथ हाल के कुछ वर्षों से साथ रहे हैं. एनडीए को इस बार डर है कि बेरोजगारी को लेकर जो असंतोष युवाओं में आया है उसको इस मुद्दे को उछाल कर और बिहारी अस्मिता से जोड़ कर खत्म कर देंगे. युवा मतदाता जो निराश हैं उसको ठंडा करने के लिए सुशांत सिंह राजपूत का मुद्दा एनडीए उठा रही है.’

आरजेडी और एलजेपी भी इस मुद्दे को भुनाएगी?
वहीं, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच में सीबीआई जांच में विलंब को लेकर नीतीश पर कटाक्ष कर चुके हैं. सुशांत की मौत के शुरुआती दिनों से ही तेजस्वी यादव नीतीश सरकार पर इस मामले को ज्यादा तवज्जो नहीं देने का आरोप लगाया था. ऐसे में अगर एनडीए या जेडीयू से अलग हो कर एलजेपी चुनाव लड़ती है तो वह सुशांत सिंह राजपूत का मुद्दा बना कर नीतीश सरकार पर हमलावर हो सकती है. आरजेडी भी इसी अंदाज में नीतीश कुमार को घेर सकती है.

हाल के दिनों में जेडीयू और लोक जनशक्ति पार्टी के बीच रिश्ते और खराब होते जा रहे हैं. सोमवार को दिल्ली में एलजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में जेडीयू को लेकर बड़ी नाराजगी देखने को मिली है. एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान के सामने पार्टी के नेताओं ने जेडीयू के रवैए पर सख्त ऐतराज जताया है और खुला ऐलान कर दिया है कि किसी भी कीमत पर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एलजेपी को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए. इस बैठक में एलजेपी ने बिहार में 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारने पर भी चर्चा की. बैठक में सभी सदस्यों ने अपनी राय बिहार में होने वाले विधानसभा के चुनाव के लिए रखी.
Source : News18 (Ravishankar Singh)




