केंद्र सरकार की योजना वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत अब मुजफ्फरपुर के साथ सीतामढ़ी को भी लीची उत्पादन के लिए बढ़ावा दिया जाएगा। इन दोनों ही जिलों को लीची उत्पादन व उसके संवर्द्धन व व्यापार के लिए सहायता दी जाएगी। योजना के तहत राजधानी पटना को प्याज उगाने की जिम्मेवारी सौंपी गई है, तो मुख्यमंत्री का जिला नालंदा आलू के उत्पादन व कारोबार को बढ़ावा देगा। मखाना के लिए प्रसिद्ध मधुबनी को चार जिलों से टक्कर मिली है व मखाना के लिए राज्य में पांच जिलों का चुनाव किया गया है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने जिलों की पहचान बने कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए यह योजना बनायी है। जिलों के चयन का आधार यह बनाया गया है कि फिलहाल जिले में किस चीज का उत्पादन सर्वाधिक हो रहा है और किस चीज के उत्पादन की संभावना सबसे अधिक है। इस श्रेणी में जब लीची की बारी आई तो मुजफ्फरपुर के साथ सीतामढ़ी को भी मंत्रालय ने शामिल किया।

अब दोनों ही जिलों में लीची उत्पादन व इसपर आधारित उद्योग के लिए योजना बनाकर सहायता उपलब्ध करायी जाएगी। वहीं मखाना के लिए मधुबनी के अलावा अररिया, दरभंगा, कटिहार, सहरसा व सुपौल का भी चुनाव किया गया है। इस योजना के तहत पटना व शेखपुरा जिले को प्याज उगाने की जिम्मेवारी दी गई है तो वैशाली के हिस्से में मधु उत्पादन आया है। मुख्यमंत्री के जिले नालंदा को आलू उगाने की जिम्मेवारी सौंपी गई है जबकि केला खगड़िया व अमरूद कैमूर के हिस्से में आया है। जिला उद्यान पदाधिकारी अमरेंद्र कुामर ने बताया कि संबधित जिलों में कृषि उत्पादों के विकास व व्यवसाय के लिए वृहद कार्ययोजना तैयार की जा रही है। निर्धारित मापदंड के हिसाब से योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा। वहीं जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक परिमल कुमार सिन्हा ने कहा कि जिला प्रशासन के निर्देश पर जिले में लीची पल्प आधारित उद्योगों की कार्यायोजना बनायी जा रही है, जिसका प्रस्ताव आगे भेजा जाना है।

Source : Hindustan

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