बिहार में कोरोना महामारी के मामले सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आए हैं। राज्य में अबतक 89 फीसदी कोरोना संक्रमित मरीज ग्रामीण इलाकों से पाए गए हैं। जबकि शहरी क्षेत्रों से 19 फीसदी संक्रमित मरीजों की पहचान की गई है।

स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बिहार की 80 फीसदी से अधिक आबादी गांवों से जुड़ी है इसलिए संक्रमण का प्रभाव भी सबसे अधिक ग्रामीण इलाकों में ही देखा गया है। राज्य में अबतक 1,28,850 संक्रमितों की पहचान हुई है।

03 मई के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी बिहारी लॉक डाउन होने के कारण बिहार वापस लौटे थे। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा प्राथमिकता के आधार पर उस दौरान बनाये गए क्वारंटाइन सेंटरों पर उनकी कोरोना जांच करायी गयी थी। उस वक्त प्रवासियों को 14 दिनों तक क्वारंटाइन सेन्टरों पर ही रखने का निर्देश दिया गया था। करीब 16 लाख लोग बिहार लौटे थे। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर अभियान चलाकर कोरोना संक्रमितों का सर्वेक्षण किया गया था और सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित मरीजों की पहचान कर उनकी कोरोना जांच करायी गयी थी।

पहले लोग बाहर से आते थे तो क्वारंटाइन सेन्टरों में रहते थे जबकि अब सीधे गांव में अपने घर जा रहे हैं। साथ ही, जांच की सुविधाओं में विस्तार से भी ग्रामीण इलाकों में अधिक मरीजों की पहचान की जा रही है।
-डॉ. मनीष मंडल, अधीक्षक, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना

शुरू में गांव में लोगों ने रास्ता रोक कर रखा और ऐहतियात बरती, तब शहरी इलाके में ही मरीज अधिक मिल रहे थे। लेकिन बाद में ग्रामीण इलाकों में कोरोना को लेकर एहतियात बरतने में ढीलापन आ गया जबकि शहरी इलाकों में लोग सचेत रहें, इसका भी असर हुआ है।
– डॉ. अजय सिन्हा, नोडल ऑफिसर, एनएमसीएच

Input: Live Hindustan

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