रविवार दाेपहर के 3 बजे हैं और हम खड़े हैं स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के आइनॉक्स बोकारो प्लांट में। यहां दिन-रात लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) तैयार किया जा रहा है। बाेकाराे स्टील लिमिटेड के कैप्टिव प्लांट में भी ऑक्सीजन तैयार करनी वाली मशीनें शोर कर रही हैं। यहां से 46.48 टन ऑक्सीजन लेकर चार टैंकर लखनऊ के लिए निकल चुके हैं। पांच टैंकरों में 75 टन ऑक्सीजन भरे जा रहे हैं, जो देर रात निकलेंगे। कैप्टिव ऑक्सीजन प्लांट में 90 बीएसएल कर्मी हैं।

मेसर्स आइनॉक्स के प्लांट में करीब 80 कर्मी हैं। 8-8 घंटे के तीन शिफ्टाें में लगातार उत्पादन चल रहा है। मजदूरों का लंच बॉक्स सामने देख हमने उनसे यूं ही पूछ लिया… खाना खा लिया? मजदूर बोले- हर दिन 150 टन ऑक्सीजन बनानी है। अभी 100 टन भी नहीं बनी। समय कम है। जब तक 50 टन ऑक्सीजन तैयार नहीं कर लेते, खाना नहीं खाएंगे।

स्टील प्लांट के प्रभारी निदेशक प्रभारी अमरेंदु प्रकाश कहते हैं कि वर्तमान स्थिति चुनौती भरा है। कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन लेवल कम होने की शिकायत वाले मरीज जैसे-जैसे अस्पतालों में बढ़ते गए, ऑक्सीजन की मांग भी बढ़ती गई। इससे अधिकतर शहरों में ऑक्सीजन की कमी हाे गई। मरीजाें की सांसें रुकने लगीं। ऐसे वक्त में सेल की इस ईकाई ने देश को ऑक्सीजन देने का बीड़ा उठाया है।
अप्रैल माह में किसे कितनी ऑक्सीजन दी(आंकड़े मीट्रिक टन में)
झारखंड 308 उत्तर प्रदेश 456 बिहार 374 प. बंगाल 19 पंजाब 44 महाराष्ट्र 19 मध्य प्रदेश 16
Input: Bhaskar





